स्वप्न में आए नारदजी: बोले-मैं दलदल में फंसा हूं, मुझे निकालो; ढूंढा तो मिली मूर्ति, जयकारों से गूंज उठा परिसर
एक भक्त के स्वप्न में नारदजी आए। उन्होंने कहा कि मैं दलदल में फंसा हूं, मुझे बाहर निकालो। लोगों ने वहां ढूंढा तो एक मूर्ति मिली। इसके बाद पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा।
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उत्तर प्रदेश के मथुरा में परिक्रमा मार्ग स्थित नारद कुंड में रविवार को नारदजी की मूर्ति मिली। यह बात जल्दी ही क्षेत्र में फैल गई और लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने प्रतिमा का दुग्धाभिषेक कर एक जगह स्थापित कर दिया और पूजा-अर्चना शुरू कर दी। नारदजी की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही।
लोगों ने शुरू की पूजा-अर्चना
मामला सुरीर कोतवाली क्षेत्र के डडीसरा ग्राम पंचायत का है। यहां नारद कुंड नाम से एक जलाशय स्थित है। रविवार को कुंड की तरफ गए लोगों को यहां नारदजी की प्रतिमा मिली। यह खबर तेजी से क्षेत्र में फैल गई। प्रतिमा देखने के लिए लोगों में कौतूहल व्याप्त हो गया। वह मौके पर पहुंचने लगे। कुछ ही देर में लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने प्रतिमा को एक जगह स्थापित करके पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
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पातालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन करते हैं पूजा
यहां मान्यता है कि ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग स्थित नारद कुंड के आसपास नारदजी भ्रमण किया करते थे। इसकी महत्ता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने कुंड का सौंदर्यीकरण करवाकर इसे भव्य रूप दिया है। गांव निवासी हुकम सिंह ने बताया कि वह प्रतिदिन नारद कुंड के समीप स्थित पातालेश्वर मंदिर में पूजा के लिए आते हैं।
स्वप्न में बोले थे जलकुंभी में फंसा हुआ हूं
कुछ दिन पहले नारदजी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए। उन्होंने कहा कि मैं नारद कुंड में उपजी जलकुंभी के बीच दलदल में फंसा हुआ हूं। मुझे बाहर निकालो। इसके बाद मैं भूल गया। शनिवार की रात को फिर वही स्वप्न आया। ऐसे में मैंने रविवार की सुबह करीब नौ बजे यह जानकारी ग्रामीणों को दी।
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लोग करने लगे जय जयकार
इस ग्रामीणों ने उस जगह पर तलाशी करने की योजना बनाई। इसके बाद स्वप्न के आधार नारद कुंड में जलकुंभी के आसपास लोग कूद पड़े और तलाश करनी शुरू कर दी। कुछ देर बाद जलकुंभी के बीच फंसी एक मूर्ति ग्रामीणों के हाथ लगी। उन लोगों ने उसे बाहर निकाला। मूर्ति नारद जी की ही थी। इसके बाद लोग नारद जी की जय जयकार करने लगे। थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने मूर्ति मिलने की जानकारी से इनकार किया है।