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नोटबंदी से सहालग के बाजारों में सुस्ती
अमर उजाला ब्यूरो एटा
Updated Sat, 12 Nov 2016 11:21 PM IST
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नोटबंदी से सहालग के बाजारों में सुस्ती
- फोटो : अमर उजाला
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500 और एक हजार रुपये के नोट बंद होने के चलते सहालग में भी बाजार की चाल सुस्त है। यही कारण है कि दुकानदार हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। चाहे फिर वह सराफा बाजार हो, कपड़ा मार्केट हो या फिर परचून मार्केट। सभी मंडियों में सन्नाटा बना हुआ है। इसके चलते व्यापारियों में निराशा है।
सहालग शुरू होते ही व्यापारियों में आशा जगती है कि शादी समारोह के कारण व्यापार अच्छा होगा और मुनाफा भी होगा। लेकिन इस बार केंद्र सरकार के निर्णय ने व्यापारियों की आशाओं पर पानी फेर दिया है। 500 और 1000 का नोट बंद होने के चलते बाजार में करेंसी नहीं है। बैंक भी इतनी जल्दी पर्याप्त मात्रा में करेंसी बाजार में नहीं भेज पा रही है। इसका परिणाम है कि सहालग शुरू होने के बाद भी बाजार की चाल सुस्त है। अभी तक बाजार में वह रौनक देखने को नहीं मिली है जो वास्तव में होनी चाहिए थी। शहर के प्रमुख बाजार में कपड़ों का शोरूम चलाने वाले विनीत जैन ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्णय के चलते बाजार में बिक्री लगभग शून्य पहुंच गई है। पिछले सहालग में जहां प्रतिदिन 25-30 हजार रुपये की बिक्री होती थी, वहीं इस बार पूरे दिन में बमुश्किल 4-5 हजार रुपये की बिक्री हो रही है। ऐसे में मुनाफा तो दूर रोजाना के खर्चे निकालना मुश्किल हो रहा है। इसी प्रकार परचून की दुकान चलाने वाले निखिल बाबू का कहना है कि सहालग के बाद भी बाजार में वह उछाल नहीं आया है जो आना चाहिए था। सहालग की खरीदारी तो दूर रोजाना की बिक्री भी घटकर दस प्रतिशत रह गई है। इसी प्रकार सराफा बाजार में भी हालात बदतर हैं। यहां भी खरीदार नदारद हैं। सराफा व्यापारी नीरज वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार दस प्रतिशत भी कारोबार नहीं हुआ है। यही कारण है कि सभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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सहालग शुरू होते ही व्यापारियों में आशा जगती है कि शादी समारोह के कारण व्यापार अच्छा होगा और मुनाफा भी होगा। लेकिन इस बार केंद्र सरकार के निर्णय ने व्यापारियों की आशाओं पर पानी फेर दिया है। 500 और 1000 का नोट बंद होने के चलते बाजार में करेंसी नहीं है। बैंक भी इतनी जल्दी पर्याप्त मात्रा में करेंसी बाजार में नहीं भेज पा रही है। इसका परिणाम है कि सहालग शुरू होने के बाद भी बाजार की चाल सुस्त है। अभी तक बाजार में वह रौनक देखने को नहीं मिली है जो वास्तव में होनी चाहिए थी। शहर के प्रमुख बाजार में कपड़ों का शोरूम चलाने वाले विनीत जैन ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्णय के चलते बाजार में बिक्री लगभग शून्य पहुंच गई है। पिछले सहालग में जहां प्रतिदिन 25-30 हजार रुपये की बिक्री होती थी, वहीं इस बार पूरे दिन में बमुश्किल 4-5 हजार रुपये की बिक्री हो रही है। ऐसे में मुनाफा तो दूर रोजाना के खर्चे निकालना मुश्किल हो रहा है। इसी प्रकार परचून की दुकान चलाने वाले निखिल बाबू का कहना है कि सहालग के बाद भी बाजार में वह उछाल नहीं आया है जो आना चाहिए था। सहालग की खरीदारी तो दूर रोजाना की बिक्री भी घटकर दस प्रतिशत रह गई है। इसी प्रकार सराफा बाजार में भी हालात बदतर हैं। यहां भी खरीदार नदारद हैं। सराफा व्यापारी नीरज वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार दस प्रतिशत भी कारोबार नहीं हुआ है। यही कारण है कि सभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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