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इमारत कोई भी टूटी तो भारत टूट जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Fri, 24 Feb 2017 10:58 PM IST
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इमारत कोई भी टूटी तो भारत टूट जाएगा
- फोटो : अमर उजाला
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देवी रोड स्थित खानकाह ए अफजलिया (छोटी खानकाह) में चल रहे अब्बा मियां का दो दिवसीय उर्स शुक्रवार को कुल के साथ समापन हो गया। हिंदू मुस्लिम एकता पर कलाम पढ़ते कहा कि ‘हवेली झोपड़ी सबका मुकद्दर फूट जाएगा, अगर ईमान ए शराफत हाथ से छूट जाएगा, वो राम का मंदिर हो चाहे अल्लाह का दर, इमारत कोई भी टूटी तो भारत टूट जाएगा।’
देवी रोड स्थित खानकाह ए अफजलिया के सज्जादानशीं हाजी हामिद अली शाह का पहला उर्स चल रहा था। उर्स का आगाज कुरानख्वानी और मीलाद शरीफ के साथ हुआ था। बाद नमाज जुमे सूफियाना कव्वाली प्रोग्राम की महफिल सजाई गई। मुंबई से आए कव्वाल मुनीस भाई ने अपनी पार्टी के साथ अब्बा मियां की शान में अपना-अपना कलाम पेश किया। कव्वालों ने सबसे पहले नात ए रसूल पेश कर किया। साथ ही पढ़ा कि ‘हर उम्मदी के सिर पर है साया रसूल का, हासिल है मोमिन को वसीला रसूला का।’ ‘कहा मायूस होके अदना और आला नहीं जाता, अब्बा के दर से कोई भी टाला नहीं जाता।’ कव्वालियों के बाद कुल शरीफ हुआ। इसमें दूर दराज से आए उलेमा और मौलानाओं ने फातिहा पढ़ी। साथ ही देश में अमन और चैन की दुआ मांगी। सज्जादानशीं हाजी मुहम्मद हाशिम, अली हसन, अली हुसैन, आफाक मियां, मोहम्मद नासिर, अली हैदर, रियासत, अली अहमद, वसीम खलीफा, उवैद उर्रहमान, हाजी सिकंदर खां, मुहम्मद नाजिर, मुहम्मद अहमद, फहीम खान और नदीम इलाही मौजूद रहे।
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देवी रोड स्थित खानकाह ए अफजलिया के सज्जादानशीं हाजी हामिद अली शाह का पहला उर्स चल रहा था। उर्स का आगाज कुरानख्वानी और मीलाद शरीफ के साथ हुआ था। बाद नमाज जुमे सूफियाना कव्वाली प्रोग्राम की महफिल सजाई गई। मुंबई से आए कव्वाल मुनीस भाई ने अपनी पार्टी के साथ अब्बा मियां की शान में अपना-अपना कलाम पेश किया। कव्वालों ने सबसे पहले नात ए रसूल पेश कर किया। साथ ही पढ़ा कि ‘हर उम्मदी के सिर पर है साया रसूल का, हासिल है मोमिन को वसीला रसूला का।’ ‘कहा मायूस होके अदना और आला नहीं जाता, अब्बा के दर से कोई भी टाला नहीं जाता।’ कव्वालियों के बाद कुल शरीफ हुआ। इसमें दूर दराज से आए उलेमा और मौलानाओं ने फातिहा पढ़ी। साथ ही देश में अमन और चैन की दुआ मांगी। सज्जादानशीं हाजी मुहम्मद हाशिम, अली हसन, अली हुसैन, आफाक मियां, मोहम्मद नासिर, अली हैदर, रियासत, अली अहमद, वसीम खलीफा, उवैद उर्रहमान, हाजी सिकंदर खां, मुहम्मद नाजिर, मुहम्मद अहमद, फहीम खान और नदीम इलाही मौजूद रहे।
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