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दो भाइयों समेत एक परिवार के आठ लोगों को उम्रकैद
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Sat, 20 Aug 2016 12:35 AM IST
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अदालत का फैसला
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कोसीकलां के ऐंच गांव में हुए कत्ल के मामले में दो भाइयों समेत एक ही परिवार के आठ लोगों को उम्रकैद की सजा हुई है। एडीजे प्रथम की अदालत ने सभी मुजरिमों पर तीस-तीस हजार का जुर्माना भी तय किया है। हत्या के सभी मुलजिम जेल में बंद हैं।
हत्या के जिस मामले में एक ही परिवार के आठ लोगों को उम्रकैद हुई वह सनसनीखेज कत्ल 14 अक्तूबर, 2012 की दोपहर को हुआ था। कत्ल हुआ था रतिराम के बेटे प्रेमदत्त का। जिस वक्त प्रेमदत्त को मारा गया उस समय वह भैंसा बुग्गी लेकर खेत से चारा काटकर ला रहा था।
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक प्रेमदत्त जैसे ही पुष्कर और खेमचंद के मकान के पास पहुंचा तो इन लोगों ने अपने भाई और भतीजों के साथ उस पर हमला कर दिया। सूचना पर प्रेमदत्त का भाई रोहन पहुंचा तो उसे भी पीटा गया। इसी दौरान प्रेमदत्त की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद गांव में तनाव के हालात बन गए थे।
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मामले में रोहन के बेटे सुरेश ने मुकदमा दर्ज कराया। इसमें दो सगे भाइयों खेमचंद और पुष्कर के साथ परिवार के सुंदर, गिर्राज, गुनजार, गोविंद, जग्गो उर्फ जगदीश और लक्खो को नामजद किया गया था। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।
मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम अमरनाथ सिंह की कोर्ट चल रही थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुना, साक्ष्य देखे और तथ्यों पर गौर किया। शुक्रवार को एडीजे प्रथम अमरनाथ सिंह ने अपना फैसले में सभी नामजद अभियुक्तों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर तीस-तीस हजार का अर्थदंड लगाया। इसमें वादी की ओर से एडीजीसी श्याम सिंह राजपूत ने पैरवी की। ये सभी दोषी इस वक्त मथुरा जेल में बंद है, केवल सुंदर पुत्र खेमचंद को भरतपुर जेल से यहां लाया गया है।
सभी गवाहों ने कोर्ट में दिए अपने बयान
हत्या के इस मामले में जो भी गवाह थे वह अंत तक अपने बयान पर कायम रहे। पुलिस ने चार्जशीट में जिनके भी नाम शामिल किए थे सभी ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए। इन्हीं बयानों और साक्ष्य को आधार मानकर कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दुकान से हुई चोरी में हुई खूनी रंजिश
सुरेश गांव में प्रोविजनल स्टोर चलाता था। नामजद लोगों का सुरेश से किसी बात पर विवाद हो गया था। उस समय सुंदर, खेमचंद, लक्खो, जग्गो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। तभी से यह लोग सुरेश और उसके चाचा प्रेमदत्त से रंजिश मानने लगे थे।
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हत्या के जिस मामले में एक ही परिवार के आठ लोगों को उम्रकैद हुई वह सनसनीखेज कत्ल 14 अक्तूबर, 2012 की दोपहर को हुआ था। कत्ल हुआ था रतिराम के बेटे प्रेमदत्त का। जिस वक्त प्रेमदत्त को मारा गया उस समय वह भैंसा बुग्गी लेकर खेत से चारा काटकर ला रहा था।
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पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक प्रेमदत्त जैसे ही पुष्कर और खेमचंद के मकान के पास पहुंचा तो इन लोगों ने अपने भाई और भतीजों के साथ उस पर हमला कर दिया। सूचना पर प्रेमदत्त का भाई रोहन पहुंचा तो उसे भी पीटा गया। इसी दौरान प्रेमदत्त की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद गांव में तनाव के हालात बन गए थे।
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मामले में रोहन के बेटे सुरेश ने मुकदमा दर्ज कराया। इसमें दो सगे भाइयों खेमचंद और पुष्कर के साथ परिवार के सुंदर, गिर्राज, गुनजार, गोविंद, जग्गो उर्फ जगदीश और लक्खो को नामजद किया गया था। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।
मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम अमरनाथ सिंह की कोर्ट चल रही थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुना, साक्ष्य देखे और तथ्यों पर गौर किया। शुक्रवार को एडीजे प्रथम अमरनाथ सिंह ने अपना फैसले में सभी नामजद अभियुक्तों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर तीस-तीस हजार का अर्थदंड लगाया। इसमें वादी की ओर से एडीजीसी श्याम सिंह राजपूत ने पैरवी की। ये सभी दोषी इस वक्त मथुरा जेल में बंद है, केवल सुंदर पुत्र खेमचंद को भरतपुर जेल से यहां लाया गया है।
सभी गवाहों ने कोर्ट में दिए अपने बयान
हत्या के इस मामले में जो भी गवाह थे वह अंत तक अपने बयान पर कायम रहे। पुलिस ने चार्जशीट में जिनके भी नाम शामिल किए थे सभी ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए। इन्हीं बयानों और साक्ष्य को आधार मानकर कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दुकान से हुई चोरी में हुई खूनी रंजिश
सुरेश गांव में प्रोविजनल स्टोर चलाता था। नामजद लोगों का सुरेश से किसी बात पर विवाद हो गया था। उस समय सुंदर, खेमचंद, लक्खो, जग्गो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। तभी से यह लोग सुरेश और उसके चाचा प्रेमदत्त से रंजिश मानने लगे थे।