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दिहुली नरसंहार: खून से लाल हुई थी गांव की धरती, 24 दलितों की हत्या...जो मिला गोलियों से भूना, 44 साल बाद इंसाफ
Tue, 11 Mar 2025 06:42 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: अरुन पाराशर
Updated Tue, 11 Mar 2025 06:42 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिला में ऐसा नरसंहार हुआ, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। गांव में एक साथ 24 अनुसूचित जाति के लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया गया। 44 साल बाद एडीजे विशेष डकैती इंद्रा सिंह की कोर्ट ने फैसला सुनाया।
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दिहुली नरसंहार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
फिरोजाबाद के जसराना के गांव दिहुली में 44 साल पहले हुई 24 दलितों की सामूहिक हत्या में मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया। इन तीनों की सजा के बिंदु पर 18 मार्च को सुनवाई होगी। भगोड़ा घोषित ज्ञानचंद्र उर्फ गिन्ना की फाइल को अलग करते हुए उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर दिए हैं।
एडीजे विशेष डकैती इंद्रा सिंह की अदालत से दोपहर 3.30 बजे करीब फैसला आया। अदालत में आरोपी कप्तान सिंह, जो कि जमानत पर था, वह हाजिर हुआ। रामसेवक को मैनपुरी जेल से ले जाकर पुलिस ने पेश किया। तीसरे आरोपी रामपाल की ओर से हाजिरी माफी ले गई। अदालत ने साक्ष्यों और गवाही के आधार पर कप्तान सिंह, रामसेवक और रामपाल को दोषी करार दिया। रामपाल की हाजिरी माफी को निरस्त करते हुए उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर 12 मार्च को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस अभिरक्षा में कप्तान सिंह और रामसेवक को जेल भेज दिया गया।
रामसेवक और कप्तान सिंह इन धाराओं में दोषी
आईपीसी 302 (हत्या)आईपीसी 307 (जानलेवा हमला)आईपीसी की धारा 148 (घातक हथियारों से लैस होकर उपद्रव करना)आईपीसी की धारा 149 (गैरकानूनी सभा या विधि विरुद्ध जमावड़ा)आईपीसी 449 (किसी के घर में घुसकर अपराध को अंजाम देना)आईपीसी 450 (गृह अतिचार)रामपाल इन धाराओं में दोषी करारआईपीसी 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र करना)आईपीसी 302 (हत्या करना)आईपीसी 2016ए (अपराधियों को शरण देना)
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युधिष्ठिर और पंचम की फौती रिपोर्ट जसराना पुलिस ने की दाखिल
इस वारदात के दो अभियुक्त युधिष्ठिर पुत्र मुंशी सिंह और पंचम पुत्र मुंशी सिंह की मौत हो चुकी है। मगर, अदालत में इस संबंध में कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई थी। अभियोजन ने जसराना पुलिस को बुलाते हुए इस संबंध में फौती रिपोर्ट दाखिल कराई। पुलिस ने दिहुली गांव में पूछताछ, मृतकों के परिजन, रिश्तेदारों से पूछताछ के आधार पर उनको मृत पाने का उल्लेख करते हुए फौती रिपोर्ट दाखिल की।
ज्ञानचंद्र की खातिर अभी कोर्ट में जिंदा रहेगी फाइल
एडीजे डकैती इंद्रा सिंह की कोर्ट से मंगलवार को फैसला बेशक आ गया। 18 मार्च को सजा के बिंदु पर सुनवाई नियत है। मगर, इस नरसंहार की फाइल अभी अदालत में पूर्ण रूप से बंद नहीं होगी। दरअसल, एक मुल्जिम ज्ञानचंद्र उर्फ गिन्ना फरार है। ज्ञानचंद्र उर्फ गिन्ना पुत्र ज्योति प्रसाद इस नरसंहार की वारदात में लंबे समय से फरार चल रहा है। अदालत ने 15 जुलाई 2023 को उसे भगोड़ा घोषित करार देते हुए उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर रखे हैं। जब तक ज्ञानचंद्र की गिरफ्तारी नहीं हो जाती या फिर वह खुद ही कोर्ट में सरेंडर नहीं कर देता, उसकी फाइल प्रचलित रहेगी।
यह हुई थी वारदात
