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International Museum Day: यहां खून से तैयार की गईं वीरों की तस्वीरें, शहादत की कहानियां कर देती हैं आंखें नम
Sun, 18 May 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
तुषार चाैहान, संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
तुषार चाैहान, संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 May 2025 01:06 AM IST
सार
वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में एक अनूठा संग्रहालय है। यहां देश के वीरों की तस्वीरें खून से तैयार की गईं हैं। साथ ही शहादत की कहानियों का भी उल्लेख है, जिसे पढ़कर आंखें नम हो जाती हैं।
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वात्सल्य ग्राम में बने संग्रहालय में रक्त निर्मित चित्रों की जानकारी देते उमा शंकर राही।
- फोटो : mathura
विस्तार
वात्सल्य ग्राम वृंदावन का अनूठा स्थल जहां प्रेम और भक्ति की बयार बहती है। यहां हर कार्य ऐसा होता है जो विश्व पटल पर वात्सल्य ग्राम को अनोखा प्रदर्शित करता है। देशभक्ति से ओतप्रोत भानु प्रताप शुक्ल स्मृति क्रांति कुंज संग्रहालय भी बलिदानियों की याद में बसाया गया ऐसा ही एक संसार है। यहां क्रांतिकारियों के चित्र मानव रक्त से बनाए गए हैं।
यह संग्रहालय दीदी मां साध्वी ऋतंभरा के सानिध्य में स्थापित किया गया है। इसका उद्घाटन 22 अक्तूबर 2010 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत एवं गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त रूप से किया था। वृंदावन का यह संग्रहालय उन बलिदानियों की याद दिलाता है जो किताबों में नहीं, परंतु भारत की मिट्टी में गूंजते हैं। इस संग्रहालय की सबसे खास बात यह है कि दिल्ली निवासी स्वर्गीय रवि चंद्र गुप्ता ने दस सालों तक नियमित रूप से रक्तदान किया और उस रक्त से पंजाब के चित्रकार गुरुदर्शन सिंह विंकल ने देश के वीरों की तस्वीरें तैयार कीं। इनमें 85 पुरुष, 15 महिला और 30 बाल क्रांतिकारियों के चित्र शामिल हैं।
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यह संग्रहालय दीदी मां साध्वी ऋतंभरा के सानिध्य में स्थापित किया गया है। इसका उद्घाटन 22 अक्तूबर 2010 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत एवं गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त रूप से किया था। वृंदावन का यह संग्रहालय उन बलिदानियों की याद दिलाता है जो किताबों में नहीं, परंतु भारत की मिट्टी में गूंजते हैं। इस संग्रहालय की सबसे खास बात यह है कि दिल्ली निवासी स्वर्गीय रवि चंद्र गुप्ता ने दस सालों तक नियमित रूप से रक्तदान किया और उस रक्त से पंजाब के चित्रकार गुरुदर्शन सिंह विंकल ने देश के वीरों की तस्वीरें तैयार कीं। इनमें 85 पुरुष, 15 महिला और 30 बाल क्रांतिकारियों के चित्र शामिल हैं।
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वात्सल्य ग्राम के मीडिया प्रभारी उमाशंकर राही ने बताया कि कुछ वर्ष पहले रक्त से बनीं तस्वीरें हल्की पड़ गईं तो देशभक्त स्वर्गीय रवि चंद्र गुप्ता की बेटी सारिका गुप्ता ने यह कहते हुए अपना रक्त दिया था कि उनके पिता के लिए यह सच्ची श्रद्धांजलि है।
13 वर्ष की उम्र के वीरों की भी झलक
मीडिया प्रभारी उमाशंकर राही ने बताया कि संग्रहालय में 1760 से 1947 तक के उन सेनानियों के चित्र हैं, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहूति दी। इन चित्रों में 13 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चों की शहादत की कहानियां भी सम्मिलित हैं जो किसी की भी आंखें नम कर देती हैं। संग्रहालय की देखरेख कर रहे मधुर प्रभात ने बताया कि इसमें पुरुषों के अलावा महिलाओं की तस्वीरें भी हैं, जिन्होंने वीरता से देश के लिए बलिदान दिया।
भानु प्रताप शुक्ल को समर्पित है संग्रहालय
यह संग्रहालय दीदी मां के मानस पुत्र व प्रसिद्ध पत्रकार भानु प्रताप शुक्ल की स्मृति में निर्मित किया गया है जो राष्ट्रवादी पत्रकारिता के माध्यम से जनजागरण का कार्य करते रहे। आज भी यहां उनके वस्त्र, चश्मा, पेन, वोटर कार्ड, पासपोर्ट आदि सुरक्षित हैं।
इन क्रांतिकारियों के हैं चित्र
संग्रहालय में क्रांतिकारियों के चित्रों में मंगल पांडे, नाना साहब पेशवा, अजीमुल्ला खान, हुकुमचंद जैन, बहादुर शाह जफर, ज्वाला प्रसाद, नारायण सिंह सोनाखान, राजा भास्कर राव, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद महारानी लक्ष्मी बाई, रानी चेनम्मा, वीरांगना अजीजन, माता तपस्विनी, मातंगिनी हाजरा, कस्तूरबा गांधी शामिल हैं। वहीं बाल्य क्रांतिकारी 13 वर्षीय कुमारी मैना, 13 वर्षीय रमेश दत्त मालवीय, 13 वर्षीय दत्तू रंगारी, 13 वर्षीय हरि गोपाल बाल, 14 वर्षीय अनहे आदि हैं।
13 वर्ष की उम्र के वीरों की भी झलक
मीडिया प्रभारी उमाशंकर राही ने बताया कि संग्रहालय में 1760 से 1947 तक के उन सेनानियों के चित्र हैं, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहूति दी। इन चित्रों में 13 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चों की शहादत की कहानियां भी सम्मिलित हैं जो किसी की भी आंखें नम कर देती हैं। संग्रहालय की देखरेख कर रहे मधुर प्रभात ने बताया कि इसमें पुरुषों के अलावा महिलाओं की तस्वीरें भी हैं, जिन्होंने वीरता से देश के लिए बलिदान दिया।
भानु प्रताप शुक्ल को समर्पित है संग्रहालय
यह संग्रहालय दीदी मां के मानस पुत्र व प्रसिद्ध पत्रकार भानु प्रताप शुक्ल की स्मृति में निर्मित किया गया है जो राष्ट्रवादी पत्रकारिता के माध्यम से जनजागरण का कार्य करते रहे। आज भी यहां उनके वस्त्र, चश्मा, पेन, वोटर कार्ड, पासपोर्ट आदि सुरक्षित हैं।
इन क्रांतिकारियों के हैं चित्र
संग्रहालय में क्रांतिकारियों के चित्रों में मंगल पांडे, नाना साहब पेशवा, अजीमुल्ला खान, हुकुमचंद जैन, बहादुर शाह जफर, ज्वाला प्रसाद, नारायण सिंह सोनाखान, राजा भास्कर राव, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद महारानी लक्ष्मी बाई, रानी चेनम्मा, वीरांगना अजीजन, माता तपस्विनी, मातंगिनी हाजरा, कस्तूरबा गांधी शामिल हैं। वहीं बाल्य क्रांतिकारी 13 वर्षीय कुमारी मैना, 13 वर्षीय रमेश दत्त मालवीय, 13 वर्षीय दत्तू रंगारी, 13 वर्षीय हरि गोपाल बाल, 14 वर्षीय अनहे आदि हैं।