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नोटबंदी: जमा हुए 800 करोड़, बांटे महज चार सौ करोड़

Thu, 08 Dec 2016 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी Updated Thu, 08 Dec 2016 11:38 PM IST
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Notbandi: accumulated 800 million, distributed four hundred million
नोटबंदी: जमा हुए 800 करोड़, बांटे महज चार सौ करोड़ - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के एक माह में ही जिले में जितना पैसा जमा हुआ उसके मुकाबले वितरण आधा ही हुआ। यही कारण है कि अभी तक लोगों को नकदी की कमी से जूझना पड़ रहा है। यही नहीं जिलेभर में लगभग 30 करोड़ रुपये की करेंसी बदली गई।
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उल्लेखनीय है कि आठ नवंबर को केंद्र सरकार ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद कर दिए थे। इसके बाद से बाजार में कैश की जबरदस्त किल्लत शुरू हो गई थी। इस एक माह में जिलेभर में लोगों ने लगभग 800 करोड़ रुपये अपने खातों में जमा कराए। इनमें से नाम मात्र के लिए ही पैसा अन्य वजहों से जमा हुआ। अधिकांश राशि बंद हुए 500 और 1000 रुपये के नोटों के रूप में थी। वहीं जिले में एक माह में लगभग 30 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले गए। इसके सापेक्ष जिलेभर में लोगों को चार सौ करोड़ रुपये वितरित किए गए। इनमें से 200 करोड़ रुपये की नई करेंसी थी वहीं शेष 200 करोड़ रुपये की राशि पुराने नोटों के रूप में थी। इसके अलावा अभी भी खातों में पुरानी करेंसी जमा की जा रही है।
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इस संबंध में एलडीएम डीके अग्रवाल ने बताया कि अब पेट्रोल पंपों पर पुरानी करेंसी का चलन बंद हो गया है। इसके चलते अब बैंकों पर कैश की उपलब्धता बढ़ जाएगी। कारण एक पेट्रोल पंप से प्रतिदिन लगभग तीन लाख रुपये का कैश आता है। जो कि कैश वितरण में काफी सहायक है।
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बड़े व्यापारियों ने किए इंतजाम, छोटे परेशान
नोटबंदी के बाद बड़े व्यापारियों ने तो कुछ ही दिन में तमाम इंतजाम कर लिए। इनमें ई पेमेंट लेने से लेकर माइक्रो एटीएम तक की व्यवस्था करना शामिल है। लेकिन असली परेशानी छोटे व्यापारियों और फड़ लगाने वालों को हुई। उक्त लोग अभी तक भुगतान की व्यवस्था नहीं कर सके हैं। यही कारण है कि उन्हें अभी तक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बैनामा कराने वालों की संख्या हुई आधी
नोटबंदी के बाद शहर से लेकर देहात तक बैनामा कराने वालों की संख्या आधी भी नहीं रही है। इसके चलते निबंधन कार्यालय को काफी तगड़ा झटका लगा है। निबंधन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार अक्तूबर में जहां जिले भर में बैनामों से 423 करोड़ रुपये की आय हुई थी वहीं नवंबर में घटकर यह 261 करोड़ रुपये ही रह गई। इसी प्रकार अक्तूबर में जहां 1213 बैनामे हुए थे वहीं नवंबर में इनकी संख्या घटकर मात्र 761 रह गई। इस प्रकार नोट बंदी के बाद जमीन की खरीद फरोख्त में खासी गिरावट दर्ज की गई है।

खुफिया विभाग को लगाया सरकार ने
कैश की समस्या का हल न निकलता देख केंद्र सरकार भी सकते में है। यही कारण है कि बैंक मैनेजरों और अन्य अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को निर्देश जारी किए हैं। खुफिया विभाग के सूत्रों के अनुसार केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों ने जिले में सुबह सभी एटीएम की रिपोर्ट तैयार की है। इसमें किस बैंक के एटीएम में पैसा है या नहीं या फिर कब से पैसा नहीं है इसकी जानकारी उन्होंने ली है। बताया जाता है कि उक्त रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

बैंकों पर टंगे नो कैश के बोर्ड
 गुरुवार से लेकर देहात तक सरकारी और निजी बैंकों की दर्जनों शाखाओं पर दोपहर से ही नो कैश के बोर्ड टंग गए। ग्रामीण बैंकों की कई शाखाओं में तो दो दिन से कैश नहीं है। इसके चलते लोगों को खासी परेशानी हो रही है। वहीं अधिकांश एटीएम पर भी नो कैश और आउट आफ सर्विस का बोर्ड लगा हुआ है। ऐसे में सभी यही पूछ रहे हैं कि आखिर आरबीआई से भेजा जा रहा कैश कहां जा रहा है।



एक माह में भी नहीं सुधरे हालात
नोटबंदी के एक माह पूरे होने पर भी नगर के एटीएम शोपीस बने हुए हैं। परेशान लोगों ने जिलाधिकारी से बैंकों में कैश डलवाने की मांग की है।
नगर में विभिन्न बैंकों के लगभग आधा दर्जन एटीएम संचालित हैं। आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के वाद से ही सिर्फ एक एटीएम को छोड़कर सारे एटीएम कैश न होने के कारण बंद पड़े हैं। वहीं एसबीआई की मुख्य शाखा के बाहर स्थित एटीएम भी दो दिनों से कैश न होने के कारण बंद है। एसबीआई के शाखा प्रवंघक अखिलेश चतुर्वेदी का कहना है कि बैंक में कैश अधिक न होने के कारण एटीएम में पैसा नहीं डाला गया है जब कैश आ जाएगा तो एटीएम भी चालू कर दिए जाएंगे।
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