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Mainpuri News: बीपी और शुगर कंट्रोल में रखें, नहीं तो किडनी हो सकती है खराब
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फोटो 3 जिला अस्पातल में संचालित डायलिसिस यूनिट में भर्ती मरीज। संवाद
- फोटो : कारीकोट के जमुनिहा गांव हाथी के उत्पात में बर्बाद हुई फसल।
मैनपुरी। यदि आप चाहते हैं कि आपको किड़नी की किसी खतरनाक बीमारी का सामना न करना पड़े तो आपको अपना ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखना होगा। जिले में अनियमित ब्लड प्रेशर और दूषित खान-पान के चलते किडनी की समस्या के मरीज बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल में संचालित किडनी केयर सेंटर के रिकाॅर्ड पर यदि नजर डाली जाए तो जिले में हर साल डायलिसिस कराने वाले लोगों की संख्या दो हजार से अधिक बढ़ जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो ब्लड प्रेशर की समस्या और धूम्रपान करने वाले लोगों की किडनी जल्द प्रभावित होती है। दूषित खान-पान और डॉक्टर की सलाह के बिना दर्द निवारक दवाइयां भी किडनी को नुकसान पहुंचाने का कारण बन रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्लड प्रेशर (बीपी) और शुगर का नियंत्रित रहना बहुत जरूरी है। अगर किसी का शुगर ज्यादा है और बीपी भी बढ़ रहा है तो इससे किडनी के खराब होने का खतरा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 80 से 90 मरीज किडनी संबंधी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इन मरीजों में 45 से 50 लोगों की उम्र 40 से 50 साल के बीच हैं। 10 से 20 साल के मरीज भी किडनी की समस्या लेकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल में शासन के सहयोग से 11 जून 2022 को पीपीपी मॉडल पर दीप चंद्र डायलिसिस सेंटर का संचालन किया जा रहा है। यहां के मैनेजर नागेंद्र प्रताप बताते हैं कि डायलिसिस यूनिट में प्रतिवर्ष डायलिसिस कराने वाले लोगों की संख्या लगभग दो हजार बढ़ जाती है। वर्तमान में यहां 105 मरीज डायलिसिस का लाभ ले रहे हैं। इनमें 65 पुरुष और 40 महिलाएं शामिल हैं। उनका कहना है कि डीसीडीसी पर निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था है। यहां कुल 13 बेड उपलब्ध हैं। यहां तीन पालियों में प्रतिदिन सुबह सात बजे से रात 10 बजे तक डायलिसिस की जाती है।
डायलिसिस कराने वाले 50 प्रतिशत मधुमेह रोगी
वरिष्ठ सर्जन डॉ. गौरव पारिक का कहना है कि किडनी की बीमारी साल दर साल बढ़ती जा रही है। ओपीडी में आने वाले 400 मरीजों में आधे से अधिक की जांच में बीपी और मधुमेह अनियंत्रित मिलता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला अस्पताल में डायलिसिस कराने वालों में 50 प्रतिशत मधुमेह रोगी हैं।
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खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
सीएमओ डॉ.आरसी गुप्ता के अनुसार किडनी में पथरी की समस्या भी बढ़ती जा रही है। इसमें 15 से 20 साल से लेकर 30 से 50 साल तक के मरीज आ रहे हैं। इसकी वजह अनियमित जीवन शैली के साथ ही सही तरीके का खानपान न होना है। मरीजों को जांच, इलाज के साथ ही सही आहार लेने की सलाह दी जाती है।
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पंचकर्म चिकित्सा राहत दिलाने में सहायक
आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ.देवेंद्र कुमार का कहना है कि दर्द निवारक दवाइयों का अधिक प्रयोग, पानी की कमी, बीपी अनियंत्रित होना किडनी की बीमारी को बढ़ावा देने के प्रमुख कारण है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति इस बीमारी के निदान में सहायक है। पंचकर्म चिकित्सा से इसका इलाज किया जाता है।
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बचाव के उपाय
- बीपी और शुगर पर नियंत्रण रखें। इसकी नियमित जांच कराते रहें।
- दिन में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए।
- नारियल पानी पीना चाहिए। इसमें पौटैशियम, मैग्निशयम ज्यादा होता है, जो पथरी बनने से रोकता है।
- दाल, ओट्स का सेवन करना चाहिए, इसमें पथरी रोधक गुण होते हैं।
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डायलिसिस यूनिट पर अब तक डायलिसिस कराने वाले लोग वर्ष बार
2022 में 11 जून से 31 दिसंबर तक- 2807
2023- 7044
2024- 9106
2025- 11014
2026 जनवरी - 1002
2026 फरवरी - 907
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जिला अस्पताल में शासन के सहयोग से 11 जून 2022 को पीपीपी मॉडल पर दीप चंद्र डायलिसिस सेंटर का संचालन किया जा रहा है। यहां के मैनेजर नागेंद्र प्रताप बताते हैं कि डायलिसिस यूनिट में प्रतिवर्ष डायलिसिस कराने वाले लोगों की संख्या लगभग दो हजार बढ़ जाती है। वर्तमान में यहां 105 मरीज डायलिसिस का लाभ ले रहे हैं। इनमें 65 पुरुष और 40 महिलाएं शामिल हैं। उनका कहना है कि डीसीडीसी पर निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था है। यहां कुल 13 बेड उपलब्ध हैं। यहां तीन पालियों में प्रतिदिन सुबह सात बजे से रात 10 बजे तक डायलिसिस की जाती है।
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डायलिसिस कराने वाले 50 प्रतिशत मधुमेह रोगी
वरिष्ठ सर्जन डॉ. गौरव पारिक का कहना है कि किडनी की बीमारी साल दर साल बढ़ती जा रही है। ओपीडी में आने वाले 400 मरीजों में आधे से अधिक की जांच में बीपी और मधुमेह अनियंत्रित मिलता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला अस्पताल में डायलिसिस कराने वालों में 50 प्रतिशत मधुमेह रोगी हैं।
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खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
सीएमओ डॉ.आरसी गुप्ता के अनुसार किडनी में पथरी की समस्या भी बढ़ती जा रही है। इसमें 15 से 20 साल से लेकर 30 से 50 साल तक के मरीज आ रहे हैं। इसकी वजह अनियमित जीवन शैली के साथ ही सही तरीके का खानपान न होना है। मरीजों को जांच, इलाज के साथ ही सही आहार लेने की सलाह दी जाती है।
पंचकर्म चिकित्सा राहत दिलाने में सहायक
आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ.देवेंद्र कुमार का कहना है कि दर्द निवारक दवाइयों का अधिक प्रयोग, पानी की कमी, बीपी अनियंत्रित होना किडनी की बीमारी को बढ़ावा देने के प्रमुख कारण है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति इस बीमारी के निदान में सहायक है। पंचकर्म चिकित्सा से इसका इलाज किया जाता है।
बचाव के उपाय
- बीपी और शुगर पर नियंत्रण रखें। इसकी नियमित जांच कराते रहें।
- दिन में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए।
- नारियल पानी पीना चाहिए। इसमें पौटैशियम, मैग्निशयम ज्यादा होता है, जो पथरी बनने से रोकता है।
- दाल, ओट्स का सेवन करना चाहिए, इसमें पथरी रोधक गुण होते हैं।
डायलिसिस यूनिट पर अब तक डायलिसिस कराने वाले लोग वर्ष बार
2022 में 11 जून से 31 दिसंबर तक- 2807
2023- 7044
2024- 9106
2025- 11014
2026 जनवरी - 1002
2026 फरवरी - 907