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ब्रह्मोत्सव : श्रीरंगनाथ मंदिर से प्रतिदिन निकलेंगी सवारी
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वृंदावन। श्रीरामानुज संप्रदाय के श्रीरंगनाथ मंदिर का दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव (रथ का मेला) 7 मार्च से शुरु होगा। उत्सव को लेकर मंदिर प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी है। 13 मार्च को विशाल रथ पर भगवान गोदारंगमन्नार विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे।
बृहस्पतिवार को मंदिर में ब्रह्मोत्सव के कलेंडर का विमोचन स्वामी रघुनाथ आचार्य ने किया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मोत्सव रथ के मेले का शुभारंभ सात मार्च को अंकुरारोपण, देव आह्वान, ध्वजारोहण से होगा। मंदिर के प्रबंधक श्रीकृष्णन ने बताया कि 7 मार्च को सुबह ठाकुर रंगनाथ भगवान स्वर्ण निर्मित पूर्ण कोठी में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इसी तरह भगवान प्रतिदिन स्वर्ण रजत निर्मित वाहन सूर्यप्रभा, चंद्रप्रभा, गरुणजी, हनुमानजी, पालकी, सिंह, अश्व, सिंहशार्दुल पर विराजित होकर मंदिर से बाहर आकर भक्तों को दर्शन देंगे। दस दिन निरंतर सुबह और शाम ठाकुरजी की सवारी निकलेगी।
मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि 12 मार्च को भगवान गोदा रंगमन्नार कांच के विमान में विराजमान होकर भक्तों के साथ होली खेलेंगे। 13 मार्च को भगवान श्रीरंगनाथ, श्रीदेवी और भूदेवी विशाल रथ में विराजित होकर भक्तों को कृतार्थ करेंगे। 14 मार्च को आतिशबाजी का आयोजन रंगजी के बड़े बगीचा में होगा। महोत्सव का समापन 16 मार्च को देर रात पुष्पक विमान से होगा। इसके बाद स्वर्ण स्तंभ पर विराजित भगवान के प्रमुख वाहन गरुणजी को वेद मंत्रों से विदाई दी जाएगी।
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बृहस्पतिवार को मंदिर में ब्रह्मोत्सव के कलेंडर का विमोचन स्वामी रघुनाथ आचार्य ने किया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मोत्सव रथ के मेले का शुभारंभ सात मार्च को अंकुरारोपण, देव आह्वान, ध्वजारोहण से होगा। मंदिर के प्रबंधक श्रीकृष्णन ने बताया कि 7 मार्च को सुबह ठाकुर रंगनाथ भगवान स्वर्ण निर्मित पूर्ण कोठी में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इसी तरह भगवान प्रतिदिन स्वर्ण रजत निर्मित वाहन सूर्यप्रभा, चंद्रप्रभा, गरुणजी, हनुमानजी, पालकी, सिंह, अश्व, सिंहशार्दुल पर विराजित होकर मंदिर से बाहर आकर भक्तों को दर्शन देंगे। दस दिन निरंतर सुबह और शाम ठाकुरजी की सवारी निकलेगी।
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मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि 12 मार्च को भगवान गोदा रंगमन्नार कांच के विमान में विराजमान होकर भक्तों के साथ होली खेलेंगे। 13 मार्च को भगवान श्रीरंगनाथ, श्रीदेवी और भूदेवी विशाल रथ में विराजित होकर भक्तों को कृतार्थ करेंगे। 14 मार्च को आतिशबाजी का आयोजन रंगजी के बड़े बगीचा में होगा। महोत्सव का समापन 16 मार्च को देर रात पुष्पक विमान से होगा। इसके बाद स्वर्ण स्तंभ पर विराजित भगवान के प्रमुख वाहन गरुणजी को वेद मंत्रों से विदाई दी जाएगी।
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