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इलाज के अभाव में दलित कर्मी की मौत पर फूटा गुस्सा

Fri, 26 Aug 2016 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी Updated Fri, 26 Aug 2016 11:29 PM IST
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Dalit anger burst on the death of the worker, in the absence of treatment
जाम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
वेतन न मिलने से इलाज के अभाव मेें हुई दलित कर्मचारी की मौत पर शुक्रवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोग सड़क पर उतर आए। बरेली-ग्वालियर राजमार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया। इस दौरान लोगों ने डीएचओ पर कर्मचारी के उत्पीड़न का भी आरोप लगाया। एसडीएम ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाकर लोगों का शांत कराया।  
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किशनी के मोहल्ला हवेली निवासी हीरालाल वाल्मीकि राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल नैगवां में स्वीपर के पद पर तैनात था। बताया जाता है कि छह माह से उसे वेतन नहीं मिला था। इससे वह आर्थिक तंगी का शिकार हो गया था। इसी बीच वह बीमार पड़ गया। वेतन नहीं मिलने से इलाज के अभाव में उसकी हालत बिगड़ती गई और गुरुवार की शाम सांसें थम र्गइं। इलाज नहीं होने से हुई मौत पर शुक्रवार की सुबह गांववालों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोग सुबह 10 बजे ग्वालियर-बरेली राजमार्ग पर शव लेकर उतर आए। एसडीएम किशनी गुरु प्रसाद गुप्ता ने मृतक आश्रित के तौर पर नौकरी, पत्नी को बकाया वेतन और पेंशन भुगतान आदि मांगें पूरी कराने का आश्वासन दिया। तब जाकर लोग शांत हुए। वहीं युवा सपा नेता विकास यादव संकी ने मृतक के परिवार की मदद का भरोसा दिलाया है। 
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एसडीएम ने दिया अंतिम संस्कार को पैसा 
रामनगर तिराहे पर जाम की सूचना पर पहुंचे एसडीएम को राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल घिरोर में तैनात डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि पीड़ित परिवार के पास अंतिम संस्कार तक के लिए पैसा नहीं हैं, तो एसडीएम ने अपनी ओर से दो हजार रुपये की मदद दी। 
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डीएचओ ने दिया संवेदनहीन जवाब
जाम के दौरान प्रदर्शनकारी डीएचओ राकेश कुमार को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। फोन पर बात करने पर उन्होंने पूछा कि शव कहां पड़ा है। उनकी यह बातें सुनते ही लोगों का उनके प्रति और गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने उनके इस रवैये पर जमकर नारेबाजी की। 


मेरे पास उनकी उपस्थिति नहीं आई है। इसके अलावा मैंने स्वयं दो बार पत्राचार भी किया, लेकिन जवाब नहीं मिला। चिकित्साकर्मी स्वयं मेरे साथ अभद्रता करते रहे हैं।
डॉ. राकेश, डीएचओ, मैनपुरी
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