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हाईवे पर बढ़ रहे हादसे, वजह मौत के कट
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Mon, 06 Mar 2017 11:33 PM IST
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हाईवे से संकेताक और ब्रेकर गायब, कटों की भरमार
- फोटो : अमर उजाला
जिले में कई स्थानों पर खतरनाक मोड़ हैं। जहां पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। कोई संकेतक न होने से हादसों की रोकथाम के प्रयास भी सफल हो रहे हैं। इस वर्ष की शुरुआत से अभी तक विभिन्न हादसों में करीब 45 से अधिक लोग जान गवां चुके हैं। औंछा क्षेत्र के हवेली मोड़ के समीप करीब पांच वर्ष पूर्व हुए हादसे में 27 लोगों की मौत हुई थी।
जिले में पिछले वर्ष हुए सड़क हादसों के आंकडे़ बेहद चौंकाने वाले हैं। जिले में कई डेथ पाइंट हैं। इन पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। इन स्थानों पर अभी तक करीब 45 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं।
डेथ प्वाइंट-1 थाना औंछा क्षेत्र करीब पांच वर्ष पूर्व हवेली मोड़ के समीप डीसीएम और बस की भिड़ंत हो गई थी। हादसे में 27 लोगों की मौत हुई थी। उक्त मोड़ पूर्व में हादसों के लिए चर्चित रहा है।
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डेथ प्वाइंट 2- कुरावली थाना क्षेत्र का गैलानाथ पुल यहां भी सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक हादसों की वजह पुल सकरा होना भी है। साथ ही पुल के किनारे डिवाइडर भी नहीं है। यही वजह है कि अक्सर यहां तेज रफ्तार वाहन एक दूसरे से टकराते हैं।
डेथ प्वाइंट 3- थाना भोगांव क्षेत्र के परतापुर मोड़ को स्थानीय लोग खूनी मोड़ के नाम भी जानते हैं। वहां भी अक्सर हादसे होते रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक मोड़ पर कोई संकेतक नहीं है वहीं कोई ब्रेकर आदि भी नहीं है जिससे वाहन वहां से गुजरते वक्त धीमा हो सके। पूर्व में एक केंद्रीय मंत्री के काफिले में शामिल गाड़ियों में हुई भिडंत में चार लोगों की मौत हो चुकी है।
डेथ प्वाइंट 4- थाना किशनी क्षेत्र प्राइवेट बस स्टैंड तिराहा पर भी आए दिन हादसे होते रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक घनी आबादी के बीच कोई ब्रेकर न होने से हमेशा खतरा बना रहता है।
डेथ प्वाइंट 5- थाना कोतवाली क्षेत्र का नगला कवर से गांव सिकंदरपुर जाने वाला मार्ग भी हादसों के लिए जाता है। अंधे मार्ग पर कोई संकेतक, ब्रेकर और सड़क किनारे बैरियर न होने से अक्सर हादसे होते हैं।
डेथ प्वाइंट 6- आगरा रोड बाईपास उक्त स्थान पर बीते सप्ताह डग्गामार बस ने बाइक सवार पांच लोगों को रौंद दिया था। हादसे में दो मासूमों की मौत हो गई थी। वहीं दंपति सहित एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया था।
-नेशनल हाईवे पर जो डार्क पाइंट हैं उन पर संकेतक लगाने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों को पत्र लिख दिया गया है। शीघ्र ही रिमांडर भेजा जाएगा।
-सुनील कुमार सक्सेना, एसपी
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जिले में पिछले वर्ष हुए सड़क हादसों के आंकडे़ बेहद चौंकाने वाले हैं। जिले में कई डेथ पाइंट हैं। इन पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। इन स्थानों पर अभी तक करीब 45 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं।
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डेथ प्वाइंट-1 थाना औंछा क्षेत्र करीब पांच वर्ष पूर्व हवेली मोड़ के समीप डीसीएम और बस की भिड़ंत हो गई थी। हादसे में 27 लोगों की मौत हुई थी। उक्त मोड़ पूर्व में हादसों के लिए चर्चित रहा है।
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डेथ प्वाइंट 2- कुरावली थाना क्षेत्र का गैलानाथ पुल यहां भी सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक हादसों की वजह पुल सकरा होना भी है। साथ ही पुल के किनारे डिवाइडर भी नहीं है। यही वजह है कि अक्सर यहां तेज रफ्तार वाहन एक दूसरे से टकराते हैं।
डेथ प्वाइंट 3- थाना भोगांव क्षेत्र के परतापुर मोड़ को स्थानीय लोग खूनी मोड़ के नाम भी जानते हैं। वहां भी अक्सर हादसे होते रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक मोड़ पर कोई संकेतक नहीं है वहीं कोई ब्रेकर आदि भी नहीं है जिससे वाहन वहां से गुजरते वक्त धीमा हो सके। पूर्व में एक केंद्रीय मंत्री के काफिले में शामिल गाड़ियों में हुई भिडंत में चार लोगों की मौत हो चुकी है।
डेथ प्वाइंट 4- थाना किशनी क्षेत्र प्राइवेट बस स्टैंड तिराहा पर भी आए दिन हादसे होते रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक घनी आबादी के बीच कोई ब्रेकर न होने से हमेशा खतरा बना रहता है।
डेथ प्वाइंट 5- थाना कोतवाली क्षेत्र का नगला कवर से गांव सिकंदरपुर जाने वाला मार्ग भी हादसों के लिए जाता है। अंधे मार्ग पर कोई संकेतक, ब्रेकर और सड़क किनारे बैरियर न होने से अक्सर हादसे होते हैं।
डेथ प्वाइंट 6- आगरा रोड बाईपास उक्त स्थान पर बीते सप्ताह डग्गामार बस ने बाइक सवार पांच लोगों को रौंद दिया था। हादसे में दो मासूमों की मौत हो गई थी। वहीं दंपति सहित एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया था।
-नेशनल हाईवे पर जो डार्क पाइंट हैं उन पर संकेतक लगाने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों को पत्र लिख दिया गया है। शीघ्र ही रिमांडर भेजा जाएगा।
-सुनील कुमार सक्सेना, एसपी