{"_id":"580511204f1c1bf132702e92","slug":"deepdan-in-bankebihari-temple","type":"story","status":"publish","title_hn":"1008 दीपकों से हो रहा दीपदान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
1008 दीपकों से हो रहा दीपदान
अमर उजाला वृंदावन
Updated Mon, 17 Oct 2016 11:27 PM IST
विज्ञापन
दीपदान
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्रज में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। विश्व विख्यात ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में कार्तिक मास में दीपदान की अनोखी परंपरा सवा सौ साल से चली आ रही है। दीपदान महोत्सव में प्रतिदिन शाम को श्रद्धालु भी शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
कार्तिक के पहले दिन से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के गेट नंबर दो के पास चबूतरे पर शाम को दीपदान किया जा रहा है। यहां पर मंदिर के शयन सेवाधिकारी गोविंद गोस्वामी, मुन्ना गोस्वामी, अशोक गोस्वामी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ दीपदान करा रहे हैं।
सेवायत अशोक गोस्वामी ने बताया कि उनके दादाजी फुंदीलाल गोस्वामी ने सवा सौ वर्ष पूर्व दीपदान सेवा का शुभारंभ किया था। दादाजी के बाद उनके पिता बिहारीलाल गोस्वामी ने परंपरा को बनाए रखा। अब उनका परिवार इस परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
विज्ञापन
यह दीपदान सिर्फ बांकेबिहारी मंदिर में कार्तिक मास के दौरान होता है। इसमें बाहर से आने वाले श्रद्धालु के साथ साथ स्थानीय लोग भी सहभागिता करते हैं। दीपदान महोत्सव में प्रतिदिन शाम को तेल के 1008 दीपक जलाए जाते हैं।
विज्ञापन
कार्तिक के पहले दिन से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के गेट नंबर दो के पास चबूतरे पर शाम को दीपदान किया जा रहा है। यहां पर मंदिर के शयन सेवाधिकारी गोविंद गोस्वामी, मुन्ना गोस्वामी, अशोक गोस्वामी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ दीपदान करा रहे हैं।
विज्ञापन
सेवायत अशोक गोस्वामी ने बताया कि उनके दादाजी फुंदीलाल गोस्वामी ने सवा सौ वर्ष पूर्व दीपदान सेवा का शुभारंभ किया था। दादाजी के बाद उनके पिता बिहारीलाल गोस्वामी ने परंपरा को बनाए रखा। अब उनका परिवार इस परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
विज्ञापन
यह दीपदान सिर्फ बांकेबिहारी मंदिर में कार्तिक मास के दौरान होता है। इसमें बाहर से आने वाले श्रद्धालु के साथ साथ स्थानीय लोग भी सहभागिता करते हैं। दीपदान महोत्सव में प्रतिदिन शाम को तेल के 1008 दीपक जलाए जाते हैं।