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सुलगते कस्बे में सलामत सौहार्द की तस्वीर
दिनेश शर्मा
Updated Fri, 08 May 2015 12:21 AM IST
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सौंख में सांप्रदायिक मंसूबों ने फजा को जहर देने की कोशिश भले की हो लेकिन यहां की माटी से समरसता की महक नहीं मिटा पाए। बुधवार को अशांति और तनाव की बीच मोहल्ला खटीकन में एक हिंदू परिवार ने मुस्लिम परिवार को पनाह देकर अमन की फसल आबाद कर दी। मेजबान अपने घर में सलामत हैं लेकिन जिंदगी फिर भी डरी हुई है। हर आहट पर खौफ का मंजर याद कर रहे लोग बोलने से परहेज करते हैं। मगर दोनों हाथ जोड़कर पड़ोसियों का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे।
शनिवार को सौंख के मुस्लिम मंडी में तनाव के बाद से यहां के 50 से अधिक परिवार पलायन कर गए हैं। दो समुदायों के युवक-युवती के प्रेम प्रसंग से उपजी अशांति ने बुधवार को धार्मिक स्थलों में आग लगाकर माहौल को और खराब करने की कोशिश की। घटना के बाद से कस्बा संगीनों के साए में है। अमर उजाला की टीम गुरुवार को कर्फ्यू से महसूस हो रहे सन्नाटे में वहां पहुंची तो एक मकान में मेेमने की आवाज ने इंसानों की मौजूदगी का एहसास करा दिया। कुंडी खटखटाने पर घर के भीतर से कोई आवाज नहीं आई। इसी बीच बेटे ने पुकारा तो भीतर से डरी सहमी मां बोल पड़ी। मां-बेटे खाट पर बैठे हुए अपना हाथ जोड़े रहे।
खटीकन मोहल्ला में उपद्रवियों की टोली देख बु़द्धी, रहमान और मुन्नी के परिवार दहल गए थे। लेकिन, टेलरिंग का काम करने वाले रहमान और उनके मजदूर भाई बुद्धी को भरोसा था कि उन्होंने किसी के साथ गलत नहीं किया है। यही सोचकर वे नहीं गए। बुद्धी के साथ उनकी 90 वर्षीय मां बिस्मिल्लाह रहती हैं। सुबह नौ बजे जब बाजार में उपद्रवी तांडव मचा रहे थे तो उन्हें भी मौत नजर आने लगी। तभी एक पड़ोसी ने उनके मकान का बाहर से ताला लगा दिया और रात में गायब हो जाने की सलाह दी।
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थोड़ी देर बाद जब उपद्रव शांत हुआ तो मौका देखकर सभी को बाहर निकाला और अपने घर में आसरा दिया। रात में ही घर के अन्य युवक सुरक्षित स्थानों पर चले गए लेकिन बुद्धी फिर भी नहीं हिला। बोला अब तक यहां की मिट्टी में खाया कमाया है, इसे छोड़कर कहां जाएं। अमर उजाला की टीम जब खटीकन मोहल्ला पहुंची तो नहाने के लिए कपड़े लेने जा रहे बुद्धी डर गए। विश्वास में लेकर पूछा तो एकांत में अपनी बात कह सके। सौंख का यही सच है जो काबिले तारीफ है। यहां के लोगों के बीच का भाईचारा एक मिसाल है और इसीलिए यहां जिंदगी तेजी से सामान्य हो रही है।
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शनिवार को सौंख के मुस्लिम मंडी में तनाव के बाद से यहां के 50 से अधिक परिवार पलायन कर गए हैं। दो समुदायों के युवक-युवती के प्रेम प्रसंग से उपजी अशांति ने बुधवार को धार्मिक स्थलों में आग लगाकर माहौल को और खराब करने की कोशिश की। घटना के बाद से कस्बा संगीनों के साए में है। अमर उजाला की टीम गुरुवार को कर्फ्यू से महसूस हो रहे सन्नाटे में वहां पहुंची तो एक मकान में मेेमने की आवाज ने इंसानों की मौजूदगी का एहसास करा दिया। कुंडी खटखटाने पर घर के भीतर से कोई आवाज नहीं आई। इसी बीच बेटे ने पुकारा तो भीतर से डरी सहमी मां बोल पड़ी। मां-बेटे खाट पर बैठे हुए अपना हाथ जोड़े रहे।
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खटीकन मोहल्ला में उपद्रवियों की टोली देख बु़द्धी, रहमान और मुन्नी के परिवार दहल गए थे। लेकिन, टेलरिंग का काम करने वाले रहमान और उनके मजदूर भाई बुद्धी को भरोसा था कि उन्होंने किसी के साथ गलत नहीं किया है। यही सोचकर वे नहीं गए। बुद्धी के साथ उनकी 90 वर्षीय मां बिस्मिल्लाह रहती हैं। सुबह नौ बजे जब बाजार में उपद्रवी तांडव मचा रहे थे तो उन्हें भी मौत नजर आने लगी। तभी एक पड़ोसी ने उनके मकान का बाहर से ताला लगा दिया और रात में गायब हो जाने की सलाह दी।
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थोड़ी देर बाद जब उपद्रव शांत हुआ तो मौका देखकर सभी को बाहर निकाला और अपने घर में आसरा दिया। रात में ही घर के अन्य युवक सुरक्षित स्थानों पर चले गए लेकिन बुद्धी फिर भी नहीं हिला। बोला अब तक यहां की मिट्टी में खाया कमाया है, इसे छोड़कर कहां जाएं। अमर उजाला की टीम जब खटीकन मोहल्ला पहुंची तो नहाने के लिए कपड़े लेने जा रहे बुद्धी डर गए। विश्वास में लेकर पूछा तो एकांत में अपनी बात कह सके। सौंख का यही सच है जो काबिले तारीफ है। यहां के लोगों के बीच का भाईचारा एक मिसाल है और इसीलिए यहां जिंदगी तेजी से सामान्य हो रही है।