{"_id":"66538f746e49fe4df00b6b06","slug":"banke-bihari-sits-in-a-flower-bungalow-decorated-with-local-and-foreign-flowers-mathura-news-c-29-1-mtr1002-241099-2024-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: देशी-विदेशी फूलों से सजे फूल बंगले में विराजे बांकेबिहारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: देशी-विदेशी फूलों से सजे फूल बंगले में विराजे बांकेबिहारी
विज्ञापन
वृंदावन (मथुरा)। जन-जन के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारी ने देशी-विदेशी फूलों से सजे फूल बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। आराध्य की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी के लाडले ठाकुर बांकेबिहारी की सेवा परंपरा सबसे अनूठी है। सेवायतों ने ग्रीष्मकाल में लाडले कन्हैया को भीषण गर्मी में शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के फूलों से सजे बंगले यानि कुटिया में विराजित किया जाता है। वैसे तो ठाकुरजी को फूलों से सजी कुटिया में विराजित करने की परंपरा करीब साढ़े चार सौ वर्षो से अधिक प्राचीन है, लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आते गए।
स्वामी हरिदास जी की वंश परंपरा के गोस्वामीजन पहले केले के पत्ते, रायबेल, गुलाब, कनेर, चमेली मार्ग्रेट, गेंदा व हरे पत्तों से इसकी सज्जा करते थे, लेकिन अब फूल बंगला बनाने में विदेशी फूल आर्किड, रजनीगंधा, गुलदावरी का इस्तेमाल भी होने लगा है। जिससे इसकी लागत 10 से 15 लाख तक भी हो जाती है। चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी को शुरू हुई ठा. बांकेबिहारी मंदिर में फूल बंगला सजाने की प्रक्रिया 4 अगस्त को हरियाली अमावस्या पर खत्म हो जाएगी। इधर रविवार को बांकेबिहारी के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। सुबह से लेकर शाम तक मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही।
विज्ञापन
-- --
विज्ञापन
संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी के लाडले ठाकुर बांकेबिहारी की सेवा परंपरा सबसे अनूठी है। सेवायतों ने ग्रीष्मकाल में लाडले कन्हैया को भीषण गर्मी में शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के फूलों से सजे बंगले यानि कुटिया में विराजित किया जाता है। वैसे तो ठाकुरजी को फूलों से सजी कुटिया में विराजित करने की परंपरा करीब साढ़े चार सौ वर्षो से अधिक प्राचीन है, लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आते गए।
विज्ञापन
स्वामी हरिदास जी की वंश परंपरा के गोस्वामीजन पहले केले के पत्ते, रायबेल, गुलाब, कनेर, चमेली मार्ग्रेट, गेंदा व हरे पत्तों से इसकी सज्जा करते थे, लेकिन अब फूल बंगला बनाने में विदेशी फूल आर्किड, रजनीगंधा, गुलदावरी का इस्तेमाल भी होने लगा है। जिससे इसकी लागत 10 से 15 लाख तक भी हो जाती है। चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी को शुरू हुई ठा. बांकेबिहारी मंदिर में फूल बंगला सजाने की प्रक्रिया 4 अगस्त को हरियाली अमावस्या पर खत्म हो जाएगी। इधर रविवार को बांकेबिहारी के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। सुबह से लेकर शाम तक मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही।
विज्ञापन