{"_id":"57aa19b54f1c1be15bee4734","slug":"dispute-over-marriage-function-in-bankebihari-temple","type":"story","status":"publish","title_hn":"बांकेबिहारी मंदिर में शादी के आयोजन पर विवाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बांकेबिहारी मंदिर में शादी के आयोजन पर विवाद
अमर उजाला वृंदावन
Updated Thu, 11 Aug 2016 12:01 AM IST
विज्ञापन
बांकेबिहारी मंदिर में शादी
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रांगण में सोमवार को शादी समारोह के आयोजन से विवाद खड़ा हो गया है। कुछ सेवायत इसे मंदिर की प्राचीन परंपरा के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं, वहीं कुछ ने बोलने से ही इनकार कर दिया। मंदिर प्रबंध का कहना है कि उन्होंने मामले से मथुरा मुंसिफ और बांके बिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी को अवगत करा दिया है। अब आगे फैसला प्रबंधन को लेना है।
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायतों के अनुसार सोमवार को बांकेबिहारी मंदिर के पट बंद होने के बाद दोपहर में एक सेवायत गोस्वामी ने अपने यजमान के पुत्र का विवाह मंदिर प्रांगण में रखवाया। इसके लिए मंदिर को रंगबिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजाया गया। मंदिर के जगमोहन के सामने चौक में मंडप सजा। यहां वर-वधू के परिवारीजन बैठे और मंदिर के कुछ गोस्वामी भी समारोह में शामिल हुए। विवाह की रस्म अदायगी कीं गईं और गर्भगृह के सामने ही वर-वधू ने एक दूसरे को माला पहनाई और सात फेरे लिए।
विवाह संपन्न होने के बाद शाम को मंदिर में यह आयोजन चर्चा का विषय बन गया। मंगलवार शाम को सेवायतों के एक पक्ष ने इसे मंदिर की परंपरा के साथ खिलवाड़ बताते हुए विवाह संबंधी फोटो मीडिया को उपलब्ध करा दिए। इसके बाद इस विवाह पर भी विरोध के स्वर मुखर होने लगे।
विज्ञापन
बांके बिहारी मंदिर के शयन भोग सेवाधिकारी अतुल कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि विवाह का यह आयोजन मंदिर की प्राचीन परंपराओं के साथ खिलवाड़ है। मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस बारे में मथुरा मुंसिफ और प्रबंध कमेटी को अवगत करा दिया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कमेटी के अधिकार सीज हो चुके हैं। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते। लेकिन, यह आयोजन मंदिर की परंपराओं के विपरीत है। मंदिर दर्शन के लिए है, न कि विवाह समारोह कराने के लिए।
- नंदकिशोर उपमन्यु
अध्यक्ष, बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी
विज्ञापन
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायतों के अनुसार सोमवार को बांकेबिहारी मंदिर के पट बंद होने के बाद दोपहर में एक सेवायत गोस्वामी ने अपने यजमान के पुत्र का विवाह मंदिर प्रांगण में रखवाया। इसके लिए मंदिर को रंगबिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजाया गया। मंदिर के जगमोहन के सामने चौक में मंडप सजा। यहां वर-वधू के परिवारीजन बैठे और मंदिर के कुछ गोस्वामी भी समारोह में शामिल हुए। विवाह की रस्म अदायगी कीं गईं और गर्भगृह के सामने ही वर-वधू ने एक दूसरे को माला पहनाई और सात फेरे लिए।
विज्ञापन
विवाह संपन्न होने के बाद शाम को मंदिर में यह आयोजन चर्चा का विषय बन गया। मंगलवार शाम को सेवायतों के एक पक्ष ने इसे मंदिर की परंपरा के साथ खिलवाड़ बताते हुए विवाह संबंधी फोटो मीडिया को उपलब्ध करा दिए। इसके बाद इस विवाह पर भी विरोध के स्वर मुखर होने लगे।
विज्ञापन
बांके बिहारी मंदिर के शयन भोग सेवाधिकारी अतुल कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि विवाह का यह आयोजन मंदिर की प्राचीन परंपराओं के साथ खिलवाड़ है। मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस बारे में मथुरा मुंसिफ और प्रबंध कमेटी को अवगत करा दिया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कमेटी के अधिकार सीज हो चुके हैं। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते। लेकिन, यह आयोजन मंदिर की परंपराओं के विपरीत है। मंदिर दर्शन के लिए है, न कि विवाह समारोह कराने के लिए।
- नंदकिशोर उपमन्यु
अध्यक्ष, बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी