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सूख रहे खेत, गेहूं बुवाई पर ब्रेक...मुरझाए गांव के गांव
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 15 Nov 2016 11:40 PM IST
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किसान
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खेत सूखने लगे हैं। गेहूं बुवाई की तैयारियों पर ब्रेक लग गया है। आलू की सिंचाई नहीं हो पा रही। खाद-बीज का इंतजाम काश्तकार नहीं कर पा रहे हैं। अब तो यह नोटबंदी खेती पर भी भारी पड़ने लगी है। अगर जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी तो प्रदेश में गेहूं का रकबा घटना तय माना जा रहा है।
एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से किसान सबसे ज्यादा दुखी हैं। इससे रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। ब्रज क्षेत्र के साथ ही समूचे उत्तर प्रदेश में गेहूं की खेती सबसे ज्यादा होती है। नवंबर के पहले सप्ताह से गेहूं की बुवाई का सीजन शुरू हो जाता है।
इस समय किसान खेत तैयार करके गेहूं बुवाई की तैयारी में लगे थे लेकिन नोटबंदी ने सारी तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया है। आगरा, मथुरा, हाथरस, एटा, मैनपुरी, कासगंज, फीरोजाबाद के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में गेहूं की बुवाईनवंबर के पहले हफ्ते से शुरू हो जाती है लेकिन इस बार खेतों की जुताई तक नहीं हुई।
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नौहझील के महेंद्र सिंह बताते हैं कि खेत तैयार हैं लेकिन खाद और बीज की दिक्कत है। दुकानदार खुले पैसे मांग रहे हैं। अब गांव में तो कोई बैक और एटीएम हैं नहीं जो हाथों हाथ पैसे निकालकर दे दिए जाएं। शहर में जाते हैं तो वहां लाइन ही इतनी लंबी है कि हिम्मत ही नहीं होती। जहांगीरपुर के सत्यप्रकाश का कहना है कि इंजन में डीजल फूंककर खेत का पलेवा करना है।
लेकिन कोई भी पंप वाला पांच सौ का नोट नहीं ले रहा है। पलेवा कर ही नहीं पा रहे हैं। नगला सिरिया निवासी चतर सिंह और पवन सिंह ने बताया कि पुराने नोट दुकानदार ले ही नहीं रहे। खाद नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में गेहूं कैसे बोया जाएगा।
प्रदेश में रबी फसलों का रकबा
गेहूं- 99,00000 हेक्टेयर
जौ- 1,67000 हेक्टेयर
रबी मक्का- 17,000 हेक्टेयर
तोरिया- 4,42,200 हेक्टेयर
राई सरसों- 7,40,000 हेक्टेयर
अलसी- 35,000 हेक्टेयर
चना- 5,84,000 हेक्टेयर
अरहर- 4,30,000 हेक्टेयर
मसूर- 6,15,000 हेक्टेयर
मटर- 4,50,000 हेक्टेयर
गेहूं की बुवाई पिछड़ रही है
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राकेश बाबू ने बताया कि नोटबंदी से हर कोई प्रभावित है लिहाजा किसान भी परेशान है। ब्रज क्षेत्र में तीस नवंबर तक गेहूं की बुवाई कर ली जाती है मगर इस बार विलंब हो रहा है। किसान तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। बुवाई तो होगी लेकिन रकबा घट जाएगा। नौहझील, मांट, बल्देव, गोवर्धन, कोसी, राया, रिफाइनरी, गोकुल, नंदगांव और टैंटीगांव में दस से बीस फीसदी की कमी आ सकती है।
घर के जेवरात तक गिरवी रख रहे किसान
किसानों ने तो खाद और बीज की व्यवस्था करने के लिए घर के जेवरात तक गिरवी रख दिए हैं। किसी ने साहूकार से उधार पैसा लिया है तो किसी ने अपने रिश्तेदार से पैसे मांगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक किसान ने बताया कि ऐसा संकट गेहूं की बुवाई के वक्त पहली दफा देखने को मिला है।
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एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से किसान सबसे ज्यादा दुखी हैं। इससे रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। ब्रज क्षेत्र के साथ ही समूचे उत्तर प्रदेश में गेहूं की खेती सबसे ज्यादा होती है। नवंबर के पहले सप्ताह से गेहूं की बुवाई का सीजन शुरू हो जाता है।
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इस समय किसान खेत तैयार करके गेहूं बुवाई की तैयारी में लगे थे लेकिन नोटबंदी ने सारी तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया है। आगरा, मथुरा, हाथरस, एटा, मैनपुरी, कासगंज, फीरोजाबाद के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में गेहूं की बुवाईनवंबर के पहले हफ्ते से शुरू हो जाती है लेकिन इस बार खेतों की जुताई तक नहीं हुई।
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नौहझील के महेंद्र सिंह बताते हैं कि खेत तैयार हैं लेकिन खाद और बीज की दिक्कत है। दुकानदार खुले पैसे मांग रहे हैं। अब गांव में तो कोई बैक और एटीएम हैं नहीं जो हाथों हाथ पैसे निकालकर दे दिए जाएं। शहर में जाते हैं तो वहां लाइन ही इतनी लंबी है कि हिम्मत ही नहीं होती। जहांगीरपुर के सत्यप्रकाश का कहना है कि इंजन में डीजल फूंककर खेत का पलेवा करना है।
लेकिन कोई भी पंप वाला पांच सौ का नोट नहीं ले रहा है। पलेवा कर ही नहीं पा रहे हैं। नगला सिरिया निवासी चतर सिंह और पवन सिंह ने बताया कि पुराने नोट दुकानदार ले ही नहीं रहे। खाद नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में गेहूं कैसे बोया जाएगा।
प्रदेश में रबी फसलों का रकबा
गेहूं- 99,00000 हेक्टेयर
जौ- 1,67000 हेक्टेयर
रबी मक्का- 17,000 हेक्टेयर
तोरिया- 4,42,200 हेक्टेयर
राई सरसों- 7,40,000 हेक्टेयर
अलसी- 35,000 हेक्टेयर
चना- 5,84,000 हेक्टेयर
अरहर- 4,30,000 हेक्टेयर
मसूर- 6,15,000 हेक्टेयर
मटर- 4,50,000 हेक्टेयर
गेहूं की बुवाई पिछड़ रही है
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राकेश बाबू ने बताया कि नोटबंदी से हर कोई प्रभावित है लिहाजा किसान भी परेशान है। ब्रज क्षेत्र में तीस नवंबर तक गेहूं की बुवाई कर ली जाती है मगर इस बार विलंब हो रहा है। किसान तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। बुवाई तो होगी लेकिन रकबा घट जाएगा। नौहझील, मांट, बल्देव, गोवर्धन, कोसी, राया, रिफाइनरी, गोकुल, नंदगांव और टैंटीगांव में दस से बीस फीसदी की कमी आ सकती है।
घर के जेवरात तक गिरवी रख रहे किसान
किसानों ने तो खाद और बीज की व्यवस्था करने के लिए घर के जेवरात तक गिरवी रख दिए हैं। किसी ने साहूकार से उधार पैसा लिया है तो किसी ने अपने रिश्तेदार से पैसे मांगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक किसान ने बताया कि ऐसा संकट गेहूं की बुवाई के वक्त पहली दफा देखने को मिला है।