फिरोजाबाद जनपद के जसराना थाना क्षेत्र के ग्राम दिहुली (घटना के समय मैनपुरी का हिस्सा) में 24 दलितों की सामूहिक हत्या कर दी गई थी। वर्ष 1981 में 18 नवंबर की शाम 6 बजे की यह घटना थी। डकैत संतोष और राधे के गिरोह ने एक मुकदमे में गवाही के विरोध में हथियारों से लैस होकर दिहुली गांव में घुसकर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों पर गोलियां चलाई गई थी। इसमें 24 लोगों की मौत हुई थी। बदमाशों ने हत्या करने के बाद लूटपाट भी की थी। रिपोर्ट दिहुली के लायक सिंह ने 19 नवंबर 1981 को थाना जसराना में दर्ज कराई थी। थाना जसराना में राधेश्याम उर्फ राधे, संतोष सिंह उर्फ संतोषा के अलावा 17 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी। मैनपुरी से लेकर इलाहाबाद तक यह मामला कोर्ट में चला। इसके बाद 19 अक्तूबर 2024 को बहस के लिए मुकदमा फिर से मैनपुरी सेशन कोर्ट में ट्रांसफर किया गया। जिला जज के आदेश पर विशेष डकैती कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई।
गिरोह सरगना संतोषा और राधे सहित 13 अभियुक्तों की हो चुकी है मौत
इस नरसंहार को अंजाम देने का आरोप जिस संतोष उर्फ संतोषा और राधे के गिरोह पर है। उस गिरोह के 17 सदस्यों को इस वारदात में अभियुक्त बनाया गया। इस वारदात के अभियुक्तों में से गिरोह सरगना संतोष उर्फ संतोषा और राधे सहित गैंग के सदस्य कमरुद्दीन, श्यामवीर, कुंवरपाल, राजे उर्फ राजेंद्र, भूरा, प्रमोद राना, मलखान सिंह, रविंद्र सिंह, युधिष्ठिर पुत्र दुर्गपाल सिंह, युधिष्ठिर पुत्र मुंशी सिंह और पंचम पुत्र मुंशी सिंह की मौत हो चुकी है।
इन 24 लोगों की हुई थी हत्या
ज्वाला प्रसाद, रामप्रसाद, रामदुलारी, श्रृंगार वती, शांति, राजेंद्री, राजेश, रामसेवक, शिवदयाल, मुनेश, भरत सिंह, दाताराम, आशा देवी, लालाराम, गीतम, लीलाधर, मानिकचंद्र, भूरे, कुं. शीला, मुकेश, धनदेवी, गंगा सिंह, गजाधर व प्रीतम सिंह की हत्या हुई थी।
पांच गवाहों की गवाही के सहारे सजा की दहलीज पर पहुंचा मुकदमा
इस चर्चित नरसंहार में कोर्ट में तथ्य के गवाह के तौर पर लायक सिंह, वेदराम, हरिनरायण, कुमर प्रसाद, बनवारी लाल की कोर्ट में गवाही हुई। हालांकि इन सभी की अब मौत हो चुकी है। मगर, इनकी गवाही के सहारे ही पूरा केस कोर्ट में टिका रहा। कुमर प्रसाद की गवाही सबसे अहम रही। उन्होंने बतौर चश्मदीद कोर्ट में अपनी गवाही दी। कुमर प्रसाद की गवाही में नरसंहार और वेदराम की गवाही में हत्याओं के साथ ही लूट की भी बात कही गई।
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एडीजे विशेष डकैती इंद्रा सिंह की अदालत से दोपहर 3.30 बजे करीब फैसला आया। अदालत में आरोपी कप्तान सिंह, जो कि जमानत पर था, वह हाजिर हुआ। रामसेवक को मैनपुरी जेल से ले जाकर पुलिस ने पेश किया। तीसरे आरोपी रामपाल की ओर से हाजिरी माफी ले गई। अदालत ने साक्ष्यों और गवाही के आधार पर कप्तान सिंह, रामसेवक और रामपाल को दोषी करार दिया। रामपाल की हाजिरी माफी को निरस्त करते हुए उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर 12 मार्च को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस अभिरक्षा में कप्तान सिंह और रामसेवक को जेल भेज दिया गया।
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रामसेवक और कप्तान सिंह इन धाराओं में दोषी
आईपीसी 302 (हत्या)आईपीसी 307 (जानलेवा हमला)आईपीसी की धारा 148 (घातक हथियारों से लैस होकर उपद्रव करना)आईपीसी की धारा 149 (गैरकानूनी सभा या विधि विरुद्ध जमावड़ा)आईपीसी 449 (किसी के घर में घुसकर अपराध को अंजाम देना)आईपीसी 450 (गृह अतिचार)रामपाल इन धाराओं में दोषी करारआईपीसी 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र करना)आईपीसी 302 (हत्या करना)आईपीसी 2016ए (अपराधियों को शरण देना)
