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आदर्श गांव: 9 साल में दत्तक से हो गए लावारिस
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मैनपुरी। वर्ष 2017 में शासन के निर्देश पर ग्रामीण विकास के लिए अधिकारियों ने गांवों को गोद लिया था। पांच साल तो गांव की दशा सुधारने के लिए काम हुआ। इन 9 साल में यह गांव दत्तक से लावारिस हो चुके हैं और बदहाली की मिसाल बनते जा रहे हैं।
9 साल पहले जिले के अधिकारियों ने 26 गांव गोद लिए थे। इन गांवों में बिजली, पानी, सड़क, स्वच्छता आदि से संबंधित विकास कार्य होने थे। जब अधिकारियों ने इन गांवों को गोद लिया था तब विकास के सपने देखे गए थे। अब ये सपने बिखर गए हैं।इन गांवों की सड़कें टूटी हैं, पानी की व्यवस्था चरमरा गई है और ग्रामीणों का भरोसा सरकारी योजनाओं से उठ गया है। अब इन गांव की व्यवस्था केवल ग्राम पंचायत तक सीमित रह गई है।
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दृश्य नंबर-एक
बदहाल है परियोजना निदेशक का गांव सिकंदरपुर
गांव सिकंदरपुर को परियोजना निदेशक ने गोद लिया था। यहां कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। कई जगह लोगों के पहुंचने तक का रास्ता नहीं बचा है। सफाई के लिए कर्मचारी नहीं आता है इसलिए यहां आए दिन जलभराव हो जाता है। लोगों ने सड़क पर ही नालियां खोद रखी हैं।
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हमने सोचा था अब बड़े अधिकारी हैं तो विकास होगा, लेकिन न तो वो आए और न ही विकास हुआ। आज गांव के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। अधिकारियों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
इब्राहिम, सिकंदरपुर
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गांव 2017 में गोद लिया गया था 2024 तक गांव में विकास होने थे कुछ काम हुए लेकिन कई काम ऐसे थे जो आज भी पूरे नहीं हो सके। पिछले तीन साल से यहां कोई अधिकारी ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने नहीं पहुंचा है।
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राशिद अली सिकंदरपुर
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सीडीओ का गोद लिया गांव था कुचेला
सीडीओ ने कुचेला गांव को गोद लिया था। गलियां बनवाई गईं, लेकिन अब मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह से उखड़ चुका है। नालियों की सफाई समय से नहीं होती है। कई जगह कच्ची गलियां हैं जो जलभराव का कारण बनती हैं।
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गांव में विकास के नाम पर खानापूरी है। बरसात के दिनों में गांव पहुंचने तक में दिक्कत होती है। गांव के संपर्क मार्ग के साथ कई गलियां भी बदहाल हैं। अधिकारी और जन प्रतिनिधि कोई सुध लेने वाला नहीं है।
प्रहलाद, कुचेला
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गांव का संपर्क मार्ग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। गांव के लोगों को आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
नीतू मिश्रा, कुचेला
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इन गांव को लिया था अधिकारियों ने गोद
गांव ईकरी, बढेरी जिलाधिकारी मैनपुरी, किशनी क्षेत्र के ग्राम समान और पतारा डीएम, शमशेरगंज और कुचेला सीडीओ ने गोद लिए हैं। डीपीआरओ ने रठेह, भदेही, एसीएमओ प्रतिरक्षण ने नाकऊ, कुर्रा जरावन, एसीएमओ एनआरएचएम ने साहब रामपुर, असरोही, डीएओ ने विनायकपुर, किरथुआ, पीडी ने शिवसिंह, सिकंदरपुर, डीएचटीओ ने नवीगंज, बरौली, सीवीओ ने आलीपुर पट्टी, गोविंदेपुर, समाज कल्याण अधिकारी ने शिवसिंहपुर, सलेमपुर पढ़ीना, डीपीओ ने देवीनगर, रोशिंगपुर, एई एमआई ने आठपुरा और तिमनपुर आदि गांव गोद लिए थे।-- -
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वर्ष 2017 में सरकार की योजनाओं को संबंधित गांव में पहुंचाने के लिए गांवों को गोद लिया गया था। तत्कालीन अधिकारियों ने योजना के तहत कार्य कराए। वर्तमान में इस प्रकार की कोई योजना चालू नहीं है। सरकार की ओर से अधिकारी गांव गोद लें, ऐसी कोई योजना नहीं है। गांव में विकास की जिम्मेदारी पंचायतों को दी गई है।
अंजनी कुमार सिंह, जिलाधिकारी
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9 साल पहले जिले के अधिकारियों ने 26 गांव गोद लिए थे। इन गांवों में बिजली, पानी, सड़क, स्वच्छता आदि से संबंधित विकास कार्य होने थे। जब अधिकारियों ने इन गांवों को गोद लिया था तब विकास के सपने देखे गए थे। अब ये सपने बिखर गए हैं।इन गांवों की सड़कें टूटी हैं, पानी की व्यवस्था चरमरा गई है और ग्रामीणों का भरोसा सरकारी योजनाओं से उठ गया है। अब इन गांव की व्यवस्था केवल ग्राम पंचायत तक सीमित रह गई है।
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बदहाल है परियोजना निदेशक का गांव सिकंदरपुर
गांव सिकंदरपुर को परियोजना निदेशक ने गोद लिया था। यहां कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। कई जगह लोगों के पहुंचने तक का रास्ता नहीं बचा है। सफाई के लिए कर्मचारी नहीं आता है इसलिए यहां आए दिन जलभराव हो जाता है। लोगों ने सड़क पर ही नालियां खोद रखी हैं।
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हमने सोचा था अब बड़े अधिकारी हैं तो विकास होगा, लेकिन न तो वो आए और न ही विकास हुआ। आज गांव के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। अधिकारियों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
इब्राहिम, सिकंदरपुर
गांव 2017 में गोद लिया गया था 2024 तक गांव में विकास होने थे कुछ काम हुए लेकिन कई काम ऐसे थे जो आज भी पूरे नहीं हो सके। पिछले तीन साल से यहां कोई अधिकारी ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने नहीं पहुंचा है।
राशिद अली सिकंदरपुर
सीडीओ का गोद लिया गांव था कुचेला
सीडीओ ने कुचेला गांव को गोद लिया था। गलियां बनवाई गईं, लेकिन अब मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह से उखड़ चुका है। नालियों की सफाई समय से नहीं होती है। कई जगह कच्ची गलियां हैं जो जलभराव का कारण बनती हैं।
गांव में विकास के नाम पर खानापूरी है। बरसात के दिनों में गांव पहुंचने तक में दिक्कत होती है। गांव के संपर्क मार्ग के साथ कई गलियां भी बदहाल हैं। अधिकारी और जन प्रतिनिधि कोई सुध लेने वाला नहीं है।
प्रहलाद, कुचेला
गांव का संपर्क मार्ग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। गांव के लोगों को आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
नीतू मिश्रा, कुचेला
इन गांव को लिया था अधिकारियों ने गोद
गांव ईकरी, बढेरी जिलाधिकारी मैनपुरी, किशनी क्षेत्र के ग्राम समान और पतारा डीएम, शमशेरगंज और कुचेला सीडीओ ने गोद लिए हैं। डीपीआरओ ने रठेह, भदेही, एसीएमओ प्रतिरक्षण ने नाकऊ, कुर्रा जरावन, एसीएमओ एनआरएचएम ने साहब रामपुर, असरोही, डीएओ ने विनायकपुर, किरथुआ, पीडी ने शिवसिंह, सिकंदरपुर, डीएचटीओ ने नवीगंज, बरौली, सीवीओ ने आलीपुर पट्टी, गोविंदेपुर, समाज कल्याण अधिकारी ने शिवसिंहपुर, सलेमपुर पढ़ीना, डीपीओ ने देवीनगर, रोशिंगपुर, एई एमआई ने आठपुरा और तिमनपुर आदि गांव गोद लिए थे।
वर्ष 2017 में सरकार की योजनाओं को संबंधित गांव में पहुंचाने के लिए गांवों को गोद लिया गया था। तत्कालीन अधिकारियों ने योजना के तहत कार्य कराए। वर्तमान में इस प्रकार की कोई योजना चालू नहीं है। सरकार की ओर से अधिकारी गांव गोद लें, ऐसी कोई योजना नहीं है। गांव में विकास की जिम्मेदारी पंचायतों को दी गई है।
अंजनी कुमार सिंह, जिलाधिकारी