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Mathura: किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, फसल पकने को आई तो मौसम ने दिया दगा, 40 फीसदी से अधिक का नुकसान

Mon, 20 Mar 2023 10:31 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 20 Mar 2023 10:31 PM IST
सार

मथुरा में बारिश होने से फसलें बर्बाद हो गईं। किसानों ने डीएम से मुआवजे की मांग की है। बताया कि बारिश और ओले गिरने से 40 फीसदी से अधिक फसल बर्बाद हो गईं।  

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Due to incessant rains ripe crop has been ruined farmers have suffered huge losses in Mathura
खेत में पड़ी कटी फसल और भरा बारिश का पानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मथुरा में धूप और सर्दी में दिनरात कड़ी मेहनत के बाद फसल पकने को आई तो मौसम ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जनपद के कई इलाकों में बीते 48 घंटों से कहीं मध्यम तो कहीं तेज बारिश से खेतों में पानी भर गया। इससे गेहूं और सरसों की फसल को अनुमान के मुताबिक 40 फीसदी से अधिक का नुकसान हुआ है। 

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बारिश का दौर रविवार रात से सोमवार शाम तक चला। छाता, बलदेव, चौमुंहा, शेरगढ़, टैंटीगांव, बाजना, राधाकुंड क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई। इन्हीं इलाकों में सर्वाधिक नुकसान की आशंका है। बलदेव में चने के आकार के ओले गिरे। उधर, राजस्व विभाग ने फसल में खराबे का सर्वे शुरू कर दिया है। हालांकि किसानों का कहना है कि अभी उनके पास प्रशासन का कोई नुमाइंदा नहीं पहुंचा है।

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सरसों की फसल बर्बाद

बेमौसम हुई बारिश ने किसानों को रुला दिया। गेहूं की पकने को तैयार फसल ओले और बारिश के चलते बर्बादी के कगार पर पहुंच गई। ओले और बारिश से खेतों में कटने को तैयार खड़ी सरसों की फसल बर्बाद हो गई। निचले इलाके के खेतों में पानी भर गया है। किसानों के ऊपर आई इस आसमानी मुसीबत के आकलन करने के लिए कृषि एवं राजस्व की संयुक्त टीमों ने सर्वे कर आकलन करना प्रारंभ कर दिया है। 

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अभी ऐसा ही मौसम रहने का पूर्वानुमान

शनिवार और रविवार की बारिश के बाद किसानों को उम्मीद थी कि धूप निकली और मौसम साफ रहा तो ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन रविवार रात और सोमवार दिन से शाम तक बरसे पानी ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। मौसम विभाग ने अगले दो दिन और ऐसा ही मौसम रहने का पूर्वानुमान जताया है।

दो लाख हेक्टेयर में गेहूं

जनपद में दो लाख हेक्टेयर में गेहूं और करीब 55 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुआई की गई है। सरसों की फसल आधी से अधिक कट चुकी है और कई इलाकों में गेहूं की फसल की कटाई भी होने लगी है। ओलों-संग बारिश और तेज हवा से गेहूं की फसल आड़ी गिर गई और खेतों में पानी भर गया है। तेज बारिश से सरसों की फलियां चटक गई हैं। जल्द तेज धूप न निकली तो गेहूं के दाने गल जाएंगे और सरसों के दाने भी नमी पाकर फूल जाएंगे।

फसल खराबे का सर्वे शुरू

ओले और बारिश से फसलों में नुकसान का आकलन करने के लिए कृषि तथा राजस्व की टीमों ने सोमवार से सर्वे करना शुरू कर दिया। छाता क्षेत्र में सबसे पहले सर्वे किया जा रहा है। जिला कृषि अधिकारी ए.के सिंह ने बताया कि नुकसान का आकलन करने के लिए टीमों ने सर्वे शुरू कर दिया है।

गेहूं और सरसों दोनों में नुकसान

मृदा विज्ञान विशेषज्ञ ने डॉ. रविन्द्र कुमार राजपूत ने बताया कि बारिश से गेहूं की बाली में वजन बढ़ जाएगा। पौधा गिर जाएगा। इससे दाना छोटा होगा। उत्पादन प्रभावित होगा। पानी से सरसों की फलियां चटक कर गिर गईं है। बेमौसम बारिश और ओलों से दोनों फसलों में नुकसान है।

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