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गलन भरी सर्दी ने किया हाल बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Thu, 08 Dec 2016 11:39 PM IST
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गलन भरी सर्दी ने किया हाल बेहाल
- फोटो : अमर उजाला
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कोहरा और ठंडी हवाओं ने सर्दी बढ़ा दी है। 12 डिग्री न्यूनतम तापमान के साथ काफी ठंडा दिन रहा। सुबह से शीतलहर और गलन ने कंपकंपी छुड़ा दी। दिनभर कोहरा छाया रहा और सूर्य देव के दर्शन नहीं हुए।
गुरुवार सुबह कोहरा छाया रहने से सड़कों पर दृश्यता कम रही, जिसका असर यातायात पर भी पड़ा। दिन के उजाले में भी वाहन चालक हेडलाइट जलाकर सड़कों से गुजरते रहे। कोहरे के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। दिनभर कोहरा छाए रहने से सूर्यदेव के दर्शन भी न हो सके। धूप न निकलने से गलन भरी सर्द हवाएं लोगों को परेशान करती रहीं। शाम होते ही फिर से कोहरा छाने लगा और शीतलहर तेज हो गई।
ठंड का असर अब सेहत पर भी पड़ने लगा है। गुरुवार को उल्टी, दस्त, डायरिया और बुखार के 104 मरीज जिला चिकित्सालय पहुंचे। स्थिति में सुधार होने पर इमरजेंसी से दो मरीजों को अन्य स्थानों पर रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के साथ दवाओं का भी अभाव है। सामान्य बुखार की दवा भी मुश्किल से मिल रहा है। मरीजों की भीड़ होने के कारण चिकित्सक भी सही तरीके से उपचार नहीं दे पा रहे हैं।
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पशुओं के लिए बढ़ी परेशानी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. योगेश कुमार सारस्वत का कहना है कि सीधे शीतलहर के संपर्क में रहने से पशु निमोनिया के शिकार हो जाते हैं। पशु जिस स्थान पर बांधे जाते हैं, वहां पर हवा रोकने के इंतजाम करना चाहिए। ज्यादा ठंड पड़ने पर अलाव की व्यवस्था भी जरूरी है।
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गुरुवार सुबह कोहरा छाया रहने से सड़कों पर दृश्यता कम रही, जिसका असर यातायात पर भी पड़ा। दिन के उजाले में भी वाहन चालक हेडलाइट जलाकर सड़कों से गुजरते रहे। कोहरे के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। दिनभर कोहरा छाए रहने से सूर्यदेव के दर्शन भी न हो सके। धूप न निकलने से गलन भरी सर्द हवाएं लोगों को परेशान करती रहीं। शाम होते ही फिर से कोहरा छाने लगा और शीतलहर तेज हो गई।
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ठंड का असर अब सेहत पर भी पड़ने लगा है। गुरुवार को उल्टी, दस्त, डायरिया और बुखार के 104 मरीज जिला चिकित्सालय पहुंचे। स्थिति में सुधार होने पर इमरजेंसी से दो मरीजों को अन्य स्थानों पर रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के साथ दवाओं का भी अभाव है। सामान्य बुखार की दवा भी मुश्किल से मिल रहा है। मरीजों की भीड़ होने के कारण चिकित्सक भी सही तरीके से उपचार नहीं दे पा रहे हैं।
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पशुओं के लिए बढ़ी परेशानी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. योगेश कुमार सारस्वत का कहना है कि सीधे शीतलहर के संपर्क में रहने से पशु निमोनिया के शिकार हो जाते हैं। पशु जिस स्थान पर बांधे जाते हैं, वहां पर हवा रोकने के इंतजाम करना चाहिए। ज्यादा ठंड पड़ने पर अलाव की व्यवस्था भी जरूरी है।