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सड़क पर उतरे किसान, डीएम आफिस घेरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 18 Dec 2014 08:49 AM IST
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46 दिन से गांव दामोदरपुरा में धरना दे रहे किसान बुधवार को सड़क पर उतर आए। मुआवजा और रिहाई के लिए प्रदर्शन करते हुए डीएम आफिस को घेर लिया। यहां शासन और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। करीब दो घंटे के बाद डीएम के आश्वासन पर किसान घर लौटे।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुधवार को किसानों ने गांव दामोदरपुरा से कलक्ट्रेट तक शांति मार्च निकाला। इसमें किसान परिवार के पुरुष, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए। शांति मार्च में सड़क पर चल रही कतार में तख्तियां लेकर आठ साल की गुड़िया भी अपने हक के लिए नारे लगा रही थी तो इसी कतार में शामिल 75 साल की राजकुमारी भी किसानों की आवाज बुलंद कर रही थीं।
कतार का एक छोर कलक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार पर था तो अंतिम व्यक्ति पीडब्लूडी गेस्ट हाउस के सामने से गुजर रहा था। पहले प्रशासनिक अफसरों की तैयारी थी कि किसानों को मुख्य द्वार पर ही रोक लिया जाए, लेकिन संख्या ज्यादा देख उन्हें डीएम आफिस तक आने दिया गया। यहां पहुंचकर किसानों ने डीएम ऑफिस को घेरकर धरना शुरू कर दिया।
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24 के बाद कलक्ट्रेट घेरेंगे जिले के किसान
अब किसान आंदोलन की कमान रालोद नेताओं ने संभाल ली है। बुधवार को भी शांति मार्च और डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन का नेतृत्व रालोद विधायक पूरन प्रकाश और जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिकरवार ने किया।
यहां किसानों को संबोधित करते हुए विधायक पूरन प्रकाश ने कहा कि शासन और प्रशासन किसानों की समस्या सुलझाने के बजाय और उलझा रहे हैं। मुआवजा को लेकर शासन स्तर पर होने वाली बैठक बार-बार टाली जा रही है। अब 24 दिसंबर तक शासन और प्रशासन किसानों को मुआवजा दे और जेल में बंद किसानाें की रिहाई करे। इसके बाद रालोद जयंत चौधरी के नेतृत्व में जनपद भर के किसानों के साथ कलक्ट्रेट पर ही डेरा डालेगा। आवश्यकता हुई तो कार्यालयों में तालेबंदी कर दी जाएगी। रालोद जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिकरवार ने मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन को पढ़ा और उसे डीएम को सौंपा गया।
डीएम राजेश कुमार ने किसानों को आश्वासन दिया कि 24 दिसंबर को होने वाली बैठक के अच्छे नतीजे आएंगे। इसके बाद रालोद और किसान नेताओं की डीएम के साथ बैठक हुई। इस दौरान रालोद नेता चौधरी नरेंद्र सिंह, दीपक चौधरी, डा. यूनुश कुरैशी, निरंजन सिंह धनगर, रामरसपाल पौनिया, रविंद्र नरवार, नारायण सिंह विप्लवी, यदुवीर सिंह सिसौदिया, मौहम्मद तौफीक आढ़ती, हरवीर चौधरी आदि शामिल हुए।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में ये मांग
-जेल में बंद किसानों को रिहा किया जाए
-82 किसानों के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट वापस हो
-500 से अधिक अज्ञात के नाम दर्ज रिपोर्ट वापस हो
-भूमि अधिग्रहण बिल के अनुसार चार गुना मुआवजा
रालोद ने छीना भाजपा से मुद्दा
16 साल पुरानी समस्या के लिए किसानों के आंदोलन में शामिल हुई भाजपा अब इस आंदोलन से अलग होती जा रही है। खासकर प्रदेश और जिला संगठन ने आंदोलन को भुला दिया है। सिर्फ दामोदरपुरा और युवा मोर्चा से जुडे़ पदाधिकारी ही इस आंदोलन में पार्टी की सहभागिता बनाए हुए हैं। भाजपा के किसान आंदोलन से किनारा करने के पीछे कुंवर सिंह निषाद की बढ़ती लोकप्रियता रही। जनपद और प्रदेश स्तर पर भाजपा नेताओं को यह लोकप्रियता रास नहीं आई। यही कारण है कि किसान आज रालोद नेताओं के नेतृत्व में सड़क पर आ गए और डीएम आफिस का घेराव किया।
कुंवरसिंह के लिए हुई नारेबाजी
भले ही रालोद नेताओं ने किसानों को पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में ही समझा दिया था कि नारे क्या-क्या लगाने हैं। किसानों के लिए काम करने वाली पार्टी रालोद है। इसके बावजूद सड़क पर उतरे किसानों ने जेल में बंद कुंवर सिंह निषाद के लिए जमकर नारेबाजी की।
दामोदरपुरा क्यों नहीं आए डीएम साहब?
कलक्ट्रेट परिसर में जब डीएम राजेश कुमार किसानों को अब तक की कार्रवाई से अवगत करा रहे थे कि दो माह के कार्यकाल के दौरान उन्होंने किसानों के लिए क्या-क्या करा दिया है। तो किसानों ने पूछा कि 46 दिन में यह बताने के लिए कभी दामोदरपुर क्यों नहीं आए? इस पर डीएम ने कहा कि दामोदरपुरा भी आएंगे।
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पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुधवार को किसानों ने गांव दामोदरपुरा से कलक्ट्रेट तक शांति मार्च निकाला। इसमें किसान परिवार के पुरुष, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए। शांति मार्च में सड़क पर चल रही कतार में तख्तियां लेकर आठ साल की गुड़िया भी अपने हक के लिए नारे लगा रही थी तो इसी कतार में शामिल 75 साल की राजकुमारी भी किसानों की आवाज बुलंद कर रही थीं।
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कतार का एक छोर कलक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार पर था तो अंतिम व्यक्ति पीडब्लूडी गेस्ट हाउस के सामने से गुजर रहा था। पहले प्रशासनिक अफसरों की तैयारी थी कि किसानों को मुख्य द्वार पर ही रोक लिया जाए, लेकिन संख्या ज्यादा देख उन्हें डीएम आफिस तक आने दिया गया। यहां पहुंचकर किसानों ने डीएम ऑफिस को घेरकर धरना शुरू कर दिया।
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24 के बाद कलक्ट्रेट घेरेंगे जिले के किसान
अब किसान आंदोलन की कमान रालोद नेताओं ने संभाल ली है। बुधवार को भी शांति मार्च और डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन का नेतृत्व रालोद विधायक पूरन प्रकाश और जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिकरवार ने किया।
यहां किसानों को संबोधित करते हुए विधायक पूरन प्रकाश ने कहा कि शासन और प्रशासन किसानों की समस्या सुलझाने के बजाय और उलझा रहे हैं। मुआवजा को लेकर शासन स्तर पर होने वाली बैठक बार-बार टाली जा रही है। अब 24 दिसंबर तक शासन और प्रशासन किसानों को मुआवजा दे और जेल में बंद किसानाें की रिहाई करे। इसके बाद रालोद जयंत चौधरी के नेतृत्व में जनपद भर के किसानों के साथ कलक्ट्रेट पर ही डेरा डालेगा। आवश्यकता हुई तो कार्यालयों में तालेबंदी कर दी जाएगी। रालोद जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिकरवार ने मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन को पढ़ा और उसे डीएम को सौंपा गया।
डीएम राजेश कुमार ने किसानों को आश्वासन दिया कि 24 दिसंबर को होने वाली बैठक के अच्छे नतीजे आएंगे। इसके बाद रालोद और किसान नेताओं की डीएम के साथ बैठक हुई। इस दौरान रालोद नेता चौधरी नरेंद्र सिंह, दीपक चौधरी, डा. यूनुश कुरैशी, निरंजन सिंह धनगर, रामरसपाल पौनिया, रविंद्र नरवार, नारायण सिंह विप्लवी, यदुवीर सिंह सिसौदिया, मौहम्मद तौफीक आढ़ती, हरवीर चौधरी आदि शामिल हुए।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में ये मांग
-जेल में बंद किसानों को रिहा किया जाए
-82 किसानों के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट वापस हो
-500 से अधिक अज्ञात के नाम दर्ज रिपोर्ट वापस हो
-भूमि अधिग्रहण बिल के अनुसार चार गुना मुआवजा
रालोद ने छीना भाजपा से मुद्दा
16 साल पुरानी समस्या के लिए किसानों के आंदोलन में शामिल हुई भाजपा अब इस आंदोलन से अलग होती जा रही है। खासकर प्रदेश और जिला संगठन ने आंदोलन को भुला दिया है। सिर्फ दामोदरपुरा और युवा मोर्चा से जुडे़ पदाधिकारी ही इस आंदोलन में पार्टी की सहभागिता बनाए हुए हैं। भाजपा के किसान आंदोलन से किनारा करने के पीछे कुंवर सिंह निषाद की बढ़ती लोकप्रियता रही। जनपद और प्रदेश स्तर पर भाजपा नेताओं को यह लोकप्रियता रास नहीं आई। यही कारण है कि किसान आज रालोद नेताओं के नेतृत्व में सड़क पर आ गए और डीएम आफिस का घेराव किया।
कुंवरसिंह के लिए हुई नारेबाजी
भले ही रालोद नेताओं ने किसानों को पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में ही समझा दिया था कि नारे क्या-क्या लगाने हैं। किसानों के लिए काम करने वाली पार्टी रालोद है। इसके बावजूद सड़क पर उतरे किसानों ने जेल में बंद कुंवर सिंह निषाद के लिए जमकर नारेबाजी की।
दामोदरपुरा क्यों नहीं आए डीएम साहब?
कलक्ट्रेट परिसर में जब डीएम राजेश कुमार किसानों को अब तक की कार्रवाई से अवगत करा रहे थे कि दो माह के कार्यकाल के दौरान उन्होंने किसानों के लिए क्या-क्या करा दिया है। तो किसानों ने पूछा कि 46 दिन में यह बताने के लिए कभी दामोदरपुर क्यों नहीं आए? इस पर डीएम ने कहा कि दामोदरपुरा भी आएंगे।