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85 वर्षीय एनआरआई का हाईप्रोफाइल ड्रामा
Mathura
Updated Fri, 21 Jun 2013 05:30 AM IST
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मथुरा। 85 वर्षीय एनआरआई द्वारा वेटरिनरी कॉलेज के एक डाक्टर और उसके परिवारीजनों पर बंधक बनाकर मारपीट और लूट के आरोप के बाद दिनभर हाईप्रोफाइल ड्रामा चला। पुलिस ने चार घंटे की मशक्कत के बाद ड्रामे का पटाक्षेप कर दिया।
मूलरूप से मेरठ के रहने वाले हरवंश सिंह ने मथुरा के वेटरिनरी कॉलेज से 1954 में पशु चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की। तीन साल हरिद्वार में नौकरी के बाद हरवंश 1957 में अमेरिका चले गए। 10 साल के वीजा पर वे 18 फरवरी, 2013 को भारत और आगे 22 मई को मथुरा आए। हरवंश ने बताया कि वे पत्नी और बेटे से अनबन के चलते मानसिक रूप से खासे परेशान थे और शांति की तलाश में उन्होंने मथुरा का रुख किया। मथुरा में वे अपने पुराने कॉलेज वेटरिनरी पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात वरिष्ठ सर्जन डा. आरपी पांडेय से हुई। मुलाकात में हरवंश की इच्छानुसार डा. पांडेय ने उन्हें पहले चार दिन वेटरिनरी के गेस्ट हाउस और बाद में पड़ोस में थाना हाईवे की कॉलोनी आनंदवन में किराए पर मकान दिला दिया।
इसी दौरान हरवंश की सहमति पर वेटरिनरी कॉलेज की बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक में नया खाता खुलवाया गया। हरवंश ने बताया कि उसे 2500 डॉलर हर माह पेंशन के रूप में अमेरिका से आते हैं। साथ ही उनका लगभग 70 लाख रुपया भी आना है।
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हरवंश का आरोप था कि यह जानने के बाद डा. पांडेय के पुत्र और एक रिश्तेदार ने उनको बंधक बना लिया और आए दिन मारपीट कर पैसे देने के लिए दबाव बनाने लगे। पांडेय के पुत्र ने उनके ट्रेवल चेक व 13 सौ डॉलर हथिया लिए। उन्होंने अन्य आरोप भी लगाए। हरवंश के अनुसार 17 जून को उनकी पुकार पर आनंदवन के सुंदर और भगत नाम के युवकों ने उन्हें छुड़ाया और एक होटल में ठहराया।
पुलिस में शिकायत पर एसपी सिटी ओमवीर सिंह व एसओ हाईवे ने एनआरआई से जानकारी जुटाई। एसपी सिटी ने डा. आरपी पांडेय को भी बुला लिया। वहां दोनों पक्षों में समझौता हो गया और हरवंश का सामान उनके सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने एनआरआई को उनकी इच्छा पर गुड़गांव के लिए रवाना कर दिया।
.....................
मैंने अपने कॉलेज के पासआउट सीनियर की मदद एक बुजुर्ग होने के नाते की थी। उनकी हर जरूरत का ख्याल रखा। मेरी मदद का गलत सिला मुझे मिला है। पर गनीमत रही कि पुलिस ने हकीकत समझते हुए दूध का दूध पानी का पानी कराया।
-डा. आरपी पॉंडेय, वरिष्ठ सर्जन वेटरिनरी विवि, मथुरा
...................
एनआरआई के मामले में प्राथमिक जांच में कोई संदिग्ध बात सामने नहीं आई। अधिक उम्र होने और परिवार से अलग रहने के चलते वे शक की बीमारी से ग्रसित थे। उनके आरोपों में दम नहीं था और बार-बार बात बदल रहे थे। बाद में हकीकत सामने आ गई और वे हंसी-खुशी मथुरा से चले गए।
-ओमवीर सिंह, एसपी सिटी मथुरा
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मूलरूप से मेरठ के रहने वाले हरवंश सिंह ने मथुरा के वेटरिनरी कॉलेज से 1954 में पशु चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की। तीन साल हरिद्वार में नौकरी के बाद हरवंश 1957 में अमेरिका चले गए। 10 साल के वीजा पर वे 18 फरवरी, 2013 को भारत और आगे 22 मई को मथुरा आए। हरवंश ने बताया कि वे पत्नी और बेटे से अनबन के चलते मानसिक रूप से खासे परेशान थे और शांति की तलाश में उन्होंने मथुरा का रुख किया। मथुरा में वे अपने पुराने कॉलेज वेटरिनरी पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात वरिष्ठ सर्जन डा. आरपी पांडेय से हुई। मुलाकात में हरवंश की इच्छानुसार डा. पांडेय ने उन्हें पहले चार दिन वेटरिनरी के गेस्ट हाउस और बाद में पड़ोस में थाना हाईवे की कॉलोनी आनंदवन में किराए पर मकान दिला दिया।
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इसी दौरान हरवंश की सहमति पर वेटरिनरी कॉलेज की बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक में नया खाता खुलवाया गया। हरवंश ने बताया कि उसे 2500 डॉलर हर माह पेंशन के रूप में अमेरिका से आते हैं। साथ ही उनका लगभग 70 लाख रुपया भी आना है।
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हरवंश का आरोप था कि यह जानने के बाद डा. पांडेय के पुत्र और एक रिश्तेदार ने उनको बंधक बना लिया और आए दिन मारपीट कर पैसे देने के लिए दबाव बनाने लगे। पांडेय के पुत्र ने उनके ट्रेवल चेक व 13 सौ डॉलर हथिया लिए। उन्होंने अन्य आरोप भी लगाए। हरवंश के अनुसार 17 जून को उनकी पुकार पर आनंदवन के सुंदर और भगत नाम के युवकों ने उन्हें छुड़ाया और एक होटल में ठहराया।
पुलिस में शिकायत पर एसपी सिटी ओमवीर सिंह व एसओ हाईवे ने एनआरआई से जानकारी जुटाई। एसपी सिटी ने डा. आरपी पांडेय को भी बुला लिया। वहां दोनों पक्षों में समझौता हो गया और हरवंश का सामान उनके सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने एनआरआई को उनकी इच्छा पर गुड़गांव के लिए रवाना कर दिया।
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मैंने अपने कॉलेज के पासआउट सीनियर की मदद एक बुजुर्ग होने के नाते की थी। उनकी हर जरूरत का ख्याल रखा। मेरी मदद का गलत सिला मुझे मिला है। पर गनीमत रही कि पुलिस ने हकीकत समझते हुए दूध का दूध पानी का पानी कराया।
-डा. आरपी पॉंडेय, वरिष्ठ सर्जन वेटरिनरी विवि, मथुरा
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एनआरआई के मामले में प्राथमिक जांच में कोई संदिग्ध बात सामने नहीं आई। अधिक उम्र होने और परिवार से अलग रहने के चलते वे शक की बीमारी से ग्रसित थे। उनके आरोपों में दम नहीं था और बार-बार बात बदल रहे थे। बाद में हकीकत सामने आ गई और वे हंसी-खुशी मथुरा से चले गए।
-ओमवीर सिंह, एसपी सिटी मथुरा