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आलू के दाम गिरने से किसान परेशान
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sat, 11 Feb 2017 11:43 PM IST
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आलू के दाम गिरने से किसान परेशान
- फोटो : अमर उजाला
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आलू की पैदावार में हुए इजाफे से इस बार आलू के दाम बहुत नीचे आ गए हैं। किसान को आलू का लागत मूल्य निकालने में पसीने छूट रहे हैं। रोजाना मंडी में बहुतायत में आलू लेकर किसान पहुंच रहे हैं। कम दाम पर ही आलू बेचना अब किसानों की मजबूरी बनता जा रहा है।
आलू की खेती में इस बार अच्छी पैदावार हुई है। अच्छी पैदावार होने के कारण मंडी में आलू की बड़ी मात्रा रोजाना पहुंच रही है। मंडी में आलू की अच्छी आवक होने के कारण आलू के दामों में तेजी से गिरावट आई है। अच्छी किस्म का आलू जहां 280 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। वहीं सामान्य तौर पर मंडी से आलू 250 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचा जा रहा है। दो माह पूर्व नोटबंदी की मार से जूझ चुके किसान को अब आलू की गिरी कीमतों ने परेशान कर दिया है। बाजार में फुटकर रूप से आलू पांच से सात रुपये किलो तक बेचा जा रहा है। मंडी में मिलने वाले कम दाम पर ही आलू बेचना किसानों की मजबूरी बनता जा रहा है।
किसान राधाकृष्ण मिश्रा का कहना है आलू की बंपर पैदावार ने इस बार किसान की कमर ही तोड़ दी है। किसान को उसकी उपज का लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा है। अन्नदाता कहे जाने वाले किसान की सुनने वाला कोई नहीं है। किसान ओमप्रकाश यादव का कहना है जब हर माल के उत्पादक अपने उत्पाद का मूल्य खुद निर्धारित करते हैं तो किसान को भी उसकी उपज का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार मिलना ही चाहिए। फसल किसान पैदा करता है जबकि मूल्य दूसरे लोग निर्धारित करते हैं।
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आलू की खेती में इस बार अच्छी पैदावार हुई है। अच्छी पैदावार होने के कारण मंडी में आलू की बड़ी मात्रा रोजाना पहुंच रही है। मंडी में आलू की अच्छी आवक होने के कारण आलू के दामों में तेजी से गिरावट आई है। अच्छी किस्म का आलू जहां 280 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। वहीं सामान्य तौर पर मंडी से आलू 250 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचा जा रहा है। दो माह पूर्व नोटबंदी की मार से जूझ चुके किसान को अब आलू की गिरी कीमतों ने परेशान कर दिया है। बाजार में फुटकर रूप से आलू पांच से सात रुपये किलो तक बेचा जा रहा है। मंडी में मिलने वाले कम दाम पर ही आलू बेचना किसानों की मजबूरी बनता जा रहा है।
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किसान राधाकृष्ण मिश्रा का कहना है आलू की बंपर पैदावार ने इस बार किसान की कमर ही तोड़ दी है। किसान को उसकी उपज का लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा है। अन्नदाता कहे जाने वाले किसान की सुनने वाला कोई नहीं है। किसान ओमप्रकाश यादव का कहना है जब हर माल के उत्पादक अपने उत्पाद का मूल्य खुद निर्धारित करते हैं तो किसान को भी उसकी उपज का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार मिलना ही चाहिए। फसल किसान पैदा करता है जबकि मूल्य दूसरे लोग निर्धारित करते हैं।
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