{"_id":"5852d7e74f1c1b0c716498bb","slug":"no-restrictions-will-have-an-overwhelming-impact-manjha","type":"story","status":"publish","title_hn":"मांझा प्रतिबंध से नहीं पडे़गा खास असर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मांझा प्रतिबंध से नहीं पडे़गा खास असर
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Thu, 15 Dec 2016 11:20 PM IST
विज्ञापन
रामपुर में रक्षाबंधन पर आसमान में कम उड़ती दिखी पतंगें।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनजीटी के आदेश पर पूरे देश में मांझा बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिले में भी इसका असर पड़ना तय है। हालांकि विक्रेताओं का कहना है कि इससे व्यापार पर खास असर नहीं पडे़गा। जरूरत हुई तो जीविका के लिए दूसरा रोजगार तलाशेंगे।
जिले में मांझा बनाने का कारोबार नहीं होता लेकिन सीजन आते ही इसकी अच्छी खासी खपत होती है। 15 जनवरी के बाद से ही पतंग और मांझा की बिक्री शुरू हो जाती है। युवा और शौकीन मिजाज लोग पतंगबाजी का लुत्फ उठाते हैं। इस बार एनजीटी ने आदेश जारी कर मांझा बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस प्रतिबंध के बाद नगर के गिने चुने विक्रेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हैं।
नगर के किला बजरिया में पतंग मांझा की दुकान किए बबलू का कहना है कि मांग के मुताबिक वो बरेली से मांझा लेकर आते हैं। इसकी अच्छी खासी बिक्री होती है अगर प्रतिबंध लगता है तो वह इस व्यवसाय को छोड़कर कोई और व्यवसाय करेंगे। करहल रोड पर कई पीढ़ियों से पतंग व्यवसाय में लगे बंटी का कहना है कि घर में पीढ़ियों से यह धंधा हो रहा है। प्रतिवर्ष सीजन में पतंग और बरेली के मांझा की अच्छी खासी बिक्री होती है। प्रतिबंध के बाद अगर माल उपलब्ध नहीं होगा तो निश्चित तौर पर नुकसान होगा।
विज्ञापन
चोरी छिपे बिकेगा मांझा
मैनपुरी। जिले में बरेली से आए मांझा की बिक्री के साथ ही चोरी छिपे भी मांझा बनाया जाता है। कई स्थानों पर सीजन में बल्ब के कांच पीसकर और ट्यूब लाइट को फोड़ने के बाद अंदर भरे कांच के पाउडर से मांझा बनाया जाता है। इस प्रतिबंध के बाद मांझा चोरी छिपे बेचा जाएगा।
विज्ञापन
जिले में मांझा बनाने का कारोबार नहीं होता लेकिन सीजन आते ही इसकी अच्छी खासी खपत होती है। 15 जनवरी के बाद से ही पतंग और मांझा की बिक्री शुरू हो जाती है। युवा और शौकीन मिजाज लोग पतंगबाजी का लुत्फ उठाते हैं। इस बार एनजीटी ने आदेश जारी कर मांझा बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस प्रतिबंध के बाद नगर के गिने चुने विक्रेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हैं।
विज्ञापन
नगर के किला बजरिया में पतंग मांझा की दुकान किए बबलू का कहना है कि मांग के मुताबिक वो बरेली से मांझा लेकर आते हैं। इसकी अच्छी खासी बिक्री होती है अगर प्रतिबंध लगता है तो वह इस व्यवसाय को छोड़कर कोई और व्यवसाय करेंगे। करहल रोड पर कई पीढ़ियों से पतंग व्यवसाय में लगे बंटी का कहना है कि घर में पीढ़ियों से यह धंधा हो रहा है। प्रतिवर्ष सीजन में पतंग और बरेली के मांझा की अच्छी खासी बिक्री होती है। प्रतिबंध के बाद अगर माल उपलब्ध नहीं होगा तो निश्चित तौर पर नुकसान होगा।
विज्ञापन
चोरी छिपे बिकेगा मांझा
मैनपुरी। जिले में बरेली से आए मांझा की बिक्री के साथ ही चोरी छिपे भी मांझा बनाया जाता है। कई स्थानों पर सीजन में बल्ब के कांच पीसकर और ट्यूब लाइट को फोड़ने के बाद अंदर भरे कांच के पाउडर से मांझा बनाया जाता है। इस प्रतिबंध के बाद मांझा चोरी छिपे बेचा जाएगा।