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युधिष्ठिर और पंचम की फौती रिपोर्ट जसराना पुलिस ने की दाखिल
इस वारदात के दो अभियुक्त युधिष्ठिर पुत्र मुंशी सिंह और पंचम पुत्र मुंशी सिंह की मौत हो चुकी है। मगर, अदालत में इस संबंध में कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई थी। अभियोजन ने जसराना पुलिस को बुलाते हुए इस संबंध में फौती रिपोर्ट दाखिल कराई। पुलिस ने दिहुली गांव में पूछताछ, मृतकों के परिजन, रिश्तेदारों से पूछताछ के आधार पर उनको मृत पाने का उल्लेख करते हुए फौती रिपोर्ट दाखिल की।
ज्ञानचंद्र की खातिर अभी कोर्ट में जिंदा रहेगी फाइल
एडीजे डकैती इंद्रा सिंह की कोर्ट से मंगलवार को फैसला बेशक आ गया। 18 मार्च को सजा के बिंदु पर सुनवाई नियत है। मगर, इस नरसंहार की फाइल अभी अदालत में पूर्ण रूप से बंद नहीं होगी। दरअसल, एक मुल्जिम ज्ञानचंद्र उर्फ गिन्ना फरार है। ज्ञानचंद्र उर्फ गिन्ना पुत्र ज्योति प्रसाद इस नरसंहार की वारदात में लंबे समय से फरार चल रहा है। अदालत ने 15 जुलाई 2023 को उसे भगोड़ा घोषित करार देते हुए उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर रखे हैं। जब तक ज्ञानचंद्र की गिरफ्तारी नहीं हो जाती या फिर वह खुद ही कोर्ट में सरेंडर नहीं कर देता, उसकी फाइल प्रचलित रहेगी।
यह हुई थी वारदात
फिरोजाबाद जनपद के जसराना थाना क्षेत्र के ग्राम दिहुली (घटना के समय मैनपुरी का हिस्सा) में 24 दलितों की सामूहिक हत्या कर दी गई थी। वर्ष 1981 में 18 नवंबर की शाम 6 बजे की यह घटना थी। डकैत संतोष और राधे के गिरोह ने एक मुकदमे में गवाही के विरोध में हथियारों से लैस होकर दिहुली गांव में घुसकर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों पर गोलियां चलाई गई थी। इसमें 24 लोगों की मौत हुई थी। बदमाशों ने हत्या करने के बाद लूटपाट भी की थी। रिपोर्ट दिहुली के लायक सिंह ने 19 नवंबर 1981 को थाना जसराना में दर्ज कराई थी। थाना जसराना में राधेश्याम उर्फ राधे, संतोष सिंह उर्फ संतोषा के अलावा 17 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी। मैनपुरी से लेकर इलाहाबाद तक यह मामला कोर्ट में चला। इसके बाद 19 अक्तूबर 2024 को बहस के लिए मुकदमा फिर से मैनपुरी सेशन कोर्ट में ट्रांसफर किया गया। जिला जज के आदेश पर विशेष डकैती कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई।
गिरोह सरगना संतोषा और राधे सहित 13 अभियुक्तों की हो चुकी है मौत
इस नरसंहार को अंजाम देने का आरोप जिस संतोष उर्फ संतोषा और राधे के गिरोह पर है। उस गिरोह के 17 सदस्यों को इस वारदात में अभियुक्त बनाया गया। इस वारदात के अभियुक्तों में से गिरोह सरगना संतोष उर्फ संतोषा और राधे सहित गैंग के सदस्य कमरुद्दीन, श्यामवीर, कुंवरपाल, राजे उर्फ राजेंद्र, भूरा, प्रमोद राना, मलखान सिंह, रविंद्र सिंह, युधिष्ठिर पुत्र दुर्गपाल सिंह, युधिष्ठिर पुत्र मुंशी सिंह और पंचम पुत्र मुंशी सिंह की मौत हो चुकी है।
इन 24 लोगों की हुई थी हत्या
ज्वाला प्रसाद, रामप्रसाद, रामदुलारी, श्रृंगार वती, शांति, राजेंद्री, राजेश, रामसेवक, शिवदयाल, मुनेश, भरत सिंह, दाताराम, आशा देवी, लालाराम, गीतम, लीलाधर, मानिकचंद्र, भूरे, कुं. शीला, मुकेश, धनदेवी, गंगा सिंह, गजाधर व प्रीतम सिंह की हत्या हुई थी।
पांच गवाहों की गवाही के सहारे सजा की दहलीज पर पहुंचा मुकदमा
इस चर्चित नरसंहार में कोर्ट में तथ्य के गवाह के तौर पर लायक सिंह, वेदराम, हरिनरायण, कुमर प्रसाद, बनवारी लाल की कोर्ट में गवाही हुई। हालांकि इन सभी की अब मौत हो चुकी है। मगर, इनकी गवाही के सहारे ही पूरा केस कोर्ट में टिका रहा। कुमर प्रसाद की गवाही सबसे अहम रही। उन्होंने बतौर चश्मदीद कोर्ट में अपनी गवाही दी। कुमर प्रसाद की गवाही में नरसंहार और वेदराम की गवाही में हत्याओं के साथ ही लूट की भी बात कही गई।