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दान न देने पर कन्हैया ने फोड़ी ग्वालिनों की मटकी

Mon, 08 Sep 2014 05:30 AM IST
Mathura
Mathura Updated Mon, 08 Sep 2014 05:30 AM IST
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बरसाना/नंदगांव (मथुरा)। बरसाना, चिकसौली के मध्य बनी संकरी गली सांकरी खोर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सभी दोपहर बाद होने वाली मटकी फोड़ लीला के लिए अपना स्थान आरक्षित करने लग गए। एक बार फिर श्रीकृष्ण की द्वापरकाल की मटकी फोड़ लीला देखने का सौभाग्य सहज जो प्राप्त हो रहा है। इस आनंद में तपते पहाड़ों पर न तो उन्हें सूर्यदेव की तपिश सता रही थी, न ही कामकाज की चिंता।
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करीब साढे़ ग्यारह बजे नंदगांव के लोग बरसाना में लाड़ली जी के मंदिर में दर्शन कर हंसी ठिठोली करते हुए चिकसौली होते हुए सांकरी खोर पहुंचे। इस दौरान घंटों नंदगांव, बरसाना, चिकसौली के लोगों के बीच संयुक्त समाज गायन, दानलीला और मटकी फोड़ लीला के पदों का गायन किया गया। इसके बाद करीब डेढ़ बजे राधारानी की जन्मस्थली बरसाना स्थित सांकरी खोर में प्राचीन द्वापर कालीन मटकी फोड़ लीला का आयोजन किया गया।
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रविवार को सांकरी खोर में द्वापर युग में श्रीकृष्ण और कीर्ति नंदिनी राधा, उनकी सखियाें और ग्वालों के मध्य हुई दान लीला की यादें फिर से ताजा हो गईं। राधारानी की सबसे प्रिय चित्रासखी के गांव चिकसौली और मानपुर के घर-घर में माखन चोरी करने के बाद श्रीकृष्ण अपने ग्वालों के साथ सांकरी खोर की सांकरी गली में पहुंच गए और दूध, दही बेचने मथुरा जा रही सखियों का मार्ग अवरुद्ध कर दिया।
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इस अवसर पर बरसाना और नंदगांव के गोस्वामीजनों के बीच में पद गायन भी होता है। बरसाने की चली गुजरिया कर सोलह-शृंगार, उदविल कान्हा धेनु चरावै लूट लियौ नौ-लक्खा हार। एक चंचल गूजरी लेके दूध बेचने को निकली, सांकरी गली में मिल गए नंदलाल, दूध खायौ मटकी फोड़ी और दूध की कर दई कीचद़ पदों का गुणगान किया गया। जब चिकसौली की चित्रासखी अपनी सखियों के संग दूध, दही बेचने के लिए निकलती है तो रास्ते में ठाड़े श्रीकृष्ण गोपियों से कहते हैं ठाड़ी रहै ग्वालिनी दै जा हमारौ दान, यही दान के कारण छोड़ आयौ बैकुंठ सौ धाम। इसके जवाब में सखियों ने कहा कि लाला दूध, दही नाए तेरे बाप कौ, और यह गली भी नाए तेरे बाप की, छाछ हमारी जो पीवै जो टहल करैं सब दिन की। मटकी फोड़ लीला के दौरान इन पदों को सुनकर श्रद्धालु आनंद से भाव विभोर हो गए।

भगवान श्रीेकृष्ण के बार-बार कहने पर जब गोपियां नहीं मानीं तो माखन चोर ने अपने ग्वालवालों के साथ मिलकर मटकी छीनने का प्रयास किया। छीना झपटी में राधा और उनकी सखियों की मटकी फूट गई। दही की मटकी फूटते ही हजारों श्रद्धालु दही प्रसाद के लिए टूट पड़े। इससे पूर्व राधा पर्वत और कृष्ण पर्वत पर बैठे नंदगांव, बरसाने के लोगों के मध्य प्रेम और रसभरी गालियाें का आदान-प्रदान हुआ। मान्यता है कि कृष्ण द्वारा यह लीला दूध, दही बेचने की कुप्रथा को रोकने के लिए की गई थी। मटकी फोड़ लीला के मंचन के दौरान गुर्जर समुदाय की महिलाओं और पुरुषों के मध्य भी हंसी ठिठोली का माहौल रहा। राधाकृष्ण के जयघोष से सम्पूर्ण वातावरण गुंजायमान हो उठा।
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