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जवाहरबाग कांड की जांच में झुलसेंगे कई ‘सियासी धुरंधर’

Sat, 04 Mar 2017 12:23 AM IST
पुनीत शर्मा
पुनीत शर्मा Updated Sat, 04 Mar 2017 12:23 AM IST
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investigation will be a taboo for many
jawahar bagh
जवाहरबाग कांड की जांच की आंच में उत्तर प्रदेश के कई ‘सियासी धुरंधर’ झुलसेंगे। रामवृक्ष के कई मंत्रियों और विधायकों से गहरे संबंध थे। जवाहरबाग में बने रामवृक्ष के आफिस से जो डायरी मिली थी उसमें प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों के  नाम और नंबर लिखे हुए थे। पूर्वांचल के कई नेता तो उसके संगठन को बाकायदा चंदा दिया करते थे।
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रामवृक्ष ने स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन का गठन उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में कर रखा था। हर जिले में संगठन का प्रमुख बनाया गया था। मासिक बैठक हुआ करती थी। रामवृक्ष ने अपने संगठन से अधिकांश वही लोग जोड़ रखे थे, जो बाबा जयगुरुदेव के अनुयायी थे। क्योंकि रामवृक्ष भी जयगुरुदेव का शिष्य रहा था लिहाजा उसे सब जानते भी थे। 
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एक जनवरी, 2014 को रामवृक्ष यादव अपने समर्थकों के साथ मथुरा पहुंचा था। दो दिन के सत्याग्रह की अनुमति मांगी और जवाहरबाग में घुस गया। उसके बाद निकला ही नहीं। रामवृक्ष के संगठन को यूपी के साथ दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बिहार और मध्यप्रदेश तक से चंदा मिलता था। जब जवाहरबाग में हिंसा के बाद चेकिंग की गई थी तो रामवृक्ष के आफिस से कई दस्तावेज ऐसे मिले थे, जिन पर चंदे का पूरा उल्लेख था।
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कहीं से चावल मिला था तो कहीं से आटा। चीनी और गेहूं भी बड़ी मात्रा में जवाहरबाग को सप्लाई किया जा रहा था। प्रदेश सरकार के कई सियासी दिग्गजों से भी रामवृक्ष के करीबी संबंध बताए जा रहे हैं। अब जब सीबीआई जांच हो रही है तो इन सभी बिंदुओं पर भी पड़ताल की जाएगी। नेताओं से भी पूछताछ होगी।

यह है सियासी संबंधों का प्रमाण
- लखनऊ से एक अधिकारी और मंत्री ने फोन करके रामवृक्ष को जवाहरबाग में जगह देने को कहा था
- रामवृक्ष ने जब उद्यान विभाग का दफ्तर कब्जाया तो किसी भी कार्रवाई से रोक दिया गया था
- भीड़ को भगाने के लिए बिजली और पानी की सप्लाई रोकी गई तो लखनऊ के आदेश पर बिजली चालू हुई
- जब रामवृक्ष और समर्थकों पर मुकदमे दर्ज हुए तो गिरफ्तारी से पुलिस को रोका गया
- कई मुकदमों में रामवृक्ष का नाम शामिल करने से रोका गया
- जवाहरबाग में लाल और नीली बत्ती लगी गाड़ियों का आना-जाना था
- जब पुलिस ने रामवृक्ष और उसके समर्थकों को खदेड़ने की अनुमति मांगी तो रोका गया
- बड़े अधिकारी बार-बार कार्रवाई से बचने की कोशिश करते रहे
- लखनऊ के इशारे पर कब्जाधारियों के राशन कार्ड तक बनाए गए    
- वोटर लिस्ट तक में कई लोगों के नाम शामिल हो रहे थे
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