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जवाहर बाग में आखिर है क्या
अमर उजाला
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:23 AM IST
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जवाहर बाग पर पहरा
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जवाहर बाग को पुलिस ने पूरी तरह से अपने कब्जे में लिया हुआ है, पुलिस का पहरा इतना सख्त है, वहां प्रवेश तो दूर किसी को उसकी चहारदीवारी के ऊपर से झांकने तक नहीं दिया जा ररहा है। इसके साथ ही सवाल उठने रहे हैं कि आखिर अब जवाहर बाग में ऐसा क्या छिपा है, जिसकी इतनी चौकसी की जा रही है। इसके चलते मृतकों की संख्या को लेकर भी अफवाह उड़ रही है।
मथुरा-आगरा रोड पर कलक्ट्रेट के बगल में बना यह जवाहर बाग इन दिनों सुर्खियों में है। दो जून को अवैध कब्जाधारियों से बाग को मुक्त कराने की कार्रवाई में एसपी सिटी और थानाध्यक्ष फरह समेत 28 लोगों की मौत हुई थी। बाग को तो पूरी तरह से खाली करा लिया गया, लेकिन अब इस पर पुलिस का सख्त पहरा है।
लोग जवाहर बाग के भीतर का हाल देखना चाहते हैं, जानना चाहते हैं कि आखिर उस दिन जवाहर बाग में क्या हुआ था, लेकिन वहां पर किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है। मुख्य गेट पर भारी फोर्स तैनात है, हर तरफ से पुलिस इसकी घेराबंदी किए है।
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यह भी सवाल खड़े हो रहे है कि कुछ छिपाया तो नहीं जा रहा है। कभी शव मिलने तो कभी नर कंकाल मिलने की अफवाह उड़ती है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जब कब्जाधारियों पर फायरिंग का आदेश हुआ था, तब अंधाधुंध गोली चलाई गई थी। इसमें तमाम लोगों की मौत हुई है। पुलिस के पहरे से अफवाहों को भी बल मिल रहा है।
रात के अंधेरे में चलता फावड़ा
जवाहर बाग के आसपास के मोहल्लों में रहने वाले लोगों का कहना है कि दो दिन से रात को कुछ लोग बाग में आते हैं और फावड़े से खोदाई करते हैं। अब यह क्यों खोदाई करते हैं इसकी जानकारी नहीं हो पा रही है। लोगों का कहना है कि कभी तो पुलिस वाले भी नजर आ जाते हैं। एक बार पुलिस जीप में सादे कपड़ों में कुछ लड़के पहुंचे थे। उन्होंने भी खोदाई की थी।
एक साथ गरजे थे 150 से ज्यादा असलाह
जिस वक्त एसपी सिटी जवाहर बाग खाली कराने के लिए दीवार तुड़वाने पहुंचे थे उस वक्त तो करीब पचास पुलिस वाले उनके साथ थे। इनमें तीस रायफलधारी थे। जब बवाल बढ़ा तो और फोर्स पहुंची। एसपी सिटी और थानाध्यक्ष पर हुए हमले के बाद जब फायरिंग का आदेश हुआ तो करीब 150 असलाह एक साथ गरजे थे। पुलिस इस कदर नाराज थी कि ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं गईं।
रामवृक्ष के एक फोन पर एलाट हुआ था जवाहर बाग
14 मार्च, 2014 को गाजीपुर निवासी रामवृक्ष भारी भीड़ लेकर मथुरा आया था। उसने जवाहर बाग में दो दिन का पड़ाव डालने की अनुमति प्रशासन से मांगी थी। तत्कालीन डीएम और एसएसपी ने अनुमति देने से इंकार कर दिया था।
इस पर रामवृक्ष ने सीधे शासन में फोन किया और तत्काल जवाहर बाग उसके नाम से एलाट हो गया। कहा जा रहा है कि शासन से एक प्रमुख सचिव का फोन आने पर ऐसा हुआ। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी तभी से मान गए थे कि उसकी पहुंच सीधे शासन तक है।
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मथुरा-आगरा रोड पर कलक्ट्रेट के बगल में बना यह जवाहर बाग इन दिनों सुर्खियों में है। दो जून को अवैध कब्जाधारियों से बाग को मुक्त कराने की कार्रवाई में एसपी सिटी और थानाध्यक्ष फरह समेत 28 लोगों की मौत हुई थी। बाग को तो पूरी तरह से खाली करा लिया गया, लेकिन अब इस पर पुलिस का सख्त पहरा है।
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लोग जवाहर बाग के भीतर का हाल देखना चाहते हैं, जानना चाहते हैं कि आखिर उस दिन जवाहर बाग में क्या हुआ था, लेकिन वहां पर किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है। मुख्य गेट पर भारी फोर्स तैनात है, हर तरफ से पुलिस इसकी घेराबंदी किए है।
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यह भी सवाल खड़े हो रहे है कि कुछ छिपाया तो नहीं जा रहा है। कभी शव मिलने तो कभी नर कंकाल मिलने की अफवाह उड़ती है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जब कब्जाधारियों पर फायरिंग का आदेश हुआ था, तब अंधाधुंध गोली चलाई गई थी। इसमें तमाम लोगों की मौत हुई है। पुलिस के पहरे से अफवाहों को भी बल मिल रहा है।
रात के अंधेरे में चलता फावड़ा
जवाहर बाग के आसपास के मोहल्लों में रहने वाले लोगों का कहना है कि दो दिन से रात को कुछ लोग बाग में आते हैं और फावड़े से खोदाई करते हैं। अब यह क्यों खोदाई करते हैं इसकी जानकारी नहीं हो पा रही है। लोगों का कहना है कि कभी तो पुलिस वाले भी नजर आ जाते हैं। एक बार पुलिस जीप में सादे कपड़ों में कुछ लड़के पहुंचे थे। उन्होंने भी खोदाई की थी।
एक साथ गरजे थे 150 से ज्यादा असलाह
जिस वक्त एसपी सिटी जवाहर बाग खाली कराने के लिए दीवार तुड़वाने पहुंचे थे उस वक्त तो करीब पचास पुलिस वाले उनके साथ थे। इनमें तीस रायफलधारी थे। जब बवाल बढ़ा तो और फोर्स पहुंची। एसपी सिटी और थानाध्यक्ष पर हुए हमले के बाद जब फायरिंग का आदेश हुआ तो करीब 150 असलाह एक साथ गरजे थे। पुलिस इस कदर नाराज थी कि ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं गईं।
रामवृक्ष के एक फोन पर एलाट हुआ था जवाहर बाग
14 मार्च, 2014 को गाजीपुर निवासी रामवृक्ष भारी भीड़ लेकर मथुरा आया था। उसने जवाहर बाग में दो दिन का पड़ाव डालने की अनुमति प्रशासन से मांगी थी। तत्कालीन डीएम और एसएसपी ने अनुमति देने से इंकार कर दिया था।
इस पर रामवृक्ष ने सीधे शासन में फोन किया और तत्काल जवाहर बाग उसके नाम से एलाट हो गया। कहा जा रहा है कि शासन से एक प्रमुख सचिव का फोन आने पर ऐसा हुआ। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी तभी से मान गए थे कि उसकी पहुंच सीधे शासन तक है।