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Mathura News: सोशल मीडिया पर विज्ञापन देख प्लॉट खरीदना पड़ा भारी, हुई धोखाधड़ी
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चौमुहां। वृंदावन और जैंत के बीच प्लॉट दिलाने के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जालसाजों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर रियल एस्टेट नामक कंपनी के विज्ञापनों के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाया और लाखों रुपये ले लिए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस अब मामले की जांच कर रही है।
नगला गुखरौली (मगना) थाना बलदेव, मथुरा निवासी सतीश कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर राधा शरणम् कॉलोनी के विज्ञापन देखे थे। विज्ञापनों में नेहा वैश और योगेन्द्र सिंह राजावत को कंपनी का मालिक दिखाया गया था। पीड़ित जब मौके पर पहुंचा, तो वहां लगे बैनर और ऑफिस में मौजूद लोगों ने खुद को जमीन का मालिक बताकर भरोसा जीता।
पीड़ित ने बताया कि आरोपियों ने खसरा संख्या 334, मौजा जैंत में 100 वर्गगज का प्लॉट 40,000 रुपये प्रति वर्गगज के हिसाब से तय किया। एडवांस भुगतान में 14 नवंबर 2024 को अलग-अलग चेक के माध्यम से 15 लाख रुपये दिए गए। मार्च 2025 में विकास कार्य के नाम पर 10 लाख रुपये नकद लिए गए। आरोपियों ने एग्रीमेंट टू सेल और अन्य दस्तावेज दिए, जो जांच में फर्जी पाए गए। पता चला कि उक्त जमीन के मालिक वे लोग नहीं हैं।
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धोखाधड़ी का पता चलने पर जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने टालमटोल की। बाद में 35 लाख रुपये का चेक दिया, जो बैंक में अनादरित हो गया। पीड़ित का आरोप है कि 8 जनवरी 2026 को आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर नेहा वैश, योगेन्द्र सिंह राजावत, पूनम कुमारी परमार, विकास राजावत, लाखन सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मामले में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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नगला गुखरौली (मगना) थाना बलदेव, मथुरा निवासी सतीश कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर राधा शरणम् कॉलोनी के विज्ञापन देखे थे। विज्ञापनों में नेहा वैश और योगेन्द्र सिंह राजावत को कंपनी का मालिक दिखाया गया था। पीड़ित जब मौके पर पहुंचा, तो वहां लगे बैनर और ऑफिस में मौजूद लोगों ने खुद को जमीन का मालिक बताकर भरोसा जीता।
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पीड़ित ने बताया कि आरोपियों ने खसरा संख्या 334, मौजा जैंत में 100 वर्गगज का प्लॉट 40,000 रुपये प्रति वर्गगज के हिसाब से तय किया। एडवांस भुगतान में 14 नवंबर 2024 को अलग-अलग चेक के माध्यम से 15 लाख रुपये दिए गए। मार्च 2025 में विकास कार्य के नाम पर 10 लाख रुपये नकद लिए गए। आरोपियों ने एग्रीमेंट टू सेल और अन्य दस्तावेज दिए, जो जांच में फर्जी पाए गए। पता चला कि उक्त जमीन के मालिक वे लोग नहीं हैं।
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धोखाधड़ी का पता चलने पर जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने टालमटोल की। बाद में 35 लाख रुपये का चेक दिया, जो बैंक में अनादरित हो गया। पीड़ित का आरोप है कि 8 जनवरी 2026 को आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर नेहा वैश, योगेन्द्र सिंह राजावत, पूनम कुमारी परमार, विकास राजावत, लाखन सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मामले में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।