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Ahoi Ashtami 2025: राधाकुंड में उमड़ा आस्था का सैलाब...दंपतियों ने लगाई मन्नत की डुबकी, दीपों से जगमग हुआ घाट
Tue, 14 Oct 2025 12:01 AM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Tue, 14 Oct 2025 12:01 AM IST
सार
मथुरा के राधाकुंड में अहोई अष्टमी पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। दूरदराज से निसंतान दंपती राधाकुंड में डुबकी लगाने के लिए पहुंचे।
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राधाकुंड।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
मथुरा के राधाकुंड में अहोई अष्टमी की अर्धरात्रि जैसे ही घड़ी ने 12 बजाए राधाकुंड की लहरों में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। देश के कोने-कोने से आए निसंतान दंपतियों ने राधाश्याम कुंड में स्नान किया और राधा रानी से मातृत्व का वरदान मांगा। किसी ने दीप जलाकर प्रार्थना की तो किसी ने जल में डुबकी लगाई। राधे-राधे और जयश्री राधे के उद्घोषों से वातावरण गूंज उठा।
अहोई अष्टमी का यह स्नान हर वर्ष कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी की रात्रि में होता है। मान्यता है कि इस घड़ी राधा रानी स्वयं राधा श्यामकुंड में विराजती हैं और जो श्रद्धालु उस समय जल में स्नान करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
राधाकुंड की गलियां सोमवार की शाम से ही विवाहित जोड़ों से भरने लगीं। किसी के होठों पर प्रार्थना थी तो किसी की आंखों में प्रतीक्षा। रात गहराने के साथ-साथ दीपों की रोशनी घाटों पर झिलमिलाने लगी। जैसे ही मध्यरात्रि 12 बजने का समय आया, भीड़ एक साथ उठी। माइक से आवाज गूंजी बोल राधारानी की जय और हजारों दंपतियों ने एक साथ डुबकी लगाई। जल में उतरते ही लगा जैसे हर लहर कृपा बनकर उतर आई हो।
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अहोई अष्टमी का यह स्नान हर वर्ष कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी की रात्रि में होता है। मान्यता है कि इस घड़ी राधा रानी स्वयं राधा श्यामकुंड में विराजती हैं और जो श्रद्धालु उस समय जल में स्नान करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
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राधाकुंड की गलियां सोमवार की शाम से ही विवाहित जोड़ों से भरने लगीं। किसी के होठों पर प्रार्थना थी तो किसी की आंखों में प्रतीक्षा। रात गहराने के साथ-साथ दीपों की रोशनी घाटों पर झिलमिलाने लगी। जैसे ही मध्यरात्रि 12 बजने का समय आया, भीड़ एक साथ उठी। माइक से आवाज गूंजी बोल राधारानी की जय और हजारों दंपतियों ने एक साथ डुबकी लगाई। जल में उतरते ही लगा जैसे हर लहर कृपा बनकर उतर आई हो।
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दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश के कोेने-कोने से आए दंपतियों ने इस क्षण को अपने जीवन का सबसे पवित्र पल बताया। जिनकी चिकित्सा थक गई थी उनके लिए यह डुबकी विश्वास की आखिरी उम्मीद बन गई।
घाटों पर दीपदान का मनमोहक दृश्य
महिलाओं ने रंगोली बनाकर दीप सजाए। जल में झिलमिलाती लौ के बीच श्रद्धालु राधा नाम जपते रहे। इस्कॉन के भक्तों ने हरे कृष्णा... हरे राम के भजन गाए और राधाकुंड का आकाश भक्ति से भर गया। विदेशी श्रद्धालु भी इस आध्यात्मिक स्नान में शामिल हुए और राधारानी की महिमा का गुणगान करते नजर आए।
आस और विश्वास के साथ आए दंपती
पंजाब की रजनी यादव ने बताया कि शादी को पांच साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक संतान नहीं हुई। राधारानी से यही प्रार्थना है। कि मेरे आंगन में भी किलकारी गूंजे। नोएडा की प्रेमलता और दिल्ली की सोनिया ने भी संतान प्राप्ति की कामना से स्नान किया। भीड़ को देखते हुए स्थानीय युवाओं की टोली सेवा में जुटी रही। गोताखोरों ने स्नान करने वालों की सहायता की।
प्रशासन ने भी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने स्थल का निरीक्षण किया। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से मेला क्षेत्र की निगरानी की जाती रही। रातभर राधाकुंड भक्ति के स्वर से गूंजता रहा, जब भोर की पहली किरणें कुंड के जल पर पड़ीं तो ऐसा लगा मानो हर बूंद में राधा रानी की कृपा उतर आई हो। जिनके जीवन में उम्मीद सूख चुकी थी उनके चेहरों पर अब नई चमक थी।
घाटों पर दीपदान का मनमोहक दृश्य
महिलाओं ने रंगोली बनाकर दीप सजाए। जल में झिलमिलाती लौ के बीच श्रद्धालु राधा नाम जपते रहे। इस्कॉन के भक्तों ने हरे कृष्णा... हरे राम के भजन गाए और राधाकुंड का आकाश भक्ति से भर गया। विदेशी श्रद्धालु भी इस आध्यात्मिक स्नान में शामिल हुए और राधारानी की महिमा का गुणगान करते नजर आए।
आस और विश्वास के साथ आए दंपती
पंजाब की रजनी यादव ने बताया कि शादी को पांच साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक संतान नहीं हुई। राधारानी से यही प्रार्थना है। कि मेरे आंगन में भी किलकारी गूंजे। नोएडा की प्रेमलता और दिल्ली की सोनिया ने भी संतान प्राप्ति की कामना से स्नान किया। भीड़ को देखते हुए स्थानीय युवाओं की टोली सेवा में जुटी रही। गोताखोरों ने स्नान करने वालों की सहायता की।
प्रशासन ने भी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने स्थल का निरीक्षण किया। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से मेला क्षेत्र की निगरानी की जाती रही। रातभर राधाकुंड भक्ति के स्वर से गूंजता रहा, जब भोर की पहली किरणें कुंड के जल पर पड़ीं तो ऐसा लगा मानो हर बूंद में राधा रानी की कृपा उतर आई हो। जिनके जीवन में उम्मीद सूख चुकी थी उनके चेहरों पर अब नई चमक थी।