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गूगल चाइल्ड गुरु प्रवेश के लिए पहुंचे ज्ञानदीप, शिक्षकों ने परखा ज्ञान
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मथुरा। महज पांच वर्ष की आयु में इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड, एशिया बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराने वाले ‘गूगल चाइल्ड गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध वृंदावन निवासी गुरु उपाध्याय बृहस्पतिवार को अपने पिता अरविंद उपाध्याय और मां प्रिया गोस्वामी के साथ विद्यालय में प्रवेश पाने के लिए ज्ञानदीप पहुंचे। गुरु उपाध्याय को यूपीएससी और आईआईटी की पढ़ाई कराने के साथ फिजिक्स, गणित आदि विषयों का ज्ञान भी है।
पिता अरविंद उपाध्याय ने बताया कि उनके समक्ष समस्या थी कि गुरु के ज्ञान को देखते हुए उनका किस कक्षा में प्रवेश हो। प्रवेश के लिए ज्ञानदीप पहुंचने पर गुरु से विज्ञान विषय के तीन शिक्षकों ने कुछ प्रश्न किए, जिनके संतोषजनक उत्तर मिले। अंतत: गुरु को कक्षा 2 में प्रवेश करने का फैसला किया गया। यहां ज्ञानदीप संस्थापक सचिव पदम्श्री मोहन स्वरूप भाटिया ने गुरु का स्वागत किया। प्राचार्या रजनी नौटियाल तथा शैक्षिक निदेशक प्रीति भाटिया ने गुरु का कक्षा अध्यापिका तथा सहपाठी छात्र-छात्राओं से परिचय कराया।
गुरु को पदम्श्री मोहनस्वरूप भाटिया ने उसके पसंद के बूंदी के लड्डू खिलाये। प्राचार्या रजनी नौटियाल ने बताया कि कुछ दिन उसकी योग्यता तथा अभिरुचियों का निकटता से अध्ययन किया जाएगा और उसकी आयु तथा योग्यता के अनुरुप अंतिम रूप से कक्षा निर्धारित कर नियमित प्रवेश दिया जायगा। इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड, एशिया बुक ऑफ रिकार्ड, ‘ग्लोबल रिकार्ड एंड रिसर्च फाउंडेशन’ में नाम दर्ज हो चुका है। इंडिया डायमंड रिवार्ड, राष्ट्र बाल गौरव आदि से सम्मानित किया जा चुका है।
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पिता अरविंद उपाध्याय ने बताया कि उनके समक्ष समस्या थी कि गुरु के ज्ञान को देखते हुए उनका किस कक्षा में प्रवेश हो। प्रवेश के लिए ज्ञानदीप पहुंचने पर गुरु से विज्ञान विषय के तीन शिक्षकों ने कुछ प्रश्न किए, जिनके संतोषजनक उत्तर मिले। अंतत: गुरु को कक्षा 2 में प्रवेश करने का फैसला किया गया। यहां ज्ञानदीप संस्थापक सचिव पदम्श्री मोहन स्वरूप भाटिया ने गुरु का स्वागत किया। प्राचार्या रजनी नौटियाल तथा शैक्षिक निदेशक प्रीति भाटिया ने गुरु का कक्षा अध्यापिका तथा सहपाठी छात्र-छात्राओं से परिचय कराया।
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गुरु को पदम्श्री मोहनस्वरूप भाटिया ने उसके पसंद के बूंदी के लड्डू खिलाये। प्राचार्या रजनी नौटियाल ने बताया कि कुछ दिन उसकी योग्यता तथा अभिरुचियों का निकटता से अध्ययन किया जाएगा और उसकी आयु तथा योग्यता के अनुरुप अंतिम रूप से कक्षा निर्धारित कर नियमित प्रवेश दिया जायगा। इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड, एशिया बुक ऑफ रिकार्ड, ‘ग्लोबल रिकार्ड एंड रिसर्च फाउंडेशन’ में नाम दर्ज हो चुका है। इंडिया डायमंड रिवार्ड, राष्ट्र बाल गौरव आदि से सम्मानित किया जा चुका है।
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