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Mathura News: 5253वीं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर तीन धामों के प्रसाद का होगा संगम
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मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव चार सितंबर को शास्त्रीय मर्यादाओं एवं परंपराओं के अनुसार मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के पदाधिकारियों ने शनिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि इस बार जन्मोत्सव में अयोध्या, मथुरा और काशी का आध्यात्मिक संगम दिखाई देगा।
संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि ठाकुरजी पंचरत्नी पोशाक धारण कर कलहंस पुष्प बंगले में विराजेंगे। पोशाक में समुद्र मंथन से प्राप्त पांच रत्न कामधेनु, पांचजन्य शंख, अमृत कलश, ऐरावत और कल्पवृक्ष को उकेरा गया है। रत्नजड़ित मुकुट, बांसुरी और कंठे से शृंगार होगा। भगवती योगमाया दिव्य स्वर्ण मुकुट धारण करेंगी।
3 सितंबर को शाम 5:30 बजे पोशाक अर्पण एवं दर्शन कार्यक्रम होगा। शोभायात्रा में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से प्राप्त ठाकुरजी का प्रसाद, सुगंधित द्रव्य और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या धाम से प्राप्त उपहार एवं अभिषेक सामग्री लाई जाएगी। संस्थान द्वारा तैयार विशेष वस्त्र, आभूषण और शृंगार सामग्री भी अर्पित की जाएगी। अयोध्या, मथुरा और काशी के इस संगम को तीन पवित्र पुरियों की त्रिवेणी जैसा स्वरूप दिया जाएगा। जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं को गो रक्षा-राष्ट्र रक्षा का संकल्प दिलाया जाएगा। गर्भगृह में करीब 200 किग्रा चांदी से सजावट की है। नवनिर्मित रजत कमल में विराजमान ठाकुर गोपालजी का जन्म अभिषेक विशेष आकर्षण रहेगा।
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4 सितंबर सुबह 5:30 बजे मंगला आरती, 8 बजे पंचामृत अभिषेक और रात 10 बजे जन्म महाभिषेक का कार्यक्रम होगा। रात 12 बजे प्राकट्य दर्शन एवं आरती होगी। इसके बाद कामधेनु स्वरूपा स्वर्ण मंडित रजत गाय से अभिषेक और रजत कमल में ठाकुरजी का जन्म महाभिषेक होगा। शृंगार आरती 12:45 से 12:50 बजे तक और शयन आरती रात 1:55 से 2 बजे तक होगी। श्रद्धालुओं का प्रवेश रात 1:30 बजे तक रहेगा।
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संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि ठाकुरजी पंचरत्नी पोशाक धारण कर कलहंस पुष्प बंगले में विराजेंगे। पोशाक में समुद्र मंथन से प्राप्त पांच रत्न कामधेनु, पांचजन्य शंख, अमृत कलश, ऐरावत और कल्पवृक्ष को उकेरा गया है। रत्नजड़ित मुकुट, बांसुरी और कंठे से शृंगार होगा। भगवती योगमाया दिव्य स्वर्ण मुकुट धारण करेंगी।
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3 सितंबर को शाम 5:30 बजे पोशाक अर्पण एवं दर्शन कार्यक्रम होगा। शोभायात्रा में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से प्राप्त ठाकुरजी का प्रसाद, सुगंधित द्रव्य और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या धाम से प्राप्त उपहार एवं अभिषेक सामग्री लाई जाएगी। संस्थान द्वारा तैयार विशेष वस्त्र, आभूषण और शृंगार सामग्री भी अर्पित की जाएगी। अयोध्या, मथुरा और काशी के इस संगम को तीन पवित्र पुरियों की त्रिवेणी जैसा स्वरूप दिया जाएगा। जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं को गो रक्षा-राष्ट्र रक्षा का संकल्प दिलाया जाएगा। गर्भगृह में करीब 200 किग्रा चांदी से सजावट की है। नवनिर्मित रजत कमल में विराजमान ठाकुर गोपालजी का जन्म अभिषेक विशेष आकर्षण रहेगा।
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4 सितंबर सुबह 5:30 बजे मंगला आरती, 8 बजे पंचामृत अभिषेक और रात 10 बजे जन्म महाभिषेक का कार्यक्रम होगा। रात 12 बजे प्राकट्य दर्शन एवं आरती होगी। इसके बाद कामधेनु स्वरूपा स्वर्ण मंडित रजत गाय से अभिषेक और रजत कमल में ठाकुरजी का जन्म महाभिषेक होगा। शृंगार आरती 12:45 से 12:50 बजे तक और शयन आरती रात 1:55 से 2 बजे तक होगी। श्रद्धालुओं का प्रवेश रात 1:30 बजे तक रहेगा।