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एआरटीओ कार्यालय में फिर दलालों का राज
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sat, 06 Aug 2016 12:01 AM IST
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एआरटीओ कार्यालय में फिर दलालों का राज
- फोटो : अमर उजाला
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कलक्ट्रेट परिसर स्थित एआरटीओ कार्यालय में एक बार फिर दलालों का राज हो गया है। नवागत एआरटीओ के बिना जानकारी के करीब 10 से अधिक यकारी कार्यालय में सरकारी कामकाज निपटा रहे हैं। विभाग में मात्र तीन बाबू और एक चपरासी की आधिकारिक नियुक्ति है। बावजूद इसके कार्यालय में दर्जनों दलालों की सक्रियता के चलते रोजाना आवेदकों की जेब कट रही है।
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन डीएम लोकेश एम की ओर से पूर्व में एआरटीओ कार्यालय में छापामार कार्रवाई कर दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी। इसके बाद कई बार दलालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की गईं। उक्त कार्रवाईयों के खौफ में कुछ दिनों तक तो दलाल सहमे रहे लेकिन डीएम का तबादला होते ही एक बार फिर से कार्यालय में दलालों की सक्रियता तेज हो गई है। कार्यालय के बाहर सक्रिय दलालों के अलावा भी बिना विभागीय जानकारी कई युवक सरकारी कार्यों को निपटा रहे हैं। आवेदकों के फार्म लेना, फोटो खींचना, सरकारी अभिलेखों की जांच आदि काम किए जा रहे हैं। जबकि नवागत एआरएम को इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। उन्हें तो तीन बाबू और एक चपरासी के बारे में ही जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख किस किस के हाथों से होकर गुजर रहे हैं। इसकी जानकारी उन्हें नहीं हैं। कार्यालय में परिसर से लेकर कार्यालय के अंदर तक दलाल सक्रिय हैं ये लोग आवेदकों से मनमानी फीस वसूल कर जेब काटने का काम कर रहे हैं। लेकिन जनता की सुनने के लिए न तो विभागीय अधिकारी और न हीं प्रशासनिक अमले
कार्यालय में तीन बाबू और एक चपरासी है। दलालों की सक्रियता के बारे में जानकारी हुई है। विभाग में संविदा पर कर्मचारी नहीं रखे जाते। विभाग में कौन कौन काम कर रहा है यह संज्ञान में नहीं है।
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- डाक्टर दिलीप कुमार गुप्ता, एआरटीओ
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उल्लेखनीय है कि तत्कालीन डीएम लोकेश एम की ओर से पूर्व में एआरटीओ कार्यालय में छापामार कार्रवाई कर दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी। इसके बाद कई बार दलालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की गईं। उक्त कार्रवाईयों के खौफ में कुछ दिनों तक तो दलाल सहमे रहे लेकिन डीएम का तबादला होते ही एक बार फिर से कार्यालय में दलालों की सक्रियता तेज हो गई है। कार्यालय के बाहर सक्रिय दलालों के अलावा भी बिना विभागीय जानकारी कई युवक सरकारी कार्यों को निपटा रहे हैं। आवेदकों के फार्म लेना, फोटो खींचना, सरकारी अभिलेखों की जांच आदि काम किए जा रहे हैं। जबकि नवागत एआरएम को इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। उन्हें तो तीन बाबू और एक चपरासी के बारे में ही जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख किस किस के हाथों से होकर गुजर रहे हैं। इसकी जानकारी उन्हें नहीं हैं। कार्यालय में परिसर से लेकर कार्यालय के अंदर तक दलाल सक्रिय हैं ये लोग आवेदकों से मनमानी फीस वसूल कर जेब काटने का काम कर रहे हैं। लेकिन जनता की सुनने के लिए न तो विभागीय अधिकारी और न हीं प्रशासनिक अमले
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कार्यालय में तीन बाबू और एक चपरासी है। दलालों की सक्रियता के बारे में जानकारी हुई है। विभाग में संविदा पर कर्मचारी नहीं रखे जाते। विभाग में कौन कौन काम कर रहा है यह संज्ञान में नहीं है।
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- डाक्टर दिलीप कुमार गुप्ता, एआरटीओ