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कृषि विभाग दे रहा आर्गनिक खेती को बढ़ावा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 08:16 PM IST
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Agriculture department is promoting organic farming
मथुरा। जहरीले रसायन के प्रभाव से लोगों को बचाने के लिए किसानों द्वारा जैविक खेती करना महंगा साबित होता जा रहा है। एक तरफ उनको जैविक खेती से उत्पादन करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो दूसरी ओर उनके उत्पादनों को बाजार में खरीदार नहीं मिल रहे। जिसके चलते इन किसानों के हौसले पस्त होते जा रहे हैं।
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अधिक उत्पादनों की चाहत रखने वाले किसानों द्वारा खेत में उगाए जा रहे उत्पादकों पर कई-कई केमिकलों का छिड़काव किया जाता है। जिससे कि बाजार में बिकने वाले गेहूं, चावल, आलू व सब्जियां बहुत सुंदर प्रतीत होती हैं। इन्हें खाने के बाद लोगों में हर रोज अलग-अलग तरीके की बीमारियां पैदा होती हैं।
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इसके विपरीत पारंपरिक तरीके से गोबर तथा देशी खाद तैयार करके जो उत्पादन तैयार किया जा रहा है, उससे लोगों को जहरीले केमिकलोें के प्रभाव से बचाने में मदद मिलती है लेकिन देशी तरीके से खेती करने वाले किसानों को अपने ग्राहक खोजने में एड़ी से चोटी तक पसीना बहाना पड़ रहा है। इसके बावजूद भी उन्हें अपने उत्पादन की सही कीमत नहीं मिल पा रही है।
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नहीं है जैविक खेती प्रोडक्ट का बाजार
जनपद में करीब ३०० किसान जैविक खेती करके उत्पादन तैयार कर रहे हैं, लेकिन उनके उत्पादन को बेचने के लिए मथुरा में कोई बाजार नहीं है। जिससे जैविक खेती के उत्पादन को सही कीमत नहीं मिल पाती है। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि मथुरा की जैविक खेती के उत्पादों को दिल्ली के बाजार में बेचा जाता है।
६ एकड़ में उग पाया है एक एकड़ का आलू
मैंने छह एकड़ में इस दफा आलू बोया था, लेकिन इसमें जीवामृत नहीं दे सका। जिसके कारण इस दफा आलू की खेती मेें नुकसान हुआ है। केवल एक एकड़ का ही आलू हो पाया, जबकि आंवला की फसल अच्छी हुई है।

- तेजपाल सिंह, आलू उत्पादक किसान इनायत गढ़ नौहझील
जैविक खेती करने वालों की कर रहे हैं मदद
हम जैविक खेती करने वाले किसानों की मदद कर रहे हैं। पीकेवीवाई (परंपरागत कृषि विकास योजना) के तहत प्रति एकड़ भूमि के हिसाब से आर्थिक लाभ भी दे रहे हैं। हम अधिक से अधिक किसानों को योजनाओं का लाभ दे रहे हैं।
- अश्वनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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