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Mathura News: बारिश और बाढ़ के कारण श्रद्धालु घटे, कारोबार प्रभावित
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वृन्दावन। पहाड़ों पर बरसात के बाद खतरे के निशान से ऊपर बह रही यमुना ने व्यापार को भी प्रभावित किया है। वृंदावन में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी का असर मंदिरों से जुड़े कारोबार पर भी देखने को मिल रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में 30-40 फीसदी की कमी आई है।
इसके चलते यमुना किनारे अस्थाई दुकान चलाने वालों के सामने संकट गहरा गया है। परफ्यूम, सेंट, चंदन, धूपबत्ती, अगरबत्ती विक्रेता जितेंद्र गौतम ने बताया कि पूरे देश में बाढ़ के हालात हैं. लोग घरों पर रुक रहे हैं। पिछले दस दिनों में दुकानदारी पर काफी फर्क पड़ा है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद स्थिति सामान्य होने में 15 दिन लग जाएंगे। ऐसे में उनका कामकाज काफी प्रभावित होगा। घाटों पर कोई जा नहीं रहा है।
बांके बिहारी के दर्शन करने वालों की भी संख्या कम हो गई है। अब पहले जैसे शनिवार-रविवार को मारमारी नहीं देखी जा रही। सड़कों पर जहां आए दिन जाम के हालात रहते थे, वे अब सूनी दिख रही है। मंदिरों को जाने वाले अधिकतर रास्तों पर 4-6 फीट तक पानी भरा है। बाहर से आने वाले श्रद्धालु पहले यहां रह रहे अपने परिचितों को फोन कर यहां के हाल जान रहे हैं। वहीं धर्मशाला व होटलों वालों के पास भी फोन आ रहे हैं कि वे यहां आए या नहीं।
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होटलों की बुकिंग रद्द हो रही
समाचारों के जरिए लोगों को पता चल रहा है कि मथुरा-वृंदावन बाढ़ के चपेट में है। ऐसे में जो लोग सावन की परिक्रमा के मद्देनजर होटलों व धर्मशालाओं में कमरे बुक करवा चुके थे, वे अब रद्द करवा रहे हैं। इससे होटल संचालक भी परेशान हैं।
घाटों को जाने वाले बाजार बंद
बाढ़ के कारण घाटों की ओर जाने वाले रास्तों पर पानी भरा है। परिक्रमा मार्ग भी पूरी तरह जलमग्न है। ऐसे में जहां परिक्रमार्थियों की संख्या घटी है, वहीं घाटों पर दर्शन के लिए भी लोग नहीं आ रहे हैं। इसके चलते आसपास की दुकानों का काम बंद हो गया है। पोशाक, कंठीमाला, पुस्तकें, पूजना सामग्री, प्रसाद आदि की बिक्री करने वाले निराशा हैं।
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इसके चलते यमुना किनारे अस्थाई दुकान चलाने वालों के सामने संकट गहरा गया है। परफ्यूम, सेंट, चंदन, धूपबत्ती, अगरबत्ती विक्रेता जितेंद्र गौतम ने बताया कि पूरे देश में बाढ़ के हालात हैं. लोग घरों पर रुक रहे हैं। पिछले दस दिनों में दुकानदारी पर काफी फर्क पड़ा है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद स्थिति सामान्य होने में 15 दिन लग जाएंगे। ऐसे में उनका कामकाज काफी प्रभावित होगा। घाटों पर कोई जा नहीं रहा है।
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बांके बिहारी के दर्शन करने वालों की भी संख्या कम हो गई है। अब पहले जैसे शनिवार-रविवार को मारमारी नहीं देखी जा रही। सड़कों पर जहां आए दिन जाम के हालात रहते थे, वे अब सूनी दिख रही है। मंदिरों को जाने वाले अधिकतर रास्तों पर 4-6 फीट तक पानी भरा है। बाहर से आने वाले श्रद्धालु पहले यहां रह रहे अपने परिचितों को फोन कर यहां के हाल जान रहे हैं। वहीं धर्मशाला व होटलों वालों के पास भी फोन आ रहे हैं कि वे यहां आए या नहीं।
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होटलों की बुकिंग रद्द हो रही
समाचारों के जरिए लोगों को पता चल रहा है कि मथुरा-वृंदावन बाढ़ के चपेट में है। ऐसे में जो लोग सावन की परिक्रमा के मद्देनजर होटलों व धर्मशालाओं में कमरे बुक करवा चुके थे, वे अब रद्द करवा रहे हैं। इससे होटल संचालक भी परेशान हैं।
घाटों को जाने वाले बाजार बंद
बाढ़ के कारण घाटों की ओर जाने वाले रास्तों पर पानी भरा है। परिक्रमा मार्ग भी पूरी तरह जलमग्न है। ऐसे में जहां परिक्रमार्थियों की संख्या घटी है, वहीं घाटों पर दर्शन के लिए भी लोग नहीं आ रहे हैं। इसके चलते आसपास की दुकानों का काम बंद हो गया है। पोशाक, कंठीमाला, पुस्तकें, पूजना सामग्री, प्रसाद आदि की बिक्री करने वाले निराशा हैं।