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Mathura News: विलासगढ़ पर जीवंत हुई जोगिन लीला
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विलासगढ़ पर जोगिन लीला करते स्वरूप।
- फोटो : mathura
बरसाना। बूढ़ी लीला महोत्सव के तहत मंगलवार को विलासगढ़ पर जोगिन लीला का आयोजन किया गया। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु इस अलौकिक लीला को देख भक्ति-रस में सराबोर हो गए।
कार्यक्रम की शुरुआत में श्याम स्वामी चिकसौली वालों की रास मंडली ने रासविलास और युगल नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद रासमंडल चबूतरे पर राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने मयूर नृत्य और जोगिन लीला का ऐसा अद्भुत अभिनय किया कि जनसमूह अलौकिक आनंद में डूब गया।
लीला प्रसंग में श्रीकृष्ण ने राधाजी के निज दर्शन पाने के लिए जोगिन का वेश धारण किया। महल में पहुंचकर पुकारा कोई अपनी भाग्यरेखा दिखवाले। यह सुनकर सखियां ललिता और विशाखा उन्हें भीतर ले आईं।
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जोगिन बने श्रीकृष्ण ने राधाजी की हथेली देखकर कहा कि तुम्हारा विवाह नंदकिशोर से होगा, तभी राधाजी और सखियां उनके स्वर और भावों से पहचान गईं कि यह कोई साधारण जोगिन नहीं, बल्कि स्वयं श्यामसुन्दर हैं। जैसे ही यह रहस्य खुला, वातावरण राधे-कृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। ढोल-मंजीरे और शंखध्वनि के मध्य भक्त भाव-विह्वल होकर झूम उठे। संवाद
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कार्यक्रम की शुरुआत में श्याम स्वामी चिकसौली वालों की रास मंडली ने रासविलास और युगल नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद रासमंडल चबूतरे पर राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने मयूर नृत्य और जोगिन लीला का ऐसा अद्भुत अभिनय किया कि जनसमूह अलौकिक आनंद में डूब गया।
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लीला प्रसंग में श्रीकृष्ण ने राधाजी के निज दर्शन पाने के लिए जोगिन का वेश धारण किया। महल में पहुंचकर पुकारा कोई अपनी भाग्यरेखा दिखवाले। यह सुनकर सखियां ललिता और विशाखा उन्हें भीतर ले आईं।
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जोगिन बने श्रीकृष्ण ने राधाजी की हथेली देखकर कहा कि तुम्हारा विवाह नंदकिशोर से होगा, तभी राधाजी और सखियां उनके स्वर और भावों से पहचान गईं कि यह कोई साधारण जोगिन नहीं, बल्कि स्वयं श्यामसुन्दर हैं। जैसे ही यह रहस्य खुला, वातावरण राधे-कृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। ढोल-मंजीरे और शंखध्वनि के मध्य भक्त भाव-विह्वल होकर झूम उठे। संवाद