फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   government has hide the 250 crore fraud case

ढाई सौ करोड़ के घोटाले पर शासन ने डाला था ‘पर्दा’

Fri, 14 Apr 2017 12:49 AM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Fri, 14 Apr 2017 12:49 AM IST
विज्ञापन
government has hide the 250 crore fraud case
प्यासा सावन, प्रेमरोग, क्रांति और रोटी कपड़ा और मकान जैसी फिल्मों के लिए नगमे लिखने वाले संतोष आनंद के बेटे संकल्प आनंद ने जो सुइसाइड नोट छोड़ा था उसमें 250 करोड़ के घोटाले और विभिन्न पदों पर हुईं भर्तियों में लेनदेन की बात कही गई थी। कई दूसरे ऐसे साक्ष्य भी पुलिस को मिले थे जिन्हें देखकर तत्कालीन एसएसपी ने डीजीपी को पत्र लिखकर कहा था कि मामला जटिल है लिहाजा किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करा ली जाए। इस तरह के कई पत्र गए लेकिन शासन स्तर से जांच के लिए किसी एजेंसी को आज तक नामित नहीं किया गया।
विज्ञापन


मशहूर गीतकार संतोष आनंद के इकलौते बेटे संकल्प आनंद ने अपनी पत्नी नंदिनी आनंद के साथ 15 अक्तूबर, 2014 को कोसीकलां में ट्रेन से कटकर जान दे दी थी। संकल्प आनंद केंद्रीय गृह विभाग के इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फोरेंसिक में लेक्चरर थे। पुलिस को संकल्प के पास से एक सुइसाइड नोट मिला था। इस पत्र में कहा गया था कि इंस्टीट्यूट को मिली 250 करोड़ की ग्रांट में घपला कर लिया गया है। साथ ही विभिन्न पदों पर जो भर्तियां की गईं हैं उनमें भी पैसा लिया गया है। घोटाले के कई साक्ष्य भी सुइसाइड नोट में इंगित किए गए थे। 
विज्ञापन


संकल्प ने एक डीजीपी और एक आईजी पर भी आरोप लगाए थे। सुइसाइड नोट में 38 लोगों के नाम थे। सुइसाइड नोट में संकल्प आनंद ने लिखा था कि वह इन लोगों के कारण ही परिवार के साथ जान दे रहा है। इस मामले में संतोष आनंद ने डीजी और आईजी समेत 38 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने 19 अक्तूबर को तत्कालीन डीजीपी एएल बनर्जी को पत्र लिखकर कहा था कि मामला जटिल है। गंभीर आरोप लगे हैं। बड़े घोटाले का जिक्र है लिहाजा किसी बड़ी एजेंसी से जांच करा ली जाए। लेकिन इस पत्र का कोई जवाब शासन स्तर से नहीं आया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिस अधिकारियों ने 30 अक्तूबर तक कई पत्र भेजे लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। जांच के संबंध में कई दफा निर्देश मांगे गए लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। बार-बार एक ही आदेश आता रहा कि वह लोग तथ्य जुटाएं, जांच के बारे में बाद में बताया जाएगा। यही वजह है कि रिपोर्ट होने के बाद भी पुलिस कुछ नहीं कर पाई। जो भी 38 लोग हैं वह सभी बड़े कारोबारी और सियासी ताल्लुकात वाले लोग हैं।      
 
लापरवाही पर विवेचकों पर होगी कार्रवाई
एसपी क्त्रसइम राजेश सोनकर ने बताया कि संकल्प आनंद आत्महत्या प्रकरण में विवेचकों ने लापरवाही बरती है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। 38 नामजदों के बयान कराकर जल्द से जल्द मामले के निस्तारण के आदेश विवेचक को दे दिए गए हैं।

अभी तक बदले जा चुके हैं छह विवेचक
मामले की फिलहाल एसआई विनोद पवार विवेचना कर रहे हैं। अभी तक छह विवेचना अधिकारी बदले जा चुके हैं।

सभी 38 नामों के आगे लिखे थे मोबाइल नंबर
संकल्प आनंद ने सुइसाइड नोट में 38 लोगों के नाम के आगे उनके मोबाइल नंबरों का भी उल्लेख किया था। लेकिन पुलिस फिर भी तर्क दे रही है कि उन्हें अधिकांश लोगों का पता ही नहीं मिला है। इन मोबाइल नंबरों के जरिए सभी को आसानी के साथ ढूंढा जा सकता था। लेकिन हकीकत ये है कि पुलिस ने कभी प्रयास ही नहीं किए। पुलिस अफसरों के दबाव में रही। अगर दबाव नहीं होता तो अधिकारी किसी दूसरे जिले की पुलिस से विवेचना को न कहते।


एक महीने में 222 लोग मिले थे संकल्प से
संकल्प आनंद केंद्रीय गृह विभाग के इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फोरेंसिक साइंस में लेक्चरर थे। संकल्प के सुइसाइड के बाद जब पुलिस इंस्टीट्यूट में पहुंची तो विजिटर रजिस्टर में 222 लोगों के नाम थे जो एक महीने में संकल्प से मिले थे। इनमें दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव, लखनऊ, मेरठ, कानपुर, जयपुर और बरेली तक के थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed