आगरा के एत्माद्दौला स्मारक से सटी बृजमोहन दास की बगीची अब गांधी स्मारक है। 97 साल पहले वर्ष 1929 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इसी बगीची में 11 से 21 सितंबर तक करीब 11 दिन तक रहे थे। यहां बने कुएं का पानी पीकर पेट का दर्द ठीक करने के लिए वो आगरा आए थे। उनकी यादें इस स्मारक से जुड़ी हैं।
करीब 200 साल से ज्यादा पुरानी इमारत अब जर्जर हो चुकी है। राज्य पुरातत्व विभाग ने बीते साल 25 अप्रैल को इसके संरक्षित करने की घोषणा की। अब अगले माह से इसका संरक्षण शुरू किया जाएगा, जिस पर डेढ़ करोड़ रुपये की लागत आएगी। यमुनापार बृजमोहन दास मेहरा की बगीची में गांधी जी कस्तूरबा, आचार्य कृपलानी, मीरा बहन और प्रभावती के साथ प्रवास के लिए वर्ष 1929 में आए, उसके बाद से ही यह जगह उनके नाम से चर्चित हो गई। आ
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गांधी स्मारक आगरा
- फोटो : संवाद
जादी के बाद बापू का निधन हुआ तो वर्ष 1948 में बृजमोहन दास मेहरा ने अपने पिता राम कृष्ण दास मेहरा की स्मृति में बगीची को महात्मा गांधी स्मारक ट्रस्ट को दान कर दिया। तब इसकी देखरेख नगर महापालिका के हाथ में थी। राज्य पुरातत्व विभाग ने बीते साल 25 अप्रैल को संरक्षण की अधिसूचना जारी करने के साथ ही इसे मूल रूप में लाने का प्रस्ताव तैयार किया। करीब 1.48 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया गया है, जिसका टेंडर जारी किया जा रहा है।
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी। फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी ने बताया कि नगर निगम से हस्तांतरित होने के बाद डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से गांधी स्मारक के संरक्षण का प्रस्ताव बनाया गया है। अगले माह से संरक्षण कार्य शुरू करने की उम्मीद है। इसे पूरी तरह से मूल रूप में लाया जाएगा। टाइल्स, रेत से प्लास्टर करके इसे बिगाड़ दिया गया है। इसके चारों ओर बगीचा भी विकसित किया जाएगा।
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महात्मा गांधी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
पांच बार आगरा आए थे बापू
आजादी के आंदोलन को धार देने के लिए महात्मा गांधी वर्ष 1918 से 1944 तक 5 बार आगरा आए। वह वर्ष 1918, 1919, 1920, 1929 और 1944 में आगरा आए। लाखों लोग उनकी एक झलक पाने के लिए कैंट स्टेशन से बगीची तक उमड़ पड़ते थे। वर्ष 1929 में बापू ने आगरा में प्रवास के दौरान पालीवाल पार्क (हीवेट पार्क) में लोगों को संबोधित किया और असहयोग आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया था।
आकाश से नहीं टपकेगा स्वराज्य
आगरा आने पर 11 सितंबर 1929 को बापू ने तत्कालीन हीवेट पार्क में कहा कि वह यहां असहयोग की शक्ति में अपने विश्वास की फिर से घोषणा करने के लिए आए हैं। जनवरी 1930 के लिए तैयारी करें। अहिंसात्मक उपायों से ही स्वराज्य मिल सकता है। मैं गंभीर चेतावनी देता हूं कि अगर हम कुछ न करेंगे, हाथ पर हाथ धरकर बैठे रहेंगे तो केवल कांग्रेस की घोषणा मात्र से ही दिसंबर में आकाश से स्वराज्य टपकने वाला नहीं है।