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Mathura News: पिता 9 साल से कोमा में...बदले हालात मगर बेटी के जुनून ने पाई मंजिल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Apr 2026 01:54 AM IST
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Father in Coma Yet Daughter Achieved Its Goal
मथुरा। छोटे से कस्बे जैंत की बेटी अनुराधा सिंह ने यूपीपीसीएस में सफलता पाई है। पहले प्रयास में ही सफलता की उनकी कहानी के पीछे कठिन परिस्थितियों में भी पिता के सपने को पूरा करने की जिद थी। नौ साल पहले अनुराधा के पिता एक हादसे में कोमा में पहुंच गए और आज तक बिस्तर पर हैं। इन्हीं हालात में पढ़ाई पूरी की, शादी हुई मगर सपने को दम नहीं तोड़ने दिया। वह असिस्टेंट कमिश्नर बन गईं, लेकिन अभी और आगे जाना चाहती हैं।
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जैंत के प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने वाली अनुराधा बताती हैं कि पिता ने उन्हें आईएएस या पीसीए बनाने का सपना देखा था, लेकिन उनके असमय ही बिस्तर पर पहुंचने के बाद परिवार उनके इलाज और देखभाल में लग गया। इस मुश्किल समय में भी अनुराधा ने हिम्मत नहीं हारी। जब भी समय मिलता वह पढ़ाई करने बैठ जातीं।
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वह बताती हैं कि इस मुश्किल समय में उनके दादा पूर्व प्रधान दिवंगत जगन्नाथ प्रसाद सिंह ने हौसला बढ़ाया तो चाचा नरेश प्रताप ने भी शिक्षा में कोई रुकावट नहीं आने दी। उन्हें दिल्ली में तैयारी के लिए भेजा गया। उन्होंने इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक के बाद जामिया मिलिया विवि से परास्नातक किया।
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अनुराधा बताती हैं कि पापा बिस्तर पर जरूर हैं मगर उनका सपना था कि मैं कुछ बनकर दिखाऊं। इन्हीं हालात के बीच अमेठी में शादी हो गई, लेकिन कभी अपनी पढ़ाई को नहीं छोड़ा। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े पति आकाश का पूरा सहयोग मिला। वह रोजाना 6 से 7 घंटे पढ़तीं। परिस्थितियां कई बार चुनौती बनीं। मायके से ससुराल में आकर नई जिम्मेदारियां आ गईं, लेकिन एक जिद थी कि यूपीपीसीएस क्लियर करना है।

यह जिद कब जुनून में बदल गई, उन्हें नहीं पता। वह तो बस अपनी मंजिल को पाने के लिए लगातार अपने विषयों पर फोकस करती रहीं। पांच माह का बच्चा गोद में होने के बाद भी वह हमेशा प्रयासरत रहतीं कि कुछ समय मिल जाए, ताकि पढ़ सकूं। शायद यही जिद काम आई और यूपीपीसीएस में पहले प्रयास में ही असिस्टेंट कमिश्नर बनीं।
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