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जिलेभर में प्रसिद्ध है चतुर्वेदी समाज की होली

Sun, 05 Mar 2017 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी Updated Sun, 05 Mar 2017 11:19 PM IST
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jilebhar mein prasiddh hai chaturvedee samaaj kee holee
बांके बिहारी का मंदिर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शहर के चौथियाना, मिश्राना, पुरोहिताना मोहल्ले में रहने वाले चतुर्वेदी समाज की होली जिलेभर में प्रसिद्ध है। होली के चार दिन पहले से इन मोहल्लों की रंगत देखते ही बनती है। सुबह से जहां बच्चे होली खेलने में मस्त हो जाते हैं। वहीं शाम को भांग के साथ फाग गायन की महफिल सजती है। इसमें बड़े और बच्चे सभी जमकर मस्ती करते हैं।
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वैसे तो होली का मजा जिलेभर में शहर से लेकर देहात तक सभी लेते हैं लेकिन शहर के चतुर्वेदी समाज के मोहल्लों में होली की रंगत चार दिन पहले से ही दिखना शुरू हो जाती है। यहां पर एकादशी पर वराह मंदिर से दोपहर में राधा कृष्ण का डोला निकलता है। यह पुरानी मैनपुरी के विभिन्न मोहल्लों से होता हुआ कृष्णा टाकीज के समीप पहुंचता है। वहां गणेश मंदिर में रात्रि विश्राम होता है। द्वादशी को दोपहर में वहां से डोला वापस वराह मंदिर आता है। पूर्णिमा के दिन दाऊजी मंदिर से दोपहर में डोला निकलता है। यह डोला उसी दिन कृष्णा टाकीज के गणेश मंदिर में पहुंचता है। वहीं पड़वा वाले दिन यह डोला वापस दाऊजी मंदिर पहुंचता है। इसके अलावा एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक बिहारी जी मंदिर, दाऊजी मंदिर, वराह मंदिर आदि में फाग गायन होता है।
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वहीं शहर के वंशीगोहरा में तो होली की स्थापना के साथ ही होली के गीतों का गायन शुरू हो जाता है। यहां पर पौष माह की पूर्णिमा से होली के गीतों के गायन का सिलसिला शुरू होकर होलिका दहन तक निरंतर चलता रहता है। इस दौरान प्रतिदिन महिला पुरुष होलिका रखे जाने के स्थान पर एकत्रित होकर होली के गीत गाते हैं। इस दौरान सभी मिलजुलकर नृत्य आदि भी करते हैं।
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रठेरा की होली भी है प्रसिद्ध
मैनपुरी। शहर से कुछ दूरी पर स्थित रठेरा गांव की होली भी काफी प्रसिद्ध है। यहां पर पांच दिनों तक फाग की टोलियां निकलती हैं। जिसमें बच्चे युवा और बुजुर्ग सभी भाग लेते हैं। पांचवें दिन पूरे गांव के लोग एकत्रित होकर एक साथ होली के त्योहार का समापन करते हैं। पूरे गांव की आबादी लगभग 10 हजार है। इसके बाद भी पूरे गांव की होली एक ही स्थान पर जलती है।
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