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नंदगांव में 11 और गिडोह में 12 को होगा हुरंगा
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नंदगांव(मथुरा)। नंदगांव-बरसाना की लठामार होली देखने से वंचित रह गए लोगों के लिए अभी और समय है। लोग ऐतिहासिक बलदेव, गोकुल, महावन, जाब-बठैन, नंदगांव, गिडोह में हुरंगों के आयोजन में भाग ले सकते हैं।
नंदगांव एवं गिडोह में हुरंगा का आयोजन चैत्र मास में द्वितीया व तृतीया को किया जाता है। ब्रज मंडल के छोटे-बडे़ गांवों में दाऊ जी के हुरंगे का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि एक बार बलदेव जी के मन में श्रीराधा जी से होली खेलने की लालसा हुई। परंतु राधा जी के ज्येष्ठ होने के कारण वे उनसे होली खेलने के लिए संकुचा रहे थे। पेड़ों की डालियों की ओट से दाऊ जी राधा जी से होली खेलते हैं। अब राधा जी के सामने बड़ी विडंबना थी कि कैसे बलदाऊ से होली खेली जाए। राधा जी ने भी दाऊजी से होली खेलने की युक्ति सोची और हाथ में एक शीशा लेकर उसमें बने बलदाऊ जी के प्रतिबिंब को ही गुलाल लगा दिया। इस प्रकार राधा जी पूरी तरह मर्यादित होकर ज्येष्ठ से होली खेलती हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी हुरियारिनों जब होली खेलती हैं तो उनके हाथों में शीशे होते हैं। नंदगांव में 11 मार्च को तथा गिडोह में 12 मार्च को ऐतिहासिक हुरंगा होगा। एक बार फिर गिडोह के हुरियारों पर नंदगांव की हुरियारिनें तड़ातड़ लाठियां बरसाएंगी।
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नंदगांव एवं गिडोह में हुरंगा का आयोजन चैत्र मास में द्वितीया व तृतीया को किया जाता है। ब्रज मंडल के छोटे-बडे़ गांवों में दाऊ जी के हुरंगे का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि एक बार बलदेव जी के मन में श्रीराधा जी से होली खेलने की लालसा हुई। परंतु राधा जी के ज्येष्ठ होने के कारण वे उनसे होली खेलने के लिए संकुचा रहे थे। पेड़ों की डालियों की ओट से दाऊ जी राधा जी से होली खेलते हैं। अब राधा जी के सामने बड़ी विडंबना थी कि कैसे बलदाऊ से होली खेली जाए। राधा जी ने भी दाऊजी से होली खेलने की युक्ति सोची और हाथ में एक शीशा लेकर उसमें बने बलदाऊ जी के प्रतिबिंब को ही गुलाल लगा दिया। इस प्रकार राधा जी पूरी तरह मर्यादित होकर ज्येष्ठ से होली खेलती हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी हुरियारिनों जब होली खेलती हैं तो उनके हाथों में शीशे होते हैं। नंदगांव में 11 मार्च को तथा गिडोह में 12 मार्च को ऐतिहासिक हुरंगा होगा। एक बार फिर गिडोह के हुरियारों पर नंदगांव की हुरियारिनें तड़ातड़ लाठियां बरसाएंगी।
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