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वकील न्यायिक कार्य से रहे विरत, किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Fri, 21 Apr 2017 11:26 PM IST
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प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एडवोकेट एक्ट में विधि आयोग के प्रस्तावित संशोधन से वकीलों में आक्रोश व्याप्त है। बार काउंसिल आफ इंडिया के आह्वान पर शुक्रवार को जिले भर में वकीलों ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर विरोध जताया। साथ ही सरकार के प्रस्तावित संशोधन के विरोध में कोर्ट की शरण लेने का भी निर्णय लिया गया।
मैनपुरी बार एसोसिएशन के सभाकक्ष में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा विधि आयोग एडवोकेट एक्ट में संशोधन करके वकीलों के हितों पर कुठाराघात कर रहा है। बार काउंसिल ही वकीलों की सबसे अहम संस्था है। जरूरत पड़ी तो बार काउंसिल कोर्ट की शरण लेगी। बैठक में अध्यक्ष रवींद्र सिंह यादव, चंद्रभान सिंह यादव, वेदप्रकाश यादव, सुरेश यादव, सौरभ यादव, धर्मवीर सिंह यादव, विनीता सिंह भदौरिया, रीता नैयर, महेंद्र प्रताप सिंह, प्रतिवेद लोधी, तरुण कुमार गौतम, दीपेश कुमार, कौशल किशोर शाक्य, अनिल चौहान आदि मौजूद थे। बैठक के बाद वकीलों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन के विरोध में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। बार काउंसिल के आह्वान पर कलक्ट्रेट, भोगांव, किशनी, करहल में भी वकीलों ने बैठक करने के बाद न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर एकजुटता का परिचय दिया।
विधि आयोग के प्रस्तावित संशोधन
- काम में लापरवाही, अनुशासन तोड़ने पर वकीलों पर कार्रवाई होगी।
- वकीलों को उपभोक्ता आयोग द्वारा तय नियमों के मुताबिक वादकारियों को हर्जाना देना होगा।
- न्यायिक अधिकारी लापरवाही तथा अनुशासनहीनता पर वकील का लाइसेंस रद्द कर सकेंगे।
- हड़ताल करने पर कार्रवाई अथवा जुर्माना हो सकता है।
- राज्य बार काउंसिल में आधे से ज्यादा सदस्य हाईकोर्ट द्वारा नामित किए जाएंगे जिनमें डाक्टर, इंजीनियर, बिजनेसमैन शामिल होंगे।
- बार काउंसिल आफ इंडिया सदस्य के लिए कोई चुनाव नहीं होगा।
विधि आयोग द्वारा प्रस्तावित संशोधन का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। वकील के पंजीकरण तथा कार्रवाई करने का अधिकार बार काउंसिल के पास है। सरकार इस संस्था पर भी कब्जा करना चाहती है। वकील इसका विरोध करेंगे।
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- रवींद्र सिंह यादव, अध्यक्ष, मैनपुरी बार एसोसिएशन
विधि आयोग जिस तरह संशोधन करना चाहता है उससे वकीलों की संस्थाएं ऐसे लोगों के नियंत्रण में आ जाएंगी जिनका वकालत से कोई संबंध नहीं है। उनके अधीन कार्य करने में वकीलों को परेशानी होगी और उनके अधिकारों का हनन होगा।
- आशुतोष पांडेय, पूर्व अध्यक्ष, मैनपुरी बार एसोसिएशन
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मैनपुरी बार एसोसिएशन के सभाकक्ष में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा विधि आयोग एडवोकेट एक्ट में संशोधन करके वकीलों के हितों पर कुठाराघात कर रहा है। बार काउंसिल ही वकीलों की सबसे अहम संस्था है। जरूरत पड़ी तो बार काउंसिल कोर्ट की शरण लेगी। बैठक में अध्यक्ष रवींद्र सिंह यादव, चंद्रभान सिंह यादव, वेदप्रकाश यादव, सुरेश यादव, सौरभ यादव, धर्मवीर सिंह यादव, विनीता सिंह भदौरिया, रीता नैयर, महेंद्र प्रताप सिंह, प्रतिवेद लोधी, तरुण कुमार गौतम, दीपेश कुमार, कौशल किशोर शाक्य, अनिल चौहान आदि मौजूद थे। बैठक के बाद वकीलों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन के विरोध में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। बार काउंसिल के आह्वान पर कलक्ट्रेट, भोगांव, किशनी, करहल में भी वकीलों ने बैठक करने के बाद न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर एकजुटता का परिचय दिया।
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विधि आयोग के प्रस्तावित संशोधन
- काम में लापरवाही, अनुशासन तोड़ने पर वकीलों पर कार्रवाई होगी।
- वकीलों को उपभोक्ता आयोग द्वारा तय नियमों के मुताबिक वादकारियों को हर्जाना देना होगा।
- न्यायिक अधिकारी लापरवाही तथा अनुशासनहीनता पर वकील का लाइसेंस रद्द कर सकेंगे।
- हड़ताल करने पर कार्रवाई अथवा जुर्माना हो सकता है।
- राज्य बार काउंसिल में आधे से ज्यादा सदस्य हाईकोर्ट द्वारा नामित किए जाएंगे जिनमें डाक्टर, इंजीनियर, बिजनेसमैन शामिल होंगे।
- बार काउंसिल आफ इंडिया सदस्य के लिए कोई चुनाव नहीं होगा।
विधि आयोग द्वारा प्रस्तावित संशोधन का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। वकील के पंजीकरण तथा कार्रवाई करने का अधिकार बार काउंसिल के पास है। सरकार इस संस्था पर भी कब्जा करना चाहती है। वकील इसका विरोध करेंगे।
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- रवींद्र सिंह यादव, अध्यक्ष, मैनपुरी बार एसोसिएशन
विधि आयोग जिस तरह संशोधन करना चाहता है उससे वकीलों की संस्थाएं ऐसे लोगों के नियंत्रण में आ जाएंगी जिनका वकालत से कोई संबंध नहीं है। उनके अधीन कार्य करने में वकीलों को परेशानी होगी और उनके अधिकारों का हनन होगा।
- आशुतोष पांडेय, पूर्व अध्यक्ष, मैनपुरी बार एसोसिएशन