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पहले ममता आंचल, अब जिंदगी की डोर टूटी: जान बचाने के लिए छटपटाती रही शिवानी, तरस न आया; किशोरियों ने इसलिए मारा

Sun, 23 Aug 2026 03:35 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा
अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 23 Aug 2026 03:35 PM IST
सार

मथुरा में राजकीय बाल गृह बालिका में किशोरी की हत्या में बड़ा खुलासा हुआ है। अलीगढ़ की किशोरी ने परिवार से मिलने की छटपटाहट में साथी के साथ मिलकर किशोरी की हत्या की थी। घर में चोरी कर लड़के के साथ जाने से परिवार ने किशोरी से रिश्ता तोड़ दिया था।

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Mathura Girls Shelter Home Murder Teen Girl Drowned in Water-Filled Bucket CCTV Cameras Allegedly Smashed
balika grih murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बरेली निवासी 14 वर्षीय शिवानी से महज पांच साल की उम्र में पहले ममता का आंचल छूट गया और अब जिंदगी की डोर भी टूट गई। मां के मानसिक रूप से विक्षिप्त होने के कारण किशोरी को बाल्यावस्था में ही रामपुर के बाल गृह में रहना पड़ा। दस साल के बाद जब वह दो महीने पहले ही वृंदावन के राजकीय बाल गृह में पहुंची थी। यहां परिवार से मिलने के लिए छटपटा रही अलीगढ़ की किशोरी ने अपनी एक अन्य साथी मदद से उसको दर्दनाक मौत दे दी।
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दोनों ने किशोरी को बेरहमी से पीटा और बाद में बाथरूम में रखी बाल्टी में उसकी सिर डुबोकर हत्या कर दी। पुलिस जांच में सामने आया है कि अलीगढ़ की किशोरी अपने घर से चोरी करके एक लड़के के साथ चली गई थी। इसके बाद परिवार ने उससे रिश्ता तोड़ दिया लेकिन किशोरी परिवार के साथ रहना चाहती थी। वहीं, पीलीभीत की रहने वाली एक अन्य किशोरी भी घर से किसी लड़के के साथ चली गई थी। पुलिस ने जब उसे बरामद किया तो उसने परिवार के साथ जाने को तैयार नहीं हुई थी।
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इस किशोरी के पिता दिल्ली पुलिस में तैनात थे। उन्होंने कोरोना काल में वीआरएस ले लिया था। पुलिस ने किशोरी को बरामद कर जब परिवार को जानकारी दी तो उन्होंने उससे रिश्ता तोड़ने की बात कही। बरेली की रहने वाली किशोरी 17 जून को वृंदावन के बाल गृह पहुंची थी। वहीं, अलीगढ़ और पीलीभीत की किशोरियां करीब डेढ़ महीने पहले ही यहां आई थीं। अलीगढ़ वाली किशोरी लगातार परिवार से मिलने के लिए छटपटा रही थी। इसी छटपटाहट में उसने बाल गृह को बंद कराने के लिए हत्या की साजिश रची।

बराबर-बराबर में था शिवानी और अलीगढ़ की किशोरी का बिस्तर
साजिश में उसने पीलीभीत की किशोरी को भी शामिल कर लिया। शिवानी और अलीगढ़ की किशोरी का बिस्तर बराबर-बराबर में था। उन्होंने पहले किशोरी को बातों में फंसाया और बाथरूम में लेकर पहुंच गईं। यहां पर बेरहमी से मारपीट कर पानी से भरी बाल्टी में उसका सिर डुबा दिया। दोनों के सिर पर खून सवार था। बेबस किशोरी छटपटाती रही लेकिन शरीर के शांत होने पर दोनों ने उसे छोड़ा। हत्या करने के बाद दोनों किशोरियां नीचे परिसर में चल रही काउंसिलिंग में शामिल हो गईं।
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घटना के बाद जांच को पहुंची पुलिस ने करीब 30 से अधिक बालिकाओं और किशोरियों के बयान दर्ज किए। वहीं आरोपियों किशोरियों से अलग से पूछताछ की गई। पहले तो वह पुलिस को गुमराह कर रही थीं लेकिन पुलिस ने जैसे ही सीसी कैमरे की रिकॉर्डिंग होने की बात कही तो वह रोने लगीं और उन्होंने पुलिस को पूरे घटनाक्रम से अवगत कर दिया। 

उन्होंने कहा कि यदि शिवानी उनके बहकावे में नहीं आती तो वे किसी और को बहकाकर बाथरूम में ले जातीं और हत्या कर देतीं। इस घटना के समय लड़कियों की काउंसलिंग चल रही थी इसलिए किसी को वारदात का तत्काल पता नहीं चला।

 

‘दीदी-दीदी’ कहकर बुलाती थी शिवानी
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि शिवानी और आरोपी किशोरियों के बीच किसी तरह की पुरानी दुश्मनी या विवाद नहीं था। मृत किशोरी आरोपियों को दीदी-दीदी कहकर बुलाती थी और उनके साथ सामान्य व्यवहार करती थी।

आरोपी किशोरियां बालिका गृह से बाहर निकलने की योजना बना रही थीं। वे वहां से भागने का रास्ता तलाशती थीं लेकिन सफल नहीं हो पा रही थीं। इसी दौरान कथित तौर पर उनके मन में बालिका गृह को ही बंद कराने का विचार आया और उन्होंने हत्या की योजना बनाकर घटना को अंजाम दिया।

पढ़ने में थी होनहार थी किशोरी
बालिका गृह में रहने वाली अन्य किशोरियों के अनुसार, शिवानी पढ़ाई में अच्छी थी। वह सामान्य व्यवहार करती थी और उसके बारे में किसी बड़ी शरारत या विवाद की बात सामने नहीं आई। वह आरोपी किशोरियों को सम्मान के साथ ‘दीदी’ कहकर बुलाती थी।

यही वजह है कि घटना के बाद बालिका गृह में रहने वाली अन्य किशोरियां भी स्तब्ध हैं। जिस किशोरी के साथ आरोपियों का कोई प्रत्यक्ष विवाद नहीं था, उसे ही कथित तौर पर वारदात का शिकार बनाए जाने से घटना की वजह को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

कैमरे तोड़े, पूछताछ में पुलिस को गुमराह किया
अधीक्षिका ने दर्ज कराई प्राथमिकी में बताया कि कमरा नंबर 5 की किशोरियों से पूछताछ करने पर वे लगातार गुमराह करती रहीं हैं, जिससे किसी सोची-समझी साजिश के तहत घटना को अंजाम दिए जाने की आशंका है। इसके अलावा घटना वाले दिन 21 अगस्त की शाम पांच बजे आरोपी किशोरी को कमरा नंबर 5 में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ते हुए भी देखा गया।

 

नौ माह में तीसरी वारदात
प्रदेश के तीसरे बड़े राजकीय बाल गृह बालिका में पिछले 9 माह में तीसरी बार सुर्खियों में आ गया है। 10 से 18 वर्ष तक की 200 बालिकाएं, किशोरियां एकसाथ रहने की क्षमता वाले इस बालगृह से 27 जनवरी 2026 को सुरक्षा में सेंध लगाते हुए रात में पांच किशोरियां छत के रास्ते भाग गईं। 

 

14 से 17 साल की इन लड़कियों के भाग जाने पर प्रशासनिक अमले और पुलिस विभाग में खलबली मच गई थी। सीसीटीवी फुटेज में लड़कियां खुद को कंबल से ढककर कंबल की रस्सी बनाकर छत के रास्ते से उतरकर अपने दोस्त के यहां और घर चली गईं थीं।

हालांकि पुलिस ने दूसरे दिन सभी पांच लड़कियों को पकड़ लिया गया। इस मामले में बालगृह की अधीक्षिका ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के लिए कोई जिम्मेदार सामने नहीं आया और न ही किसी तरह की कार्रवाई प्रशासन एवं पुलिस द्वारा की गई। इस घटना के बाद 4 जून 2026 में राजकीय बालगृह (बालिका) में तलाशी के दौरान 11 मोबाइल फोन और 4 चार्जर बरामद हुए। 

 

इस जांच के बाद आक्रोशित बालिकाओं ने बालगृह में हंगामा करते हुए तोड़फोड़ की। इस मामले में भी बाल गृह की अधीक्षिका ने कोतवाली में अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई। इस मामले में भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। अब तीसरी घटना किशोरी की हत्या के रूप में सामने आई है।

बालगृह बालिका में भले ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और होमगार्ड एवं सिपाहियों को तैनात किया गया, लेकिन निवासरत बालिकाओं की मॉनीटरिंग एवं समय-समय पर चेकिंग, सुरक्षा एवं निगरानी के इंतजाम नहीं है। वर्तमान में यहां 141 बालिकाएं व किशोरी रह रही हैं। इनमें से 112 बालिकाएं निराश्रित हैं, जबकि शेष पॉक्सो के मामलों में यहां निवासरत हैं।
 

हत्या के पीछे बाहर निकलने की जिद या कोई और राज
किशोरी की हत्या के मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे घटना के पीछे की कई वजह सामने आ रही हैं। वारदात को अंजाम देने वाली दोनों किशोरियों का मकसद कथित तौर पर यहां से बाहर निकलना था। इसी इरादे को पूरा करने के लिए उन्होंने हत्या जैसी संगीन वारदात को अंजाम दे डाला। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दोनों किशोरियों को बाल गृह से जाने की ऐसी जल्दी क्या थी।
 

जांच में सामने आए घटनाक्रम ने पुलिस के साथ-साथ लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। महज बाहर निकलने के लिए हत्या जैसे अपराध का रास्ता चुनना सामान्य बात नहीं है। ऐसे में पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या दोनों किशोरियों पर किसी तरह का दबाव था या फिर उनके मन में यहां से निकलने की कोई ऐसी वजह थी, जिसे उन्होंने अब तक किसी के सामने जाहिर नहीं किया। बाहर निकलने की कथित चाहत ने दोनों किशोरियों को ऐसे कदम तक पहुंचा दिया, जिसकी शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।

 

कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
किशोरी की हत्या के बाद अब जांच का केंद्र केवल वारदात तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों किशोरियों के बीच किस तरह की बातचीत हुई, हत्या से पहले और बाद में उनकी गतिविधियां क्या रहीं और बाहर निकलने की उनकी योजना क्या थी।
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