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Mainpuri: एतिहासिक धरोहरों को नहीं मिल सका संरक्षण, खुदाई में मिलते रहे हैं पत्थर और मूर्तियां
Sun, 01 Jan 2023 12:56 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Sun, 01 Jan 2023 12:56 AM IST
सार
मैनपुरी ऋषि मुनियों की तपोभूमि और एतिहासिक नगरी रही है। यहां आए दिन खोदाई में प्राचीन मूर्ति और पत्थर निकलते रहते हैं। खोदाई में निकली प्राचीन मूर्ति और पत्थर की जांच करने तथा उनकी प्राचीनता का आंकलन करने के लिए पुरातत्व विभाग की टीम कई बार आई, लेकिन एतिहासिक धरोहरों को आज तक संरक्षण और एतिहासिकता को पुरातत्व विभाग की सूची में उचित स्थान नहीं मिल सका है।
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खुदाई में मिली मूर्तियां, औजार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
औंछा में वर्ष 2013 में वनकटी आश्रम परिसर में खुदाई के दौरान एक प्राचीन हरिहर मूर्ति के साथ विशाल शिवलिंग मिला। जानकारी होने पर पुरातत्व विभाग की टीम वनकटी आश्रम पहुंची। उनकी प्राचीनता की जांच की। ग्रामीणों के विरोध के चलते टीम उनको अपने साथ नहीं ले जा सकी। ग्रामीणों ने शिवलिंग को समाधि दे दी। हरिहर मूर्ति को मंदिर परिसर में रखवा दिया। नवंबर 2013 में ही हरिहर मूर्ति चोरी चली गई। वर्ष 2013 में ही शृंगी ऋषि आश्रम परिसर में खुदाई के दौरान 13 फुट का नरकंकाल मिला।
पुरातत्व विभाग की टीम ग्रामीणों के विरोध के चलते नरकंकाल को भी साथ नहीं ले जा सकी। बाद में नरकंकाल भी चोरी हो गया। औंछा में अजोम कुंड की खुदाई के दौरान एक बुद्ध मूर्ति तथा नंदी प्रतिमा भी मिली। औंछा में च्यवन ऋषि आश्रम, शृंगी ऋषि आश्रम, ओम ऋषि आश्रम, बनकटी आश्रम, व्यास मुनि आश्रम, लाल टीला आश्रम परिसर में आए दिन खुदाई के दौरान प्राचीन मूर्ति निकलती हैं।
ऐसे ही मैनपुरी में कदम-कदम पर इतिहास से जुड़ीं धरोहरें खनन में सामने आईं, लेकिन न तो उन प्राचीन धरोहरों का संरक्षण हो सका और न ही स्थलों का। आज भी मैनपुरी के प्राचीन और एतिहासिक स्थल संरक्षण के इंतजार में हैं।
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पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मैनपुरी पौराणिक और एतिहासिक नगरी रही है। जिले का प्राचीन इतिहास भी है। जिले की एतिहासिक धरोहरों को संरक्षित कराया जाएगा। पर्यटन और पुरातत्व विभाग में समन्वय बनाकर काम कराया जाएगा।
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पुरातत्व विभाग की टीम ग्रामीणों के विरोध के चलते नरकंकाल को भी साथ नहीं ले जा सकी। बाद में नरकंकाल भी चोरी हो गया। औंछा में अजोम कुंड की खुदाई के दौरान एक बुद्ध मूर्ति तथा नंदी प्रतिमा भी मिली। औंछा में च्यवन ऋषि आश्रम, शृंगी ऋषि आश्रम, ओम ऋषि आश्रम, बनकटी आश्रम, व्यास मुनि आश्रम, लाल टीला आश्रम परिसर में आए दिन खुदाई के दौरान प्राचीन मूर्ति निकलती हैं।
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ऐसे ही मैनपुरी में कदम-कदम पर इतिहास से जुड़ीं धरोहरें खनन में सामने आईं, लेकिन न तो उन प्राचीन धरोहरों का संरक्षण हो सका और न ही स्थलों का। आज भी मैनपुरी के प्राचीन और एतिहासिक स्थल संरक्षण के इंतजार में हैं।
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करीमगंज में मिले प्राचीन पत्थर
शहर के सटे करीमगंज में एक टीले पर खेल रहे बच्चों को चार महीने पहले प्राचीन पत्थर मिले। मोतीनुमा पत्थर मिलने के बाद एसडीएम सदर नवोदिता शर्मा करीमगंज पहुंची। बच्चों तथा ग्रामीणों के पास मौजूद प्राचीन पत्थरों को एसडीएम ने राजस्व कर्मियों की सुपुर्दगी में दिलवा दिया। पुरातत्व विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने से पत्थरों की एतिहासिकता का आज तक पता नहीं चल सका है।गणेशपुर में मिली ताम्र निधियां
कुरावली क्षेत्र के ग्राम गणेशपुर में जून 2022 में नहर किनारे खेत की खोदाई के दौरान प्राचीन ताम्र निधियां मिलीं। खोदाई में प्राचीन तलवारें, भाले, बरछी मिले। जानकारी होने पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही पुरातत्व विभाग की टीम भी गणेशपुर पहुंची। टीम काफी प्राचीन ताम्र निधियों को अपने साथ ले गई। कुछ को प्रशासनिक अधिकारियों की सुपुर्दगी में दे दिया गया।पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मैनपुरी पौराणिक और एतिहासिक नगरी रही है। जिले का प्राचीन इतिहास भी है। जिले की एतिहासिक धरोहरों को संरक्षित कराया जाएगा। पर्यटन और पुरातत्व विभाग में समन्वय बनाकर काम कराया जाएगा।