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20 मिनट देर से खुले द्वारिकाधीश के पट
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 13 May 2015 11:46 PM IST
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विश्व प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर के पट बुधवार को 20 मिनट देरी से खुले। ऐसे में मंगला आरती दर्शन के साथ ही दिन की शुरुआत करने वाले श्रद्धालु व्याकुल हो उठे। वे पट खुलने तक मंदिर के पटों की ओर ही निहारते रहे। मंदिर प्रबंधन इसकी वजह बिजली न आने से सेवायत के स्नान में देरी होना बता रहा है।
शहर के प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर में मंगला आरती के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ये शहर की संस्कृति में शुमार है कि लोग सुबह मंगला दर्शन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करते हैं। बुधवार को श्रद्धालु मंगला के निर्धारित समय सुबह साढ़े छह बजे मंदिर पहुंच गए। समय होने के बाद भी दर्शन न खुलने से भक्त व्याकुल हो उठे। इधर श्रद्धालुओं की संख्या देख प्रबंधन के भी हाथपांव फूूल गए। 20 मिनट श्रद्धालु ठाकुरजी के पट की ओर ही निहारते रहे। नियमित श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रबंधन के प्रति नाराजगी भी जताई। 6:50 बजे दर्शन खुले तब भक्तों को ठाकुरजी के दर्शन हुए।
श्रीद्वारिकाधीश मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि रात भर बिजली न आने और टंकी में पानी न होने के कारण सेवायत मुखिया स्नान नहीं कर सके। सुबह जब इस बात का पता चला तो तत्काल जेनरेटर वाले कर्मचारी को बुलाया गया। इसके बाद मुखिया ने स्नान कर ठाकुरजी सेवा लेकर मंदिर के पट खोले। इसी में थोड़ा बिलंब हो गया।
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शहर के प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर में मंगला आरती के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ये शहर की संस्कृति में शुमार है कि लोग सुबह मंगला दर्शन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करते हैं। बुधवार को श्रद्धालु मंगला के निर्धारित समय सुबह साढ़े छह बजे मंदिर पहुंच गए। समय होने के बाद भी दर्शन न खुलने से भक्त व्याकुल हो उठे। इधर श्रद्धालुओं की संख्या देख प्रबंधन के भी हाथपांव फूूल गए। 20 मिनट श्रद्धालु ठाकुरजी के पट की ओर ही निहारते रहे। नियमित श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रबंधन के प्रति नाराजगी भी जताई। 6:50 बजे दर्शन खुले तब भक्तों को ठाकुरजी के दर्शन हुए।
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श्रीद्वारिकाधीश मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि रात भर बिजली न आने और टंकी में पानी न होने के कारण सेवायत मुखिया स्नान नहीं कर सके। सुबह जब इस बात का पता चला तो तत्काल जेनरेटर वाले कर्मचारी को बुलाया गया। इसके बाद मुखिया ने स्नान कर ठाकुरजी सेवा लेकर मंदिर के पट खोले। इसी में थोड़ा बिलंब हो गया।
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