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संविधान को मानते न सरकार को

Fri, 03 Jun 2016 02:04 AM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Fri, 03 Jun 2016 02:04 AM IST
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back ground of people of jawahar bagh
जवाहर बाग - फोटो : अमर उजाला
जवाहर बाग कब्जाने वाले कथित सत्याग्रह की शुरूआत मध्यप्रदेश के सागर जिले से हुई थी। करीब तीन माह के सफर के बाद दिल्ली की ओर जाने वाली यह यात्रा मार्च 2014 में मथुरा आकर ठहर गई, जिसका अंत खूनी संघर्ष के रूप में गुरुवार को हो गया।
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स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह के बैनरतले इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाला गाजीपुर निवासी रामवृक्ष यादव था। यहां सत्याग्रह के नाम पर जो मांगे गिनाई थी, उसमें बाबा जयगुरुदेव का मृत्यु प्रमाण पत्र भी शामिल था। इसके अलावा इनका कहना था कि यह भारत की आजादी नहीं है।
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यह सब असंवैधानिक है। भारत तो नेताजी सुभाषचंद्र बोस की घोषणा के साथ ही आजाद हो गया था। वर्तमान सरकार असंवैधानिक है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, डीएम सब अवैध हैं। एक रुपये में 60 लीटर पेट्रोल मिलना चाहिए। ये मुद्रा आजाद हिंद सरकार की नहीं है। आजाद हिंद की सोने की मुद्रा का प्रचलन होना चाहिए। 
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- सागर से जनवरी 2014 में शुरू हुई थी सत्याग्रह यात्रा
- 14 मार्च 2014 को मथुरा स्थित जवाहर बाग में ठहरे
- ढाई साल में एक दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले हुए दर्ज
- उद्यानकर्मी पीटे, जवाहरबाग में ठेकेदार के साथ मारपीट
- छह बार पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर किया हमला
- 4 अप्रैल 2016 को तहसीलकर्मियों और अधिवक्ताओं पर हमला 


उजाड़ दिया जवाहर बाग
 कभी प्रशासनिक अफसर, कर्मचारी, आम लोगों के लिए मार्निंग वाक का बेहतरीन स्थान जवाहर बाग हुआ करता था। जिले में दूर दराज से कलक्ट्रेट आकर कार्यालयों के चक्कर लगाते थक-हारने वाले ग्रामीणों को यहां आसरा मिलता था। इतना ही नहीं उद्यान विभाग की यह बेहतरीन नर्सरी हुआ करती थी, जो ढाई साल में पूरी तरह से नष्ट की जा चुकी है।


एक दर्जन से ज्यादा रिपोर्ट दर्ज
मार्च माह में जवाहर बाग में काबिज होने के बाद इन कथित सत्याग्रहियों पर करीब एक दर्जन से ज्यादा मुकद्दमे दर्ज हुए हैं। इसमें जवाहर बाग के ठेकेदार के साथ मारपीट, उद्यानकर्मियों के साथ मारपीट, तहसील में लेखपालों के साथ मारपीट सहित प्रशासनिक और पुलिस पर हमले के मामले शामिल हैं।


जयगुरुदेव आश्रम पर भी की कब्जे की कोशिश
2010 में बाबा जयगुरुदेव के ब्रह्मलीन होने पर रामवृक्ष यादव के नेतृत्व में आए लोगों ने जयगुरुदेव आश्रम पर कब्जे की कोशिश की थी। यहां लोगों पर हमला बोला था।



सांसद हेमामालिनी ने जताया दुख
जवाहरबाग आपरेशन के दौरान इंस्पेक्टर संतोष कुमार के शहीद होने पर सांसद हेमामालिनी ने दुख जताया है। उन्होंने कार्रवाई के दौरान पुलिस के संयम की सराहना की है। 
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