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Mathura News: सर्दी बढ़ते ही ठाकुरजी के भोग और वस्त्रों में आया बदलाव
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गर्म वस्त्र धारण किए नंद परिवार
नंदगांव। अगहन माह की बढ़ती ठंड के साथ नंदीश्वर पहाड़ी स्थित नंदबाबा मंदिर में ठाकुरजी को शीत से बचाने की विशेष सेवाएं आरंभ हो गई हैं। सेवायतों द्वारा खान-पान, भोग-राग और वस्त्रों तक का खास ध्यान रखा जा रहा है ताकि नंदबाबा के परिवार को ठंड न लगे।
मंदिर में पान बीड़ा तक में केसर-कस्तूरी का प्रयोग शुरू किया गया है। रात्रि शयन भोग में दूध में केसर, सौंठ आदि मिलाकर नंदबाबा, दोनों भाइयों और अन्य श्रीविग्रहों को अर्पित किया जा रहा है। रुई से बनी बगलवंदी, फरगुल, गर्म शॉल, ऊनी टोपी तथा सनील से बने पर्दे-पिछवाई इन दिनों ठाकुर जी की पोशाक और आभरण का मुख्य हिस्सा हैं। रात में श्रीविग्रहों को मुलायम रजाई भी ओढ़ाई जा रही है। केसर-कस्तूरी इत्र और हिना इत्र से वातावरण को गर्माहट दी जा रही है।
सेवायत एवं पूर्व प्रधानाचार्य रमेश चंद गोस्वामी के अनुसार, बसंत लगने तक यही सेवा क्रम चलेगा। अधिक शीत बढ़ने पर गर्भगृह में सुबह-शाम अंगीठी रखनी शुरू हो जाएगी। ठंड के चरम पर केसर, कस्तूरी और मेवों से बनी पौष्टिक मीठी खिचड़ी को भोग में शामिल किया जाएगा।
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वहीं पुष्टिमार्गीय बंटा वारी कुंज के सेवायत श्यामलाल शर्मा ने बताया कि ठा. नवनीत-प्रियाजी को भी गर्म वस्त्र पहनाकर विशेष शीत-सेवा की जा रही है। अन्य मंदिरों में भी ठाकुरजी को शीत से राहत देने के उपाय प्रारंभ हो चुके हैं।
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मंदिर में पान बीड़ा तक में केसर-कस्तूरी का प्रयोग शुरू किया गया है। रात्रि शयन भोग में दूध में केसर, सौंठ आदि मिलाकर नंदबाबा, दोनों भाइयों और अन्य श्रीविग्रहों को अर्पित किया जा रहा है। रुई से बनी बगलवंदी, फरगुल, गर्म शॉल, ऊनी टोपी तथा सनील से बने पर्दे-पिछवाई इन दिनों ठाकुर जी की पोशाक और आभरण का मुख्य हिस्सा हैं। रात में श्रीविग्रहों को मुलायम रजाई भी ओढ़ाई जा रही है। केसर-कस्तूरी इत्र और हिना इत्र से वातावरण को गर्माहट दी जा रही है।
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सेवायत एवं पूर्व प्रधानाचार्य रमेश चंद गोस्वामी के अनुसार, बसंत लगने तक यही सेवा क्रम चलेगा। अधिक शीत बढ़ने पर गर्भगृह में सुबह-शाम अंगीठी रखनी शुरू हो जाएगी। ठंड के चरम पर केसर, कस्तूरी और मेवों से बनी पौष्टिक मीठी खिचड़ी को भोग में शामिल किया जाएगा।
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वहीं पुष्टिमार्गीय बंटा वारी कुंज के सेवायत श्यामलाल शर्मा ने बताया कि ठा. नवनीत-प्रियाजी को भी गर्म वस्त्र पहनाकर विशेष शीत-सेवा की जा रही है। अन्य मंदिरों में भी ठाकुरजी को शीत से राहत देने के उपाय प्रारंभ हो चुके हैं।