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बिहारीजी मंदिर चढ़ावा मामला: कोर्ट में अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे सेवायत
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वृंदावन। श्रीबांकेबिहारी मंदिर में चढ़ावे के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेवायतों ने भी अपनी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। सेवायत अब मंदिर से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं और जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करने की तैयारी में जुटे हैं।
सेवायतों का कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाओं और चढ़ावे से संबंधित मामले में श्रीबांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन हाईपावर्ड कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में कई साक्ष्य पेश किए। कुछ फोटो भी प्रस्तुत किए, जिसमें कुछ लोग श्रद्धालुओं से चढ़ावा लेकर अपनी जेब में रखते हुए नजर आए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि ठाकुरजी के लिए मिलने वाला एक रुपया भी उनका है। सेवायत उन्हें खुद नहीं ले सकते। इस आदेश के बाद अब सेवायत पक्ष की ओर से भी तथ्यों और दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष मजबूती से कोर्ट में रखने की तैयारी चल रही है।
कमेटी के सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने कहा कि कमेटी पदाधिकारी पहले तो यह बताएं कि आखिर चढ़ावा चोरी कर कौन रहा है। अगर ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत करने थे तो कमेटी के सामने पहले क्यों नहीं रखे गए। सेवायत सदस्यों को इसके बारे में जानकारी क्यों नहीं दी गई। श्रीबांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाएं वर्षों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हैं इसलिए किसी भी व्यवस्था में बदलाव से पहले सभी संबंधित पक्षों की भूमिका और मंदिर की परंपराओं का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
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सेवायतों का कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाओं और चढ़ावे से संबंधित मामले में श्रीबांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन हाईपावर्ड कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में कई साक्ष्य पेश किए। कुछ फोटो भी प्रस्तुत किए, जिसमें कुछ लोग श्रद्धालुओं से चढ़ावा लेकर अपनी जेब में रखते हुए नजर आए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि ठाकुरजी के लिए मिलने वाला एक रुपया भी उनका है। सेवायत उन्हें खुद नहीं ले सकते। इस आदेश के बाद अब सेवायत पक्ष की ओर से भी तथ्यों और दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष मजबूती से कोर्ट में रखने की तैयारी चल रही है।
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कमेटी के सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने कहा कि कमेटी पदाधिकारी पहले तो यह बताएं कि आखिर चढ़ावा चोरी कर कौन रहा है। अगर ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत करने थे तो कमेटी के सामने पहले क्यों नहीं रखे गए। सेवायत सदस्यों को इसके बारे में जानकारी क्यों नहीं दी गई। श्रीबांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाएं वर्षों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हैं इसलिए किसी भी व्यवस्था में बदलाव से पहले सभी संबंधित पक्षों की भूमिका और मंदिर की परंपराओं का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
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