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सांकरी खोर में हुई चोटी बंधन लीला
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बरसाना (मथुरा)। जिसके नाम लेने मात्र से लोगों के भव बंधन कट जाते हैं, उसी को बरसाना की गोपियों ने बांध दिया। बांधना भी रस्सी से नहीं खुद कृष्ण और उनके सखाओं की चोटियों को धौह के पेड़ की टहनियों से बांध दिया। लीला के इस दृश्य को देख कर लोग राधा-कृष्ण की जय-जयकार करने लगे।
सोमवार को कस्बे में सबसे पहले नागाजी की कुंज में माखन चोरी लीला हुई। मंदिर मार्ग स्थित नागाजी की बैठक, लाडिली जी मंदिर एवं नागाजी के रास मंडल पर लीलाएं करने के बाद राधा-कृष्ण के स्वरूपों को भक्तजन कंधे पर बिठा कर सांकरी खोर पहुंचे। सांकरी खोर स्थित रास मंडल पर धौह के वृक्ष के नीचे चोटी बंधन लीला हुई।
रास मंडली के स्वामी विरजन स्वामी ने बताया कि श्रीकृष्ण और उनके सखा मनसुखा द्वारा माखन चोरी के कारण नाराज गोपियों ने कृष्ण और मनसुखा को पकड़ कर उनकी चोटियां पेड़ से बांध दीं। आयोजन में गोपाल सखी, बाबा अनन्त दास, संजू दिवाकर, सोनू गोड़, टुन्नू महंत, भूषण शास्त्री का सहयोग रहा।
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चोटी बांधने का डर आज भी सताता रहता है नंदगांव के लोगों को
बरसाना। सांकरी खोर में होने वाली चोटी बंधन लीला देखने के लिए नंदगांव के लोग नहीं पहुंचते। उन्हें डर रहता है कि कहीं बरसाना के लोग उनकी चोटी को पेड़ से न बांध दें। शुक्रवार को भाद्रपद शुक्ला एकादशी के दिन बरसाना के सांकरी खोर में चोटी बंधन लीला का मंचन किया गया। इस दिन नदगांव के किसी व्यक्ति ने बरसाना का रुख नहीं किया। नंदगांव निवासी राधा बल्लभ ने बताया कि उन्होंने इस लीला के बारे में बचपन में बुजुर्गों से सुना था कि अगर इस दिन बरसाना गए तो वहां की गोपियां चोटी को पकड़ कर पेड़ से बांध देंगी। इसलिए इस दिन कभी बरसाना नहीं गए। नंदगाव के छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक चोटी बंधन वाले दिन कोई भी बरसाना नहीं जाता। चाहे कितना भी बड़ा काम क्यों न बिगड़ जाए।बरसाना के लाडली जी मंदिर के सेवायत संजय गोस्वामी ने बताया कि दोनों गांवों की साझा सांस्कृतिक विरासत है, जो राधा-कृष्ण के प्रेम पर टिकी है। इसलिए पुरातन मान्यताओं का सम्मान दोनों ही गांवों के लोगों द्वारा किया जाता है।
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सोमवार को कस्बे में सबसे पहले नागाजी की कुंज में माखन चोरी लीला हुई। मंदिर मार्ग स्थित नागाजी की बैठक, लाडिली जी मंदिर एवं नागाजी के रास मंडल पर लीलाएं करने के बाद राधा-कृष्ण के स्वरूपों को भक्तजन कंधे पर बिठा कर सांकरी खोर पहुंचे। सांकरी खोर स्थित रास मंडल पर धौह के वृक्ष के नीचे चोटी बंधन लीला हुई।
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रास मंडली के स्वामी विरजन स्वामी ने बताया कि श्रीकृष्ण और उनके सखा मनसुखा द्वारा माखन चोरी के कारण नाराज गोपियों ने कृष्ण और मनसुखा को पकड़ कर उनकी चोटियां पेड़ से बांध दीं। आयोजन में गोपाल सखी, बाबा अनन्त दास, संजू दिवाकर, सोनू गोड़, टुन्नू महंत, भूषण शास्त्री का सहयोग रहा।
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चोटी बांधने का डर आज भी सताता रहता है नंदगांव के लोगों को
बरसाना। सांकरी खोर में होने वाली चोटी बंधन लीला देखने के लिए नंदगांव के लोग नहीं पहुंचते। उन्हें डर रहता है कि कहीं बरसाना के लोग उनकी चोटी को पेड़ से न बांध दें। शुक्रवार को भाद्रपद शुक्ला एकादशी के दिन बरसाना के सांकरी खोर में चोटी बंधन लीला का मंचन किया गया। इस दिन नदगांव के किसी व्यक्ति ने बरसाना का रुख नहीं किया। नंदगांव निवासी राधा बल्लभ ने बताया कि उन्होंने इस लीला के बारे में बचपन में बुजुर्गों से सुना था कि अगर इस दिन बरसाना गए तो वहां की गोपियां चोटी को पकड़ कर पेड़ से बांध देंगी। इसलिए इस दिन कभी बरसाना नहीं गए। नंदगाव के छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक चोटी बंधन वाले दिन कोई भी बरसाना नहीं जाता। चाहे कितना भी बड़ा काम क्यों न बिगड़ जाए।बरसाना के लाडली जी मंदिर के सेवायत संजय गोस्वामी ने बताया कि दोनों गांवों की साझा सांस्कृतिक विरासत है, जो राधा-कृष्ण के प्रेम पर टिकी है। इसलिए पुरातन मान्यताओं का सम्मान दोनों ही गांवों के लोगों द्वारा किया जाता है।