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UP: श्रीबांकेबिहारी मंदिर में सेवायतों को मिलेगी अलग पहचान...लागू हो सकता है ड्रेस कोड, 29 सितंबर को बैठक

Thu, 18 Sep 2025 08:59 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अरुन पाराशर Updated Thu, 18 Sep 2025 08:59 PM IST
सार

हाईपावर्ड कमेटी वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर की अव्यवस्थाओं को दूर करने में जुटी हुई है। निरीक्षण से लेकर सेवायतों से बातचीत के दौर के बाद मंदिर व्यवस्था में कई नए नियम अख्तियार किए गए हैं।

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Dress code could be implemented for sevayat in banke bihari temple in vrindavan
बांकेबिहारी मंदिर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

श्रीबांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन हाईपावर्ड कमेटी के गठन के बाद मंदिर में कुछ परिवर्तन किए जा रहे हैं। दर्शन व्यवस्था से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक बदलाव किए जाने हैं। श्रद्धालुओं के हित में कई अन्य बदलाव भी किए जाएंगे। लोगों को सुगमता से दर्शन हों इस बात पर कमेटी का पूरा जोर है। आगामी दिनों में मंदिर में सेवायतों के लिए ड्रेस कोड भी लागू हो सकता है। उसके बाद श्रद्धालुओं की बारी आ सकती है। आगामी बैठक में इस पर मंथन किया जाएगा।
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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधन के लिए हाईपावर्ड कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी मंदिर की अव्यवस्थाओं को दूर करने में जुटी हुई है। निरीक्षण से लेकर सेवायतों से बातचीत के दौर के बाद मंदिर व्यवस्था में कई नए नियम अख्तियार किए। कमेटी के अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज अशोक कुमार की अध्यक्षता में कमेटी के सभी सदस्यों के साथ चार बैठकें हुईं। तीसरी और चौथी बैठक में नए नियम तय किए गए।
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दर्शन से लेकर खजाने तक पर बात होने के बाद आदेश दिए गए। अब पांचवीं बैठक 29 सितंबर को होगी। इस बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा होगी। पिछली बैठक में कमेटी के सदस्य सेवायत दिनेश गोस्वामी ने मांग की थी कि मंदिर में ड्रेस कोड लागू किया जाए। इसकी शुरुआत पहले सेवायतों से हो और फिर आम श्रद्धालुओं से। 

 

चूंकि कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा था कि मंदिर के सेवायतों की वेशभूषा में कई लोग श्रद्धालुओं से खुलेआम वसूली करते हैं, जिन पर रोक लगेगी। इस ड्रेस कोड के लागू होने से उस पर भी लगाम लग सकती है।

सेवायत दिनेश गोस्वामी ने बताया कि आगामी दिनों पर इस पर मंथन किया जाएगा। अन्य कई मंदिरों में ड्रेस कोड लागू हैं तो बिहारीजी में क्यों नहीं हो सकता। लाखों श्रद्धालु रोज आ रहे हैं। वृंदावन के लोग परंपराओं को संरक्षित रखने की बात कहते हैं तो सभी परंपराओं को ध्यान में रखना पड़ेगा।

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