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भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स सेंटर: सेना भर्ती के नाम पर करोड़ों की ठगी, क्राइम ब्रांच करेगी विवेचना
Tue, 15 Jul 2025 02:05 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
राहुल दक्ष, संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
राहुल दक्ष, संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 15 Jul 2025 02:05 PM IST
सार
अरविंद के खिलाफ उड़ीसा के भुवनेश्वर, तेलंगाना के राचकोंडा में भी केस दर्ज होने के दस्तावेज पुलिस को मिल गए हैं। अब इस मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच करेगी।
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फर्जी ट्रेनिंग सेंटर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मैनपुरी के किशनी थाना क्षेत्र के जटपुरा चौराहा के पास सेना भर्ती प्रशिक्षण के लिए अवैध रूप से संचालित भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स सेंटर के संचालक अरविंद पांडेय द्वारा नौजवानों से की गई ठगी में बड़ा राज खुला है। एक करोड़ रुपये से अधिक की देशभर के नौजवानों से ठगी का राजफाश हो चुका है। अरविंद के खिलाफ उड़ीसा के भुवनेश्वर, तेलंगाना के राचकोंडा में भी केस दर्ज होने के दस्तावेज पुलिस को मिल गए हैं। राचकोंडा में 21 मार्च 2025 में केस दर्ज हुआ था। वहीं, भुवनेशवर में 5 अक्तूबर 2023 को उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
मूलरूप से कुर्रा के राजपुर के रहने वाले अरविंद पांडेय हाल निवासी गाड़ीवान मोहल्ला, शहर कोतवाली की ठगी का राज बीते जून माह के पहले सप्ताह में तेलंगाना से आए पांच युवकों ने खोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अरविंद पांडेय ने उनसे दो से तीन लाख रुपये लिए। सेना भर्ती का प्रशिक्षण देने और सेना में भर्ती कराने का दावा किया। मगर, उन्हें नौकरी नहीं दिलाई गई। इसके बाद किशनी पुलिस ने जांच की तो परत दर परत राजफाश होते गए।
चार जून 2025 को अरविंद और उसकी दूसरी पत्नी सुमित्रा को जेल भेजा था। इसके बाद से विवेचना प्रचलित है। अरविंद के खिलाफ अब तक पुलिस के पास मूल मुकदमे को छोड़कर अन्य चार ठगी पीड़ित भी सामने आ चुके हैं। उनको तहरीरों को भी पुलिस ने मुकदमे में जोड़ दिया है। एक करोड़ से अधिक की ठगी अभी तक उजागर हो गई है। ठगी का आरोपी अरविंद और उसकी दूसरी पत्नी सुमित्रा फिलहाल जिला कारागार में निरुद्ध हैं।
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आखिर कहां खपा दिया पैसा, क्या पीड़ितों को मिल पाएगा वापस
अरविंद द्वारा की गई करोड़ों रुपये की ठगी के संबंध में सबसे बड़ा सवाल आज भी खड़ा हुआ है कि आखिर पीड़ितों को उनकी रकम कैसे और कब वापस मिलेगी। अरविंद के बैंक खातों में रकम नहीं मिली है। उसकी अचल संपत्ति का भी कोई सुराग नहीं लग रहा है। नकदी भी उससे बरामद नहीं हुई थी। इधर, ठगी सेंटर का कोषाध्यक्ष बिहार का प्रकाश भी हाथ नहीं आया है। सवाल यह भी खड़ा है कि आखिर अरविंद ने यह करोड़ों रुपया कहां खपा दिया है। क्या उसका कोई और भी सक्रिय सदस्य है, जिसके पास पैसा रखा है या फिर अरविंद ने खुद ही इस रकम को भूमिगत कर दिया है और वह पुलिस को जानकारी नहीं दे रहा है।
हाईस्कूल तक भी नहीं पढ़ा अरविंद, 2014 में पहली बार रखा था ठगी की दुनिया में कदम
अरविंद पांडेय बेशक हाईस्कूल तक भी नहीं पढ़ा। मगर, उसके कारनामे बेहद बड़े हैं। 2014 में उसने मोबाइल की दुकान मैनपुरी में खोली। कइयों को जाली तरीके से भी सिम बेचता था। जिन लोगों से दस्तावेज लिए थे। उनके नाम पर बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से लोन करा लिया था। इस मामले में शहर कोतवाली में भी केस भी दर्ज है। 2019 में मिस इंडिया प्रतियोगिता की तैयारी कराने के नाम पर देशभर की कई लड़कियों से पैसों की ठगी की।
इसके बाद एक राजनीतिक दल भी बनाया। लोगों को जोड़ने के नाम पर पैसे ऐंठने लगा। इसके बाद नेशनल एंटी करप्शन क्राइम ब्यूरो के नाम से संस्था संचालित की। इसका भय दिखाकर लोगों को धमकाने और ठगने लगा था। इसके बाद उसने सेना भर्ती के नाम पर पहले घिरोर और बाद में किशनी में सेंटर खोला और देशभर के नौजवानों से करोड़ों रुपये की ठगी की थी।
एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि शासन के नियमानुसार 50 लाख से अधिक की ठगी के मामलों की क्राइम ब्रांच को विवेचना करनी होती है। इसी नियम के तहत यह विवेचना होगी। आरोपियों के खिलाफ पुलिस कड़े साक्ष्य जुटा रही है। - ,
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मूलरूप से कुर्रा के राजपुर के रहने वाले अरविंद पांडेय हाल निवासी गाड़ीवान मोहल्ला, शहर कोतवाली की ठगी का राज बीते जून माह के पहले सप्ताह में तेलंगाना से आए पांच युवकों ने खोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अरविंद पांडेय ने उनसे दो से तीन लाख रुपये लिए। सेना भर्ती का प्रशिक्षण देने और सेना में भर्ती कराने का दावा किया। मगर, उन्हें नौकरी नहीं दिलाई गई। इसके बाद किशनी पुलिस ने जांच की तो परत दर परत राजफाश होते गए।
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चार जून 2025 को अरविंद और उसकी दूसरी पत्नी सुमित्रा को जेल भेजा था। इसके बाद से विवेचना प्रचलित है। अरविंद के खिलाफ अब तक पुलिस के पास मूल मुकदमे को छोड़कर अन्य चार ठगी पीड़ित भी सामने आ चुके हैं। उनको तहरीरों को भी पुलिस ने मुकदमे में जोड़ दिया है। एक करोड़ से अधिक की ठगी अभी तक उजागर हो गई है। ठगी का आरोपी अरविंद और उसकी दूसरी पत्नी सुमित्रा फिलहाल जिला कारागार में निरुद्ध हैं।
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आखिर कहां खपा दिया पैसा, क्या पीड़ितों को मिल पाएगा वापस
अरविंद द्वारा की गई करोड़ों रुपये की ठगी के संबंध में सबसे बड़ा सवाल आज भी खड़ा हुआ है कि आखिर पीड़ितों को उनकी रकम कैसे और कब वापस मिलेगी। अरविंद के बैंक खातों में रकम नहीं मिली है। उसकी अचल संपत्ति का भी कोई सुराग नहीं लग रहा है। नकदी भी उससे बरामद नहीं हुई थी। इधर, ठगी सेंटर का कोषाध्यक्ष बिहार का प्रकाश भी हाथ नहीं आया है। सवाल यह भी खड़ा है कि आखिर अरविंद ने यह करोड़ों रुपया कहां खपा दिया है। क्या उसका कोई और भी सक्रिय सदस्य है, जिसके पास पैसा रखा है या फिर अरविंद ने खुद ही इस रकम को भूमिगत कर दिया है और वह पुलिस को जानकारी नहीं दे रहा है।
हाईस्कूल तक भी नहीं पढ़ा अरविंद, 2014 में पहली बार रखा था ठगी की दुनिया में कदम
अरविंद पांडेय बेशक हाईस्कूल तक भी नहीं पढ़ा। मगर, उसके कारनामे बेहद बड़े हैं। 2014 में उसने मोबाइल की दुकान मैनपुरी में खोली। कइयों को जाली तरीके से भी सिम बेचता था। जिन लोगों से दस्तावेज लिए थे। उनके नाम पर बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से लोन करा लिया था। इस मामले में शहर कोतवाली में भी केस भी दर्ज है। 2019 में मिस इंडिया प्रतियोगिता की तैयारी कराने के नाम पर देशभर की कई लड़कियों से पैसों की ठगी की।
इसके बाद एक राजनीतिक दल भी बनाया। लोगों को जोड़ने के नाम पर पैसे ऐंठने लगा। इसके बाद नेशनल एंटी करप्शन क्राइम ब्यूरो के नाम से संस्था संचालित की। इसका भय दिखाकर लोगों को धमकाने और ठगने लगा था। इसके बाद उसने सेना भर्ती के नाम पर पहले घिरोर और बाद में किशनी में सेंटर खोला और देशभर के नौजवानों से करोड़ों रुपये की ठगी की थी।
एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि शासन के नियमानुसार 50 लाख से अधिक की ठगी के मामलों की क्राइम ब्रांच को विवेचना करनी होती है। इसी नियम के तहत यह विवेचना होगी। आरोपियों के खिलाफ पुलिस कड़े साक्ष्य जुटा रही है। - ,