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अन्नदाता बनेंगे सियासत के भाग्यविधाता
पुनीत शर्मा
Updated Sat, 07 Jan 2017 12:08 AM IST
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किसान
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश में सात चरणों में कराए जा रहे चुनावों में किसान भाग्यविधाता की भूमिका में होंगे। पहले चरण की तो पूरी सियासत ही किसानों के इर्द-गिर्द घूम रही है। अब जाहिर सी बात है कि किसानों के मुद्दे सियासी मंचों पर जोरशोर के साथ उठाए जाएंगे। ब्रज में आलू की बेकदरी, बिजली का संकट और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना पेमेंट माहौल को गरमाएगा।
पहले चरण का चुनाव गन्ना बेल्ट और आलू बेल्ट के नाम से पहचान रखने वाले जनपदों में हो रहा है। इस क्षेत्र में किसानों की संख्या तीन करोड़ के करीब है। मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, शामली, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर में गन्ने की खेती सर्वाधिक होती है। यहां के काश्तकारों की मुख्य समस्या भी चीनी मिलों पर फंसा पैसा ही है। लिहाजा सभी पार्टियां पेमेंट को लेकर सरकार को घेरेंगी। गन्ना किसानों की संख्या भी 40 लाख है। पिछले साल का 560 करोड़ रुपया मिलों पर फंसा पड़ा है जबकि इस साल का भी 1,792 करोड़ का बकाया है।
ब्रज क्षेत्र में पहले चरण का चुनाव आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़, फीरोजाबाद, एटा और कासगंज में है। ये इलाका खेती के मानचित्र पर आलू की बेल्ट के नाम से जाना जाता है। डेढ़ लाख से ज्यादा आलू किसान हैं। अकेले मथुरा में ही 17,000 किसान आलू की खेती करते हैं। लेकिन आलू का सही दाम न मिल पाने के कारण किसान परेशान हैं। लागत भी नहीं निकल पा रही है। ग्रामीण इलाकों में बिजली न मिल पाना भी एक बड़ी समस्या है। नहरों में पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता है। अब चुनावों में ब्रज क्षेत्र में ये सभी समस्याएं भी शिद्दत के साथ उठाई जाएंगी।
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ब्रज के किसान इन समस्याओं से जूझ रहे हैं
- आलू के लिए पर्याप्त मार्केट नहीं
- आलू से तैयार होने वाले उत्पादों की इकाइयां नहीं
- छाता चीनी मिल बंद होने से गन्ने की खेती ठप
- सिंचाई का बड़ा संकट है
- नहरों में पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता
- बिजली की आपूर्ति बहुत कम हो पाती है
- बंजर भूमि का रकबा लगातार बढ़ रहा है
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की बड़ी समस्याएं
- चीनी मिलों पर फंसा किसानों का पैसा
- फसलों की सिंचाई के लिए बड़ा संकट
- लड़खड़ाई बिजली आपूर्ति
- फसलों का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा
- लगातार महंगी होती जा रही है खेती
- फसलों का भाव नहीं मिलता है
बलदेव, गोवर्धन, मांट में आधे से ज्यादा वोटर किसान
बलदेव, गोवर्धन और मांट विधानसभा क्षेत्र में आलू उत्पादक किसानों की संख्या सर्वाधिक है। इन इलाकों में स्थिति ये है कि अगर किसी किसान के पास पचास बीघा जमीन है तो वह उसमें तीस बीघा में आलू की बुआई करता है। बलदेव विधानसभा में वोटरों की संख्या 3,4500 है जिनमें से करीब ढाई लाख किसान हैं। गोवर्धन सीट पर तीन लाख मतदाता हैं और किसानों की संख्या दो लाख है। जबकि मांट में 3,13000 मतदाता हैं और इनमें किसानों की संख्या ढाई लाख है। प्रमुख खेती आलू ही है।
आलू और गन्ने का किसान बर्बाद हो रहा: टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि ब्रज क्षेत्र में आलू की खेती बंपर होती है। लेकिन मार्केट न होने के कारण आलू किसान मारा-मारा फिरता है। क्षेत्र में आलू से तैयार होने वाले उत्पादों के अगर उद्योग लग जाएं जो आलू के अच्छे भाव मिल सकते हैं। छाता की फैक्ट्री शुरू होने से गन्ने का क्षेत्र बन जाएगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों का पैसा चीनी मिलों पर फंस जाता है।
कोल्ड स्टोर में ही आलू छोड़ दिया किसानों ने: रामबाबू कटैलिया
सर्वदलीय किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रामबाबू कटैलिया ने बताया कि ब्रज में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस बार आलू का रेट इतना कम रहा कि किसानों ने कोल्ड स्टोर से आलू निकाला ही नहीं है। कोल्ड स्टोर में ही आलू छोड़ दिया गया है। पानी का संकट भी बड़ा है। सिंचाई के लिए भी काश्तकार परेशान है।
गेहूं और धान की तरह सरकार आलू भी खरीदे: बुद्धा सिंह
भाकियू के जिलाध्यक्ष बुद्धा सिंह का कहना है कि जिस तरह से सरकार गेहूं और धान की खरीद करती है उसी तरह से आलू की खरीद भी की जानी चाहिए। ताकि किसानों को लाभ मिल सके। आलू के किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम मिल सके। अभी तक तो लागत भी नहीं निकल पा रही है।
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पहले चरण का चुनाव गन्ना बेल्ट और आलू बेल्ट के नाम से पहचान रखने वाले जनपदों में हो रहा है। इस क्षेत्र में किसानों की संख्या तीन करोड़ के करीब है। मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, शामली, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर में गन्ने की खेती सर्वाधिक होती है। यहां के काश्तकारों की मुख्य समस्या भी चीनी मिलों पर फंसा पैसा ही है। लिहाजा सभी पार्टियां पेमेंट को लेकर सरकार को घेरेंगी। गन्ना किसानों की संख्या भी 40 लाख है। पिछले साल का 560 करोड़ रुपया मिलों पर फंसा पड़ा है जबकि इस साल का भी 1,792 करोड़ का बकाया है।
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ब्रज क्षेत्र में पहले चरण का चुनाव आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़, फीरोजाबाद, एटा और कासगंज में है। ये इलाका खेती के मानचित्र पर आलू की बेल्ट के नाम से जाना जाता है। डेढ़ लाख से ज्यादा आलू किसान हैं। अकेले मथुरा में ही 17,000 किसान आलू की खेती करते हैं। लेकिन आलू का सही दाम न मिल पाने के कारण किसान परेशान हैं। लागत भी नहीं निकल पा रही है। ग्रामीण इलाकों में बिजली न मिल पाना भी एक बड़ी समस्या है। नहरों में पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता है। अब चुनावों में ब्रज क्षेत्र में ये सभी समस्याएं भी शिद्दत के साथ उठाई जाएंगी।
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ब्रज के किसान इन समस्याओं से जूझ रहे हैं
- आलू के लिए पर्याप्त मार्केट नहीं
- आलू से तैयार होने वाले उत्पादों की इकाइयां नहीं
- छाता चीनी मिल बंद होने से गन्ने की खेती ठप
- सिंचाई का बड़ा संकट है
- नहरों में पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता
- बिजली की आपूर्ति बहुत कम हो पाती है
- बंजर भूमि का रकबा लगातार बढ़ रहा है
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की बड़ी समस्याएं
- चीनी मिलों पर फंसा किसानों का पैसा
- फसलों की सिंचाई के लिए बड़ा संकट
- लड़खड़ाई बिजली आपूर्ति
- फसलों का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा
- लगातार महंगी होती जा रही है खेती
- फसलों का भाव नहीं मिलता है
बलदेव, गोवर्धन, मांट में आधे से ज्यादा वोटर किसान
बलदेव, गोवर्धन और मांट विधानसभा क्षेत्र में आलू उत्पादक किसानों की संख्या सर्वाधिक है। इन इलाकों में स्थिति ये है कि अगर किसी किसान के पास पचास बीघा जमीन है तो वह उसमें तीस बीघा में आलू की बुआई करता है। बलदेव विधानसभा में वोटरों की संख्या 3,4500 है जिनमें से करीब ढाई लाख किसान हैं। गोवर्धन सीट पर तीन लाख मतदाता हैं और किसानों की संख्या दो लाख है। जबकि मांट में 3,13000 मतदाता हैं और इनमें किसानों की संख्या ढाई लाख है। प्रमुख खेती आलू ही है।
आलू और गन्ने का किसान बर्बाद हो रहा: टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि ब्रज क्षेत्र में आलू की खेती बंपर होती है। लेकिन मार्केट न होने के कारण आलू किसान मारा-मारा फिरता है। क्षेत्र में आलू से तैयार होने वाले उत्पादों के अगर उद्योग लग जाएं जो आलू के अच्छे भाव मिल सकते हैं। छाता की फैक्ट्री शुरू होने से गन्ने का क्षेत्र बन जाएगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों का पैसा चीनी मिलों पर फंस जाता है।
कोल्ड स्टोर में ही आलू छोड़ दिया किसानों ने: रामबाबू कटैलिया
सर्वदलीय किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रामबाबू कटैलिया ने बताया कि ब्रज में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस बार आलू का रेट इतना कम रहा कि किसानों ने कोल्ड स्टोर से आलू निकाला ही नहीं है। कोल्ड स्टोर में ही आलू छोड़ दिया गया है। पानी का संकट भी बड़ा है। सिंचाई के लिए भी काश्तकार परेशान है।
गेहूं और धान की तरह सरकार आलू भी खरीदे: बुद्धा सिंह
भाकियू के जिलाध्यक्ष बुद्धा सिंह का कहना है कि जिस तरह से सरकार गेहूं और धान की खरीद करती है उसी तरह से आलू की खरीद भी की जानी चाहिए। ताकि किसानों को लाभ मिल सके। आलू के किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम मिल सके। अभी तक तो लागत भी नहीं निकल पा रही